कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) जल्द ही सरकारी कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए नई डिजिटल सामग्री तैयार करने के मकसद से एक प्रायोगिक परियोजना शुरू करने जा रहा है। इस योजना को अगले दो महीनों में लागू किए जाने की संभावना है। इस पहल के तहत 9 मॉड्यूल, 50 सब-मॉड्यूल और लगभग 200 लर्निंग यूनिट तैयार किए जाएंगे।
इस परियोजना पर केंद्र सरकार करीब 8 करोड़ रुपये खर्च कर सकती है। सामग्री तैयार करने का काम एक ऐसे वेंडर को दिया जाएगा, जिसे प्रस्ताव निवेदन (आरएफपी) के जरिये चुना जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस नई लर्निंग सामग्री को ऑनलाइन मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा ताकि पूरे कौशल विकास तंत्र में प्रशिक्षण सामग्री एक मानक वाला हो।
यह पहल इसलिए शुरू की गई है क्योंकि अवार्डिंग संस्थाओं ने मौजूदा मॉड्यूल में कुछ कमी की शिकायत की थी। भारत के कौशल तंत्र में अवार्डिंग संस्थाएं वे संस्थाएं होती हैं, जिन्हें प्रशिक्षण और मूल्यांकन पूरा करने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र देने का अधिकार होता है। ये संस्थाएं राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) के अधीन काम करती हैं, जो व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण तंत्र की निगरानी करता है। एनसीवीईटी वास्तव में एमएसडीई के तहत भारत के व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास तंत्र का प्रमुख नियामक है। इसकी स्थापना 2018 में हुई थी।
इसका मुख्य काम अवार्डिंग संस्था को मान्यता देना और उन्हें नियंत्रित करना, राष्ट्रीय कौशल पात्रता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुसार मानक तय करना और देशभर में प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन की गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित करना है। खबर छपने तक एनसीवीईटी और कौशल विकास मंत्रालय, दोनों को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला था।
वर्तमान में, कई कौशल विकास कार्यक्रमों में एक सामान्य पाठ्यक्रम ढांचा अपनाया जाता है। इसमें 30, 60, 90 और 120 घंटे के चार मॉड्यूल शामिल होते हैं जो मिलकर लगभग 11 व्यापक विषयों को कवर करते हैं, जैसे संचार कौशल और कार्यस्थल से जुड़े कौशल। अधिकारियों के अनुसार, यही ढांचा कृषि से लेकर तकनीक तक कई अलग-अलग क्षेत्रों में समान रूप से उपयोग किया जा रहा है।
अवार्डिंग संस्था ने बताया है कि यह मौजूदा ढांचा अलग-अलग क्षेत्रों की प्रशिक्षण की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त रूप से लचीला नहीं है। फीडबैक में यह बात सामने आई कि विभिन्न क्षेत्रों में कौशल की जरूरतें काफी अलग होती हैं, लेकिन फिर भी एक ही तरह के मॉड्यूल सभी जगह लागू किए जा रहे हैं जो प्रभावी प्रशिक्षण में बाधा बन सकता है।