देश में उपनिवेशवादी मानसिकता के लोग

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 11:16 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत एकमात्र देश है, जो पेरिस समझौते के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा करने की ओर अग्रसर है लेकिन इसके बावजूद उपनिवेशवादी मानसिकता के चलते देश पर पर्यावरण के नाम पर तरह-तरह के दबाव बनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से देश में भी ऐसी ही मानसिकता के चलते अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर या अन्य चीजों का सहारा लेकर अपने ही देश के विकास में रोड़े अटकाए जाते है। राजधानी स्थित विज्ञान भवन के प्लेनरी हॉल में उच्चतम न्यायालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय संविधान दिवस समारोह का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस उपनिवेशवादी मानसिकता को दूर करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इसके लिए सबसे बड़ी शक्ति और सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत भारत का संविधान ही है। उन्होंने कहा, ‘सरकार और न्यायपालिका, दोनों का ही जन्म संविधान की कोख से हुआ है। इसलिए, दोनों ही जुड़वां संतानें हैं। संविधान की वजह से ही दोनों अस्तित्व में आए हैं। इसलिए, व्यापक दृष्टिकोण से देखें तो अलग-अलग होने के बाद भी दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।’  
उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति एम वी रमण और कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर उच्चतम न्यायालय के सभी न्यायाधीश, सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश और अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश, भारत के सॉलिसिटर जनरल और विधि जगत के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।
मोदी ने विपक्षी दलों पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान दिवस के अवसर पर कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए कहा कि जो राजनीतिक दल अपना लोकतांत्रिक चरित्र खो चुके हैं, वह लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर सकते हैं। संसद के केंद्रीय कक्ष में संविधान दिवस पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री ने पारिवारिक पार्टियों को संविधान के प्रति समर्पित राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय बताया।  उन्होंने कहा, ‘पार्टी फॉर द फैमिली, पार्टी बाय द फैमिली, अब आगे कहने की जरूरत नहीं लगती है।’ मोदी ने कहा कि यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
लोकतंत्र मजबूत नहीं तो मोदी प्रधानमंत्री कैसे बने: कांग्रेस
कांग्रेस ने विपक्ष पर निशाना साधे जाने के बाद उन पर पलटवार किया और कहा कि अगर 70 वर्षों में लोकतंत्र को मजबूत और उसका सम्मान नहीं किया गया, तो फिर 2014 में मोदी प्रधानमंत्री कैसे बने। पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की ओर से विपक्ष पर निशाना साधने का कोई औचित्य नहीं था। शर्मा ने कहा, ‘यहां राष्ट्रीय दल भी हैं और क्षेत्रीय दल भी हैं। हर दल का अपना एक संविधान होता है। हर दल स्वयं निर्णय लेते हैं।   

First Published : November 26, 2021 | 11:29 PM IST