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बैंकों की बंपर कमाई फिर भी फिसला मूल्यांकन, निफ्टी 50 के मुकाबले बैंक निफ्टी में रिकॉर्ड गिरावट

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दमदार आय वृद्धि के बावजूद, बॉन्ड यील्ड और खुदरा ऋण डिफॉल्ट के डर से बैंक निफ्टी का मूल्यांकन निफ्टी 50 के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है

Last Updated- May 18, 2026 | 10:38 PM IST
Banking Sector Outlook
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बाजार के मौजूदा हालात के बीच बैंकिंग क्षेत्र की वृद्धि दर और उनकी कमाई की चाल निवेशकों को डराने लगी हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बेंचमार्क निफ्टी 50 सूचकांक के मुकाबले बैंक निफ्टी लगातार कम मूल्यांकन के साथ कारोबार कर रहा है। बैंक निफ्टी फिलहाल बेंचमार्क निफ्टी 50 की तुलना में 43.5 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। वर्ष 2015 में सूचकांक के मूल्यांकन आंकड़े उपलब्ध होने के बाद से यह फासला सबसे अ​धिक के करीब है। 

बैंक निफ्टी का प्राइस-टु-बुक अनुपात 1.83 है जबकि निफ्टी50 का 3.25 है। व्यापक बाजार के मुकाबले बैंकिंग शेयरों के मूल्यांकन में गिरावट बढ़ गई है, जबकि पिछले कुछ वर्षों से यह क्षेत्र देश में कंपनियों की आय में अहम भूमिका निभाता रहा है। उदाहरण के लिए पिछले 12 महीनों में बैंक निफ्टी की प्रति शेयर आय (ईपीएस) में 4फीसदी की वृद्धि हुई है जो पिछले साल मई के अंत में लगभग 3,810 रुपये से बढ़कर सोमवार को लगभग 3,960 रुपये हो गई। इसी अवधि में निफ्टी50 कंपनियों की ईपीएस में 4.3 फीसदी  की वृद्धि हुई जो लगभग 1,109 रुपये से बढ़कर लगभग 1,156.5 रुपये हो गई।

बैंकिंग क्षेत्र ने तीन वर्ष, पांच वर्ष और 10 वर्ष की अवधियों में आय वृद्धि के मामले में व्यापक बाजार के मुकाबले दमदार प्रदर्शन किया है। पिछले पांच वर्षों में बैंक निफ्टी की ईपीएस में 172फीसदी की वृद्धि हुई है जबकि निफ्टी 50 के ईपीएस में लगभग 117 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सूचकांक का ईपीएस सूचकांक में शामिल कंपनियों की पिछले 12 महीने की संयुक्त आय दर्शाता है। विश्लेषकों का मानना है कि बैंकों की आय वृद्धि और उनके मूल्यांकन के बीच इस अंतर का कारण इस क्षेत्र की वर्तमान आय वृद्धि को लेकर निवेशकों का विश्वास डगमगाना है।

सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के सह-प्रमुख अनुसंधान और इक्विटी रणनीति, धनंजय सिन्हा ने कहा,‘बाजार में फिलहाल सोच यह है कि बॉन्ड यील्ड में वृद्धि, रुपये के अवमूल्यन, खुदरा ऋण के भुगतान में चूक जैसी चुनौतियों और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में कमी से कोई फायदा नहीं मिलने से बैंकों के लिए आगे चलकर अपनी आय वृद्धि की रफ्तार बनाए रखना मुश्किल होगा। इसके उलट निवेशक और विश्लेषक वाहन, पूंजीगत सामान और रक्षा जैसे क्षेत्रों में आय वृद्धि को लेकर अधिक आशावादी हैं।’

सिन्हा के मुताबिक इससे बैंकिंग शेयरों के मूल्यांकन में गिरावट आई है जबकि व्यापक बाजार में कुछ सबसे पसंदीदा क्षेत्रों में मूल्यांकन स्थिर बना हुआ है या उसमें तेज इजाफा हुआ है।

उदाहरण के लिए निफ्टी 50 का प्राइस-टु-बुक अनुपात पिछले दशक में लगभग अपरिवर्तित रहा है जो अक्टूबर 2015 के अंत में 3.18 से बुधवार को 3.24 हो गया। इसी अवधि में बैंक निफ्टी का प्राइस-टु-बुक अनुपात 2.4 से लगभग एक चौथाई कम होकर 1.83 रह गया है।

इसी तरह, निफ्टी 50 का प्राइस-टु-अर्निंग (पी/ई) मल्टीपल पिछले दशक में केवल 4.5 फीसदी घटा है जो अक्टूबर 2015 के अंत में 21.4 गुना से घट कर बुधवार को 20.45 गुना हो गया। 

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First Published - May 18, 2026 | 10:22 PM IST

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