भारतीय रेलवे ने समाप्त हुए वित्त वर्ष में माल ढुलाई से अब तक की सर्वाधिक कमाई की है। राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने वित्त वर्ष 2022 में 141.8 करोड़ टन माल ढुलाई की, जिससे 1.43 लाख करोड़ रुपये कमाई हुई है।
2020-21 में रेलवे का माल ढुलाई से राजस्व 1.24 लाख करोड़ रुपये था। पिछले साल 123.3 करोड़ टन माल ढुलाई हुई थी, उसके बाद रेलवे का माल भाड़ा इस बार 15 प्रतिशत बढ़ा है। माल ढुलाई में सालाना बढ़ोतरी 18 करोड़ टन से ज्यादा रही, जो किसी एक साल का रिकॉर्ड है।
इस सप्ताह की शुरुआत में रेल मंत्रालय ने बताया था कि पहली बार माल ढुलाई 140 करोड़ टन के रिकॉर्ड पर पहुंची है। विश्लेषकों ने कहा था कि आर्थिक वृद्धि में रिकवरी और महामारी के कारण कम हुई मांग के बाद की तेजी के कारण ऐसा हुआ है।
मंत्रालय ने कहा, ‘इसके पहले प्रतिशत के हिसाब से सबसे बेहतरीन बढ़ोतरी 1981-82 में 12.9 प्रतिशत रही थी। इसके पहले लोडिंग में सबसे बेहतर बढ़ोतरी 2005-06 में 6.61 करोड़ टन रही थी, जो एक दशक से ज्यादा पहले हासिल हुई थी।’
रेलवे की कुल ढुलाई में कोयले की हिस्सेदारी करीब आधी है, जो 20.5 प्रतिशत बढ़कर 65.33 करोड़ टन रही है। स्टील के लिए कच्चा माल, जिसमें लौह अयस्क शामिल है, की ढुलाई 7.3 प्रतिशत बढ़कर 19.7 करोड़ टन रही है।
माल ढुलाई के बास्केट में विविधीकरण का रेलवे का महत्तवाकांक्षी लक्ष्य तेज है और पिछले एक साल में अन्य वस्तुओं की ढुलाई में 1.5 करोड़ टन जुड़ा है। हालांकि उवर्रकों की ढुलाई में 8.5 प्रतिशत की कमी आई है और यह 4.95 करोड़ टन रहा है। मंत्रालय ने कहा कि यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमत में तेज बढ़ोतरी के कारण मांग में आई कमी की वजह से ऐसा हुआ है।
केंद्रीय बजट 2022-23 में रेलवे की ढुलाई का लक्ष्य 147.5 करोड़ टन रखा है, जिससे 1.65 लाख करोड़ रुपये राजस्व आएगा।