बीएस बातचीत
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) और बॉम्बार्डियर ट्रांसपोर्टेशन ने दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) के ट्रेन के पहले प्रारूप का अनावरण किया। एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह ने शाइन जैकब को इसके आगामी मार्गों, समयसीमा पर इस योजना को पूरा करने और निवेश योजना के खाके के बारे में बताया
ट्रेनों के मौजूदा प्रारूप मसलन मेट्रो या बुलेट ट्रेन के मुकाबले आरआरटीएस कैसे अलग होगा?
जहां तक स्टेशन के अनुभवों की बात है तो यह मेट्रो से ज्यादा अलग नहीं होगा। प्लेटफॉर्म पर 10 फीसदी स्क्रीन दरवाजे होंगे क्योंकि ये ट्रेन काफी तेज हैं। मेट्रो और यहां तक कि बुलेट ट्रेन की तुलना में बॉम्बार्डियर ट्रेन सेट की गति काफी तेज होगी। बुलेट ट्रेन की तुलना में इनकी गति 40 फीसदी अधिक होगी क्योंकि बुलेट ट्रेन स्टेशनों में लंबी दूरी होगी। यहां ट्रेन की गति तेज होना जरूरी है क्योंकि हर छह किलोमीटर पर एक स्टेशन है। हमें यात्रा करने वालों के हिसाब से सोचना है। अगर मैं कहीं भी जाता हूं और स्टेशन बनाता हूं तो यह उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी नहीं होगी। अगर यह एक अतिरिक्त बोझ भी है तो हम यात्रा की सहूलियत के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। आखिरकार सभी तंत्र एक साथ आएंगे और आपस में जुड़ जाएंगे।
बहुमॉडल परिवहन के लिए आरआरटीएस कितना महत्त्वपूर्ण है?
हमने पिछले 20 सालों में मेट्रो और बड़ी तादाद में हवाई अड्डों को जोड़ा है। ट्रेन की गति भी बढ़ रही है। दुर्भाग्य से शहर के भीतर ही यात्रा करने (इंटरसिटी) के संदर्भ में हम ज्यादा कुछ नहीं कर सके हैं। अगर आप मेरठ से दिल्ली की यात्रा करना चाहते हैं तो आपको टैक्सी या बस पर निर्भर रहना होगा। किसी यात्री के लिए चीजें ऐसी हैं कि इसका पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है। ऐसी चीजें इंटरसिटी यात्रा के लिए बेहद खराब स्थितियां तैयार करती हैं। दूसरे शहरों के साथ भी कनेक्टिविटी की बात आने पर स्थिति लगभग समान ही है। आरआरटीएस के जरिये पूरा जोर बहु मॉडल एकीकरण पर होगा। जहां तक संभव है हम परिवहन के प्रत्येक साधनों मसलन मेट्रो, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन (निजामुद्दीन), बस स्टैंड तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। एक व्यक्ति जो हवाईअड्डे तक जाने के लिए अपनी निजी गाड़ी में तीन से चार घंटे तक का वक्त बिताता है, वह 70 मिनट में वहां तक पहुंच सकता है। इसके अलावा स्टेशन शहर के बीच में भी होगा।
क्या कोविड-19 की वजह से दिल्ली और मेरठ के बीच आपके पहले कॉरिडोर की शुरुआत करने की समयसीमा प्रभावित हुई है?
जब आप किसी परियोजना को अमलीजामा पहना रहे होते हैं तब कई पहलुओं पर एक साथ काम करना होता है। यह एक बड़ा चुनौती भरा काम है। दिल्ली से मेरठ तक का 82 किलोमीटर तक का हिस्सा ही अपने आप में काफी बड़ा है। इस तरह की परियोजना में सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न प्राधिकरणों से मंजूरी लेना है। इसके अलावा हम हर 500 मीटर की दूरी पर घनी आबादी वाले क्षेत्रों से जुड़ते हैं जहां जमीन के मालिक भी हैं। हर जगह लोगों के जोखिम को कम करने की जिम्मेदारी हमारे कंधे पर होती है। इसका मतलब यह हुआ है कि अगर आपको इनसे समय पर मंजूरी मिलती है तब आप काम जल्दी शुरू कर सकते हैं। हमने अपना काम लॉकडाउन के दौरान भी जारी रखा।
दिल्ली मेरठ परियोजना की कुल लागत करीब 30,000 करोड़ रुपये है जिनमें परियोजना का खर्च और उसमें होने वाली वृद्धि भी शामिल है। काम अब चार चरणों में होगा॥ पहले 20 किलोमीटर पर काम होगा और इसके बाद हर छह महीने में 20 किलोमीटर पर काम होगा। पहले चरण की शुरुआत मार्च 2023 (साहिबाबाद से दुहाई) तक होने की उम्मीद है। कोविड-19 और पिछली सर्दियों में प्रदूषण की वजह से काम बंद होने के बावजूद हम समय-सीमा पर काम को पूरा करने को लेकर आश्वस्त हैं। मुख्य रास्तों के लिए जमीन अब हमारे पास है। हम मेरठ और दिल्ली के कुछ हिस्सों को छोड़कर पूरी तरह से काम कर रहे हैं। हमने निर्माण कार्य से पहले के कामों की शुरुआत कर दी है मसलन केबल , भूमिगत लाइनों और हाई टेंशन लाइनों को हटाने का काम किया जा रहा है।
ऐसी रिपोर्ट हैं कि भूमिगत मार्ग तैयार करने के लिए चीन की कंपनी शांघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी की निविदा को रद्द कर दिया गया है। क्यां यह अनुबंध एल2 बोली लगाने वाले को दिया गया है?
परियोजना के इस हिस्से के लिए बोली का मूल्यांकन किया जा रहा है और इस पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है। एक नीति के तौर पर एनसीआरटीसी किसी भी बोली पर मूल्यांकन पूरा होने से पहले कोई टिप्पणी नहीं करता है।
दूसरे कॉरिडोर की क्या स्थिति है जिसकी आपने योजना बनाई थी?
एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने 2023 के लिए अपनी परिवहन योजना में आठ गलियारों की योजना बनाई थी जिनमें से तीन को 2006 में प्राथमिक कॉरिडोर के रूप में लिया गया। इन तीन कॉरिडोर में दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-पानीपत और दिल्ली अलवर हैं। इन पर काम पहले से ही जारी है। पहला दिल्ली-मेरठ है जिसके लिए मंजूरी दी गई है और यहां भी काम जोरशोर से हो रहा है। दूसरा दिल्ली-अलवर है। इसके लिए हमने एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की है जिसे तीनों राज्यों (दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान) ने मंजूरी दी है। अब यह कैबिनेट की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया है। हालांकि हम सड़क चौड़ीकरण, पेड़ों की कटाई और निर्माण पूर्व कुछ गतिविधियों पर काम कर रहे हैं जिसके लिए हरियाणा ने हमें पहले से ही 100 करोड़ रुपये दिए हैं। करीब 106 किलोमीटर को कवर करने में 36,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। दिल्ली-पानीपत मार्ग पर करीब 30,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। हमारे बोर्ड ने इसके लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को मंजूरी दी है और इस वक्त यह दिल्ली और हरियाणा सरकारों के पास है।