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जीएसटी में गिरफ्तारी के प्रावधान को मिल सकती है न्यायालय में चुनौती

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Last Updated- December 14, 2022 | 10:52 PM IST

कंपनियां वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत जेल के प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को अगले सप्ताह ओडिशा उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकती हैं।

सरकार का दावा है कि जीएसटी कानूनों के तहत उन कंपनियों पर कार्रवाई की गई है, जिन्होंने धोखाधड़ी करके इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा किया है। वहीं विशेषज्ञों ने इस प्रावधान में कई खामियां पाई हैं, खासकरक गिरफ्तारी से संबंधित प्रावधानों में खामियां मिली हैं।

एक कारोबारी को जेल की सजा दिए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए ओडिशा उच्च न्यायालय ने पाया कि 2018-19 में 11,251.3 करोड़ रुपये फर्जी दावे के 1620 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं 2019-20 में 25 जून तक 535 मामलों में 2,565.40 करोड़ रुपये के दावे किए गए।

कारोबारियों की गिरफ्तारी को लेकर विभिन्न न्यायालयों में मुकदमों में बहस कर रहे वकील अभिषेक रस्तोगी ने कहा कि केंद्रीय जीएसटी ऐक्ट की धारा 69 स्वैच्छिक है क्योंकि यह जीएसटी आयुक्तों को उन मामलों में गिरफ्तारी के अधिकार देती है, जिसमें ‘उन्हें लगता है कि’ व्यक्ति ने धोखाधड़ी से आईटीसी दावा किया है। आयुक्त 10 साल की सजा  का आदेश दे सकते हैं, अगर उन्हें लगता है कि धोखाधड़ी से दावा किया गया है। रस्तोगी ने कहा, ‘ऐसा मानने की वजह एक व्यक्तिपरक मसला है और इसके दुरुपयोग की संभावना है।’ रस्तोगी ने कहा कि अगले सप्ताह ओडिशा उच्च न्यायालय में इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी जाएगी।उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिए जाने से अधिकारी किस तरह से धोखाधड़ी वाले दावों को रोक सकते हैं।

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First Published - October 11, 2020 | 11:28 PM IST

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