देश के बाजार नियामक सेबी का बोर्ड सोमवार को बैठक के लिए एकत्र होगा, जिसमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए निपटान नियमों में ढील और बाजार मध्यस्थों के लिए नियामक ढांचे में सुधार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक की तैयारियों और एजेंडा से परिचित लोगों ने यह जानकारी साझा की।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों में से एक यह है कि एफपीआई को समान दिन के नकद बाजार लेनदेन (कैश मार्केट ट्रेड्स) के लिए फंड्स का नेटिंग करने की अनुमति दी जाए। वर्तमान में लागू नियमों के तहत, एफपीआई को प्रत्येक इक्विटी कैश मार्केट लेनदेन का निपटान अलग-अलग करना पड़ता है। इसका मतलब यह है कि किसी भी खरीदारी को किसी बिक्री लेनदेन से स्वतंत्र रूप से पूरा करना होता है, चाहे लेनदेन उसी दिन क्यों न हुए हों।
सेबी ने अब इस व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसमें एफपीआई को “नेटिंग ऑफ फंड्स” की सुविधा मिलेगी। इसका अर्थ है कि एफपीआई अपनी बिक्री से प्राप्त धनराशि का उपयोग उसी दिन की खरीदारी की देनदारियों को पूरा करने के लिए कर सकेंगे। इससे उन्हें केवल नेट देय राशि का भुगतान करना होगा।
सेबी की अगली बोर्ड बैठक में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) से जुड़े सुधारों के साथ ही बाजार के शासन और नियमों से संबंधित कई अहम प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। यह बैठक सेबी के अध्यक्ष Tuhin Kanta Pandey की अध्यक्षता में होगी, जो 1 मार्च 2025 से पद संभाल रहे हैं। यह उनके कार्यकाल की पांचवीं बोर्ड बैठक होगी।
सूत्रों के अनुसार, एफपीआई सुधारों का उद्देश्य मौजूदा ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम से जुड़े अतिरिक्त फंडिंग की जरूरत को कम करना है। वर्तमान प्रणाली में एफपीआई को लेन-देन के लिए कम से कम एक अतिरिक्त दिन के लिए अतिरिक्त फंड की आवश्यकता पड़ती है, जिससे लेन-देन की लागत बढ़ जाती है। यह प्रस्ताव इसी चिंता के मद्देनजर पेश किया जा रहा है।
बॉर्ड बैठक में बाजार मध्यस्थों के लिए “फिट एंड प्रॉपर पर्सन” मानदंडों में व्यापक सुधार पर भी विचार किया जाएगा। इसका मकसद प्रक्रियागत स्पष्टता और निष्पक्षता को बढ़ाना है। इसके तहत, सेबी यह प्रस्ताव कर रहा है कि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम विंडिंग-अप आदेश ही अयोग्यता तय करने में शामिल किया जाए, न कि सिर्फ़ विंडिंग-अप प्रक्रिया शुरू होने की सूचना।
इसके अलावा, नियमों में सुनवाई का अधिकार स्पष्ट रूप से शामिल करने पर भी विचार किया जाएगा। फिलहाल यह प्रथा मौजूद है कि संबंधित पक्ष को उचित सुनवाई का अवसर दिया जाता है, लेकिन इसे नियमों में स्पष्ट रूप से दर्ज करने का प्रस्ताव है, ताकि किसी भी तरह की प्रक्रियागत अस्पष्टता दूर हो।
बोर्ड बैठक में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) से जुड़े ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी।
एक और महत्वपूर्ण एजेंडा है उच्चस्तरीय पैनल की रिपोर्ट पर विचार करना, जो सेबी के शीर्ष अधिकारियों के हितों के टकराव और पारदर्शिता को लेकर तैयार की गई है। पैनल की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अधिक खुलासा और “ज़ीरो-टॉलरेंस” संस्कृति लागू की जाए, ताकि हितों के टकराव की स्थिति में कड़े नियम लागू किए जा सकें।