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गिफ्ट सिटी IPO को झटका, पहला निर्गम वापस; IFSC ढांचे पर उठे सवाल

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कंपनी ने अपने नियंत्रण से बाहर के कारणों का हवाला देते हुए कहा कि वह किसी अधिक उपयुक्त समय पर फिर से बाजार में उतर सकती है

Last Updated- April 03, 2026 | 10:10 PM IST
Gift City

गुजरात इंटरनैशनल फाइनैंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) से पहला आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) वापस होने से इंटरनैशनल फाइनैंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। गिफ्ट सिटी को नई लिस्टिंग के नए केंद्र के तौर पर तैयार किया जा रहा था। बीते हफ्ते की शुरुआत में एक्सईडी एक्जिक्यूटिव डेवलपमेंट ने अपना 1. 2 करोड़ डॉलर का प्रस्तावित आईपीओ वापस ले लिया। कंपनी को इस इश्यू के लिए सिर्फ 5 फीसदी बोलियां ही मिली थीं। कंपनी ने इसका कारण वैश्विक संकट बताया। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली इस कंपनी की पहली शेयर बिक्री ऐसे समय पर आई थी, जब शेयर बाजारों में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव हो रहा था। इसी वजह से कंपनी को अपनीशेयर बिक्री की समयसीमा में दो बार संशोधन करना पड़ा।

कंपनी ने अपने नियंत्रण से बाहर के कारणों का हवाला देते हुए कहा कि वह किसी अधिक उपयुक्त समय पर फिर से बाजार में उतर सकती है। हालांकि इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव की भी भूमिका रही, लेकिन कई ढांचागत बाधाएं अभी भी गिफ्ट सिटी को व्यावहारिक लिस्टिंग केंद्र के रूप में उभरने से रोक रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, हालांकि एक्सईडी ने संस्थागत और खुदरा निवेशकों से लगभग 40 लाख डॉलर की प्रतिबद्धताएं हासिल कर ली थीं। लेकिन अल्टीमेट बेनिफिशियल ओनरशिप (यूबीओ) मानदंडों से जुड़ी चिंताएं बड़ी अड़चन साबित हुईं। अपने संदेश में एक्सईडी ने वैश्विक बाजार की अनिश्चितता के साथ-साथ अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) मानदंडों से जुड़ी प्रक्रियागत दिकक्तों की ओर भी इशारा किया।

सूत्रों के अनुसार आईएफएससी अथॉरिटी (आईएफएससीए) ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से संपर्क किया है, ताकि विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियमों में संशोधन किया जा सके। इसका मकसद भारतीय निवेशकों को उन चुनिंदा कंपनियों में निवेश की अनुमति देना है, जो गिफ्ट सिटी में लिस्ट होने की तैयारी कर रही हैं। इसके साथ ही नियामक विदेशी नागरिकों के लिए वीडियो-केवाईसी से जुड़ी चुनौतियों को भी दूर करने पर काम कर रहा है।

फिलहाल, भारत में रहने वाले लोगों और जिन इकाइयों के यूबीओ (अंतिम लाभार्थी मालिक) भारतीय हैं, उन्हें गिफ्ट सिटी में सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के शेयर रखने की अनुमति नहीं है। लेकिन वे आईए्फएससी एक्सचेंजों पर लिस्टेड विदेशी कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह असमानता इस इकोसिस्टम की वृद्धि में बाधा डाल रही है।

एक नियामकीय विशेषज्ञ ने कहा, चीन-हॉन्गकॉन्ग मॉडल से प्रेरणा लेते हुए, जहां चीन के निवेशकों की मुख्य भूमि के ए-शेयरों और हॉन्गकॉन्ग में लिस्टेड एच-शेयरों, दोनों तक पहुंच होती है, भारत में भी इसी तरह का एक ढांचा आईएफएससी के लिए बड़े बदलाव वाला साबित हो सकता है।

निवेश बैंकरों ने कहा कि गिफ्ट सिटी में लिस्ट होने की चाह रखने वाली विदेशी कंपनियों को एक खास फायदा है क्योंकि वे बैंक ट्रेजरी, लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत निवेश और घरेलू म्युचुअल फंड के जरिये भारतीय पूंजी का लाभ उठा सकती हैं। मौजूदा चुनौतियों के बावजूद कुछ विदेशी कंपनियां आईएफएससीए में लिस्टिंग की संभावनाएं तलाशना जारी रखे हुए हैं।

एक निवेश बैंकर ने बताया, तीन से चार विदेशी कंपनियां ऐसी हैं, जो अगले महीने आईपीओ के लिए दस्तावेज जमा करा सकती हैं। इनमें से एक कंपनी तो बिना कोई फंड जुटाए सीधे लिस्टिंग पर विचार कर रही है। सबसे छोटा निर्गम लगभग 10 करोड़ डॉलर का है।

लेकिन उद्योग के अधिकारियों ने आगाह किया कि निवेश के कड़े नियमों के कारण इश्यू जारी करने वाली कंपनियां दूसरे वैश्विक वित्तीय केंद्रों की ओर रुख कर सकती हैं, जहां नियम-कानून ज्यादा उदार हैं।

उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, गिफ्ट-आईएफएससी में निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने की जरूरत है। विदेशी निवेशकों के लिए तय समय-सीमा के भीतर केवाईसी पूरा करना अब भी मुश्किल बना हुआ है। खुदरा निवेशकों की भागीदारी न होने से, लिक्विडिटी और बाहर निकलने के विकल्प भी सीमित ही रहेंगे।

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First Published - April 3, 2026 | 10:07 PM IST

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