Oil Price on US Iran Conflict: अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध इतिहास की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति बाधा बन सकता है। यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही कम हो जाती है या पूरी तरह थम जाती है, तो हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं। एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी ने अपनी रिपोर्ट में यही चेतावनी दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1 मार्च को केवल पांच तेल टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरे, जबकि हाल के दिनों में रोजाना करीब 60 टैंकर गुजर रहे थे। यह जानकारी ‘कमोडिटीज एट सी’ के आंकड़ों पर आधारित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर टैंकरों की आवाजाही में यह गिरावट एक सप्ताह तक बनी रहती है, तो इसे ऐतिहासिक माना जाएगा। यदि यह स्थिति इससे अधिक समय तक जारी रहती है, तो यह तेल बाजार के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकती है। ऐसे में सीमित आपूर्ति के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी और इसका असर वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई देगा।
इस साल के पहले दो महीनों में प्रतिदिन लगभग 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और अन्य उत्पाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते भेजे गए। इनमें से 82 प्रतिशत एशियाई बाजारों में पहुंचे। दुनिया की करीब 18 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति भी इसी मार्ग से होती है। एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के अनुसार, इस ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा बाधित होने पर आर्थिक और वित्तीय झटके लग सकते हैं।
अगर टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो जाती है, तो प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल और उत्पाद खतरे में पड़ सकते हैं। वास्तविक मात्रा इस पर निर्भर करेगी कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की वे पाइपलाइनें कितनी क्षमता से संचालित होती हैं, जो इस क्षेत्र को दरकिनार करती हैं।
यदि कई महीनों तक प्रतिदिन 70 से 80 लाख बैरल की आपूर्ति प्रभावित रहती है, तो यह मात्रा रूस-यूक्रेन युद्ध या 1990 के खाड़ी युद्ध के शुरुआती जोखिम से भी ज्यादा होगी।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी का मानना है कि शार्ट टर्म में तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा। कीमतें समाचार, आशंकाओं, अफवाहों और घबराहट में की गई खरीद से प्रभावित होंगी।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिये आपूर्ति फिर से सामान्य हो जाती है, लेकिन उसमें ईरान का निर्यात शामिल नहीं होता, तो आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 80 डॉलर के मध्य स्तर के आसपास बनी रह सकती हैं।
हालांकि, जिन बाजारों में भंडार कम है, वहां आपूर्ति की कमी का असर अधिक महसूस किया जाएगा। यदि कई महीनों तक प्रतिदिन 70 लाख बैरल की कमी बनी रहती है, तो तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी ऊपर जा सकती है, क्योंकि सीमित आपूर्ति के चलते मांग को नियंत्रित करना पड़ेगा।