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शेयर बाजार का बदला चेहरा: 10 साल में 9 गुना बढ़े निवेशक, लेकिन शिकायतों की रफ्तार हुई कम

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पिछले दशक में शेयर बाजार के सक्रिय निवेशक 9 गुना बढ़े हैं, फिर भी बेहतर तकनीक और डिजिटल लेनदेन की वजह से ब्रोकरेज के खिलाफ शिकायतों में भारी कमी आई है

Last Updated- May 03, 2026 | 9:05 PM IST
Retail Investors
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

नए निवेशकों की संख्या में हुई जबरदस्त वृद्धि के बावजूद आम शिकायतों में उतनी तेजी से बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आंकड़ों का बिजनेस स्टैंडर्ड ने विश्लेषण किया है। इससे पता चलता है कि पिछले एक दशक में सक्रिय निवेशकों की संख्या के मुकाबले सापेक्ष आधार पर शिकायतों में वाकई कमी आई है। हाल में जारी 2025-26 वित्त वर्ष के आंकड़ों से पता चला है कि ब्रोकरेज फर्मों के खिलाफ कुल 15,770 शिकायतें दर्ज की गईं। 4.57 करोड़ सक्रिय ग्राहकों के आधार पर यह आंकड़ा प्रति दस लाख ग्राहकों पर 340 शिकायतों का है। 

यह इससे पहले के वर्ष के मुकाबले कम है। पूर्ववर्ती वर्ष में प्रति 10 लाख सक्रिय ग्राहकों पर 400 शिकायतें दर्ज की गई थीं। अभी के ताजा आंकड़े एक दशक पहले के मुकाबले सापेक्ष आधार पर कम हैं। 2015-16 में प्रति दस लाख सक्रिय निवेशकों पर 900 शिकायतें थीं। उस समय सक्रिय ग्राहकों की संख्या 52 लाख थी और तब से यह 8.8 गुना बढ़ गई है।

सक्रिय ग्राहक वे होते हैं जिन्होंने पिछले एक साल में कम से कम एक बार ट्रेडिंग की हो। ब्रोकरेज के खिलाफ शिकायतों में फंड या दस्तावेज न मिलना, या बिना सहमति के ट्रेड करना आदि शामिल हो सकता है। 

इनमें से ज्यादातर प्रक्रियाओं में अब बदलाव आ गया है। पहले बकाया रकम का भुगतान चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिये किया जाता था। अब यह काम ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सीधे निवेशक के बैंक खाते में किया जाता है। पहले कॉन्ट्रैक्ट नोट जैसे दस्तावेज डाक से भेजे जाते थे। अब अक्सर इन्हें ईमेल कर दिया जाता है। शेयरों की खरीद-बिक्री अब शायद ही कभी किसी डीलर के जरिये की जाती है, ज्यादातर निवेशक यह काम खुद ही किसी ऑनलाइन ब्रोकरेज पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिये करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को अपनाने से ऐसी कई दिक्कतें अब काफी हद तक खत्म हो गई हैं, जिनकी वजह से पहले शिकायतें आती थीं।

वर्ष 2006 से 2020 के बीच लुधियाना रिटेल इन्वेस्टर्स एसोसिएशन से जुड़े रहे जे आर जैग ने कहा, ‘सिस्टम में सुधार हुआ है।’ उन्होंने बताया कि ट्रेडिंग में आने वाली पुरानी दिक्कतें, तकनीकी अपग्रेडेशन की वजह से काफी हद तक खत्म हो गई हैं। अब शिकायतें ज्यादातर तभी आती हैं जब किसी तरह की तकनीकी खराबी हो, जिसकी जांच साफ ऑडिट ट्रेल्स के जरिये की जा सकती है, जिससे विवाद की कोई गुंजाइश नहीं बचती।

मुंबई स्थित इन्वेस्टर एजुकेशन एंड वेलफेयर एसोसिएशन के भावेश वोरा ने कहा, ‘शिकायतों में काफी कमी आई है।’ उन्होंने बताया कि उनकी संस्था को अब पहले के मुकाबले कम शिकायतें मिलती हैं। उनके अनुसार शेयर बाजारों की बदलती संरचना के साथ-साथ निवेशकों की शिक्षा और जागरूकता के लिए नियामकीय हस्तक्षेप ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है।

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First Published - May 3, 2026 | 9:05 PM IST

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