‘टीके से अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम कम’

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 3:32 AM IST

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) और राष्ट्रीय कोविड कार्य बल के चेयरमैन वी के पॉल के मुताबिक स्वास्थ्यकर्मियों पर किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि टीका लगने के बाद अस्पताल में दाखिल होने की संभावना 75 से 80 प्रतिशत तक कम हो जाती है। इससे पता चलता है कि टीकाकरण कोविड-19 से बचाव में कितना प्रभावी है।
पॉल ने कहा कि अध्ययनों में पाया गया है कि जिन स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लग चुका है उनमें से केवल 8 फीसदी को ऑक्सीजन की जरूरत पडऩे की संभावना है जबकि आईसीयू में दाखिले की जरूरत केवल 6 फीसदी लोगों को पड़ सकती है। पॉल ने कहा, ‘महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मी सर्वाधिक जोखिम में रहते हैं। अध्ययन के मुताबिक अत्यधिक जोखिम वाला समूह होने के बावजूद टीका उन्हें बचाता है और बीमारी के गंभीर होने की आशंका कम करता है।’ पॉल ने आश्वस्त किया कि निजी क्षेत्र में भी टीके व्यवस्थित तरीके से पहुंचाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें निजी सुविधाओं के प्रसार, उनकी मांग और टीका आपूर्ति की खपत की उनकी क्षमता के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। इसके आधार पर ही उन्हें टीके उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बीते छह सप्ताह में जितने टीके  लगाए गए हैं उनमें से 53 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए। पॉल ने कहा कि राज्य, केंद्र और निजी क्षेत्र की भागीदारी से टीकाकरण गति पकड़ेगा। आगामी 21 जून से प्रभावी होने जा रहे नए दिशानिर्देशों के अनुसार राज्यों को निजी अस्पतालों से मांग जुटानी होगी और इस दौरान क्षेत्रीय संतुलन और बड़े-छोटे अस्पतालों के बीच टीके के समान वितरण पर ध्यान देना होगा। गत 7 जून को सरकार ने घोषणा की थी कि वह राज्यों से टीका खरीद का काम वापस अपने हाथ में लेगी और 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को सरकार की ओर से नि:शुल्क टीका लगाया जाएगा।  

First Published : June 18, 2021 | 11:11 PM IST