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Defence Stocks: ऑर्डर तो बहुत हैं, पर कमाई चुनिंदा कंपनियों की- नुवामा ने बताए पसंदीदा शेयर

ऑर्डर बुक भरी होने के बावजूद अब असली कसौटी समय पर डिलीवरी, मुनाफा और बैलेंस शीट की मजबूती है; नुवामा की पसंद BEL, SOIL और DPIL।

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- January 16, 2026 | 2:32 PM IST

Defence Stocks: भारत के डिफेंस सेक्टर में ऑर्डरों की बाढ़ आ चुकी है। पिछले तीन साल में हजारों करोड़ के सौदे मंजूर हुए, कंपनियों की ऑर्डर बुक भर गई और आने वाले कई सालों का काम पहले से तय हो गया। लेकिन नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट कहती है कि अब कहानी का सबसे अहम मोड़ आ गया है। सवाल अब यह नहीं है कि ऑर्डर मिलेंगे या नहीं, बल्कि यह है कि कंपनियां इन ऑर्डरों को समय पर पूरा कर पाएंगी या नहीं।

ऑर्डर की भरमार, काम की कोई कमी नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 36 महीनों में करीब 9 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च तय किया है, जिसमें से आधे से ज्यादा खर्च पहली छमाही में ही हो चुका है। इसका साफ मतलब है कि रक्षा कंपनियों के पास अगले कई सालों तक काम की कोई कमी नहीं है।

नुवामा का कहना है कि ज्यादातर रक्षा कंपनियों के पास अब सालाना बिक्री के मुकाबले 3 से 5 गुना तक के ऑर्डर पहले से मौजूद हैं। ऐसे में ऑर्डर मिलना अब कोई चुनौती नहीं रहा। निवेशकों और बाजार का फोकस अब इस पर आ गया है कि कंपनियां इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कर पा रही हैं या नहीं, और क्या इस प्रक्रिया में उनके मुनाफे और बैलेंस शीट पर दबाव तो नहीं बन रहा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब कंपनियों को ऑर्डर मिलने की चिंता नहीं है। असली समस्या अब यह हो गई है कि जो काम मिला है, उसे समय पर पूरा कैसे किया जाए। कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं जिनमें बाहर से मंगाए गए सामान पर निर्भरता है, मशीनों और सिस्टम को जोड़ना मुश्किल होता है और सरकारी जांच व ट्रायल में काफी समय लग जाता है। इसी वजह से कई काम देर से पूरे हो रहे हैं। इसका असर यह है कि कुछ कंपनियां अच्छा काम कर पा रही हैं, जबकि कुछ पीछे रह जा रही हैं, और इसी से उनके कारोबार और शेयर के प्रदर्शन में फर्क साफ नजर आने लगा है।

डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़त

नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक आगे चलकर डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और छोटे-छोटे सिस्टम बनाने वाली कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है। सेना को नया और आधुनिक सामान चाहिए और सरकार चाहती है कि यह सामान देश में ही बने। इसी वजह से ये कंपनियां रक्षा बजट से भी 2 से 3 गुना तेजी से बढ़ सकती हैं। इन कंपनियों को बाहर से सामान कम मंगाना पड़ता है, काम जल्दी पूरा हो जाता है और पैसा भी समय पर मिल जाता है, इसलिए इनकी हालत दूसरी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा मजबूत रहती है।

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किन Defence Stock पर नुवामा का भरोसा

रिपोर्ट साफ तौर पर कहती है कि जो कंपनियां काम समय पर पूरा करती हैं, ज्यादा सामान देश में ही बनाती हैं और पैसों का सही प्रबंधन करती हैं, वही आगे अच्छा करेंगी। नुवामा को इस मामले में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और SOIL सबसे बेहतर लगती हैं।

इसके उलट HNAL और BDL जैसी कंपनियों में प्रोजेक्ट पूरा होने में ज्यादा समय लगता है, इसलिए इनकी कमाई भी देर से आती है। वहीं DPIL जैसी छोटी कंपनियां जो सिस्टम के पार्ट बनाती हैं, काम जल्दी पूरा करती हैं और अच्छा मुनाफा कमाती हैं, इसलिए ये भी अच्छी मानी जा रही हैं।

Q3 से दिखेगा असली असर

नुवामा के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) से यह साफ दिखने लगेगा कि कौन सी कंपनियां अपने मिले हुए ऑर्डर से सच में पैसा कमा पा रही हैं। आमतौर पर साल की दूसरी छमाही में काम ज्यादा होता है और इस बार भी सरकार के लक्ष्य पूरे करने के दबाव के कारण H2FY26 में रक्षा सेक्टर का प्रदर्शन अच्छा रहने की उम्मीद है।

निवेश की कसौटी बदली

रिपोर्ट कहती है कि रक्षा सेक्टर अब एक नए दौर में पहुंच गया है। अब शेयर की कीमत इस बात से तय होगी कि कंपनी काम कितनी तेजी और समय पर पूरा करती है, न कि सिर्फ कितने ऑर्डर मिले हैं। हाल में शेयरों के दाम कुछ गिरे हैं, जिससे चुनिंदा कंपनियों में निवेश का मौका बन रहा है। नुवामा की टॉप पिक भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) है, जबकि SOIL और DPIL को लंबे समय के लिए अच्छे और मजबूत दांव माना गया है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

First Published : January 16, 2026 | 2:19 PM IST