वित्त वर्ष 27 में निजी बैंकों के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में लगभग 17 फीसदी की बढ़त हुई है जबकि निफ्टी 50 में करीब इसका आधा यानी 8.4 फीसदी का ही इजाफा हुआ है। ऐस इक्विटी के आंकड़ों के अनुसार इस इंडेक्स ने वित्त वर्ष 27 में निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स (7.5 % की बढ़त) और निफ्टी बैंक इंडेक्स (15.6 % की बढ़त) से भी बेहतर प्रदर्शन किया है।
जानकार निजी बैंकों के अच्छे प्रदर्शन का कारण उनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता, कारोबार की संभावनाएं, ट्रेजरी से मुनाफा और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा एफसीएनआर (बी) जमाओं और बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के लिए रियायत के साथ अदला-बदली की सुविधाओं को बढ़ावा देना रही है।
कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज (केआईई) के विश्लेषक दो वजहों से बड़े प्राइवेट बैंकों को लेकर सकारात्मक हैं। पहली वजह, उन्हें लगता है कि प्रतिस्पर्धा की धार कम होने से शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) पर दबाव कम हो सकता है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) कभी अपने समकक्ष निजी बैंकों से आगे निकलने के लिए अतिरिक्त जमाओं का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब अपनी वृद्धि को रफ्तार देने के लिए वे ज्यादा लागत वाली सावधि जमाओं पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। केआईई का कहना है कि इस नई रणनीति के लिए शायद ऊंची जमा दरों की जरूरत पड़े और इससे पीएसबी का सस्ती जमाओं का लाभ कम हो सकता है।
केआईई के एम बी महेश, अश्लेष सोंजे और निखिल सुरेश ने हाल में एक नोट में कहा, दूसरी बात, एफसीएनआर जमा जुटाने में मजबूती से पूरे सिस्टम में फंडिंग का दबाव कम हो सकता है और जमाओं की लागत भी कम हो सकती है। हालांकि सभी बैंकों को इससे फायदा होगा, लेकिन निजी बैंकों को ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि उनका फंडिंग मिलीजुली होती हैं।
ऐस इक्विटी के आंकड़ों के अनुसार निजी क्षेत्र के बंधन बैंक, येस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, इंडसइंड बैंक और आरबीएल बैंक के शेयरों में वित्त वर्ष 27 में 50 फीसदी तक की बढ़त देखी गई है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब ऐंड सिंध बैंक और यूको बैंक के शेयरों में 35 फीसदी तक की तेजी आई है।
5 जून को मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई ने विदेशी पूंजी की आवक को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए। इनमें नई एफसीएनआर (बी) जमाओं के लिए ‘ऐट पार’ अमेरिकी डॉलर-रुपया फॉरेक्स अदला-बदली सुविधा और पात्र ईसीबी व विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज के लिए रियायती अदला-बदली सुविधा शामिल है। खबरों के अनुसार, तब से अब तक लगभग 8 अरब डॉलर की एफसीएनआर (बी) जमाएं आ चुकी हैं।
इनमें अकेले भारतीय स्टेट बैंक ने 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा जुटाए हैं। ज्यादातर सरकारी बैंक ऐसी जमाओं पर 6-6.5 फीसदी और छोटे निजी बैंक 7.5 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं।
आईएनवीऐसेट पीएमएस के फंड मैनेजर और पार्टनर अनिरुद्ध गर्ग के अनुसार वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के आंकड़े बैंकिंग सेक्टर में कम मार्जिन दिखा सकते हैं, लेकिन निजी बैंक यह दिखाने में आगे रहेंगे कि शुद्ध ब्याज मार्जिन का निचला स्तर अब पीछे छूट चुका है।
गर्ग ने कहा, जमा दरों में बदलाव का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, एफसीएनआर (बी) के जरिए आवक से दूसरी तिमाही से फंडिंग का अंतर कम होने की उम्मीद है और अगर आरबीआई का अगला कदम दरों में कटौती के बजाय इन्हें बढ़ाने का होता है, तो रीपो से जुड़े खातों की दरों में बदलाव सबसे तेजी से होगा। पीएसयू बैंकों को बेहतर नतीजे साल की दूसरी छमाही में मिल सकते हैं।
उन्होंने कहा, अगस्त के बाद जब ऑफर फॉर सेल का दबाव खत्म हो जाएगा और उनके मार्जिन सबसे निचले स्तर पर पहुंच जाएंगे तो निजी क्षेत्र के मल्टीपल्स से काफी कम मूल्यांकन और मध्यम स्तर के आरओई को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।