facebookmetapixel
Advertisement
तेल कीमतों में नरमी और डॉलर कमजोर होने से रुपया मजबूत, 95 से नीचे आयाStock Market: जंग थमने के संकेत से बाजार को करार, सेंसेक्स-निफ्टी में दो महीने की सबसे बड़ी छलांगघटी यील्ड और बेहतर लिक्विडिटी से कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में जोरदार तेजी, ₹27,000 करोड़ की भारी फंडिंगमजबूत रीस्टॉकिंग और ऊंची पीवीसी कीमतों से पाइप सेक्टर को Q4 में बूस्ट, लेकिन अगली तिमाही में दबाव बढ़ासराफा बाजार में सोने और चांदी में उछाल, सोना का भाव ₹1.56 लाख, चांदी ₹2.55 लाख परअमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दावे से दुनिया भर में शेयर बाजर चढ़े, तेल की कीमतें घटींसेबी की नई योजना: पूंजी बाजार को मजबूत करने के लिए शॉर्ट सेलिंग, एआई और बॉन्ड डेरिवेटिव पर फोकसशांति की उम्मीदों से कच्चे तेल में नरमी, विश्लेषकों ने घटाए कीमतों के अनुमानएक जैसी थीम, अलग-अलग नतीजे; पैसिव वैल्यू फंड्स ने ऐक्टिव को पीछे छोड़ाEditorial: ‘फीफा’ के आत्मघाती गोल, खेल से ज्यादा कारोबार

बॉन्ड मार्केट में हड़कंप: रुपये की कमजोरी और अमेरिकी यील्ड ने बिगाड़ा विदेशी निवेशकों का मूड

Advertisement

वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशकों ने मार्च में 13,000 करोड़ से अधिक की सरकारी प्रतिभूतियां बेचकर ऋण बाजार से हाथ खींच लिए हैं

Last Updated- March 22, 2026 | 9:18 PM IST
FPI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का मार्च 2026 में पूर्णतः सुलभ मार्ग (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश ऋणात्मक हो गया। एफपीआई के निवेश की प्रवृत्ति वैश्विक जोखिम भावना में कमजोरी से पलट गई है। 

क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएल) के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने मार्च में अब तक 13,027 करोड़ रुपये मूल्य की एफएआर प्रतिभूतियों की शुद्ध बिक्री की है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि यह उलटफेर मुख्य रूप से वैश्विक जोखिम लेने की प्रवृत्ति में गिरावट के कारण हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया। इससे आयातित महंगाई और भारत के चालू खाता घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये पर भी दबाव डाला। इससे विदेशी निवेशकों के लिए रिटर्न कम हो गया। 

निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने बताया, ‘विदेशी निवेश संकेतक (एफपीआई) के दृष्टिकोण से शेयर बाजार स्पष्ट रूप से नकारात्मक क्षेत्र में हैं। यहां तक ​​कि ऋण बाजार में भी रुपये की कथित कमजोरी बाजार के रुझान पर असर डाल रही है। परिणामस्वरूप बॉन्ड फिलहाल विदेशी निवेशकों के लिए विशेष रूप से आकर्षक नहीं हैं।’  

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि ने उभरते बाजारों के ऋणों को कम आकर्षक बना दिया। इससे वैश्विक पूंजी भारत जैसे बाजारों से दूर स्थानांतरित हो गई। कारोबारियों ने कहा कि मुद्रा अस्थिरता के साथ-साथ उच्च वैश्विक यील्ड ने एफएआर बॉन्ड पर हेज्ड रिटर्न के आकर्षण को कम कर दिया।

Advertisement
First Published - March 22, 2026 | 9:18 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement