रिलायंस जियो जनवरी तक देश के 9 सबसे बड़े शहरों में 5जी सेवाएं मुहैया कराने की योजना बना रही है। सूत्रों का कहना है कि इसकी शुरुआत इस साल दो शहरों से हो सकती है। ये शहर दिल्ली और मुंबई हो सकते हैं। चार महानगरों, बेंगलूरु और हैदराबाद के अलावा अन्य शहरों में जामनगर, अहमदाबाद तथा लखनऊ शामिल होंगे।
दूरसंचार वेंडरों के मुताबिक उन्हें नहीं लगता कि 5जी रेडियो की शुरुआती जरूरत पूरी करने में कोई अड़चन आएगी। उनका अनुमान है कि अगले साल मार्च तक देश में करीब 70,000 से 72,000 जगहों पर 5जी रेडियो होंगे।’ ये मौजूदा टावरों के करीब 10 फीसदी हैं। एक दूरसंचार वेंडर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि तीनों दूरसंचार कंपनियां पूरे देश में हर महीने 3,000 से 4,000 जगहों पर 5जी रेडियो लगाएंगी।’
रिलायंस जियो ने 5जी की शुरुआत के बारे में भेजे गए सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। मगर टीएसपी और वेंडरों का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के हिसाब से ज्यादातर दूसरी दूरसंचार कंपनियां 5 से 7 सबसे बड़े शहरों में शुरुआत की योजना बना रही हैं। संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि 10 अगस्त तक स्पेक्ट्रम का आवंटन होने से अक्टूबर तक 5जी शुरू होने की उम्मीद है।
दूरसंचार वेंडरों का कहना है कि वे 5जी शुरू करने की रफ्तार तेज कर सकते हैं क्योंकि उनमें से कुछ के पास पहले ही देश में निर्माण करने के कारखाने हैं। उदाहरण के लिए नोकिया और सैमसंग पहले ही 5जी रेडियो का विनिर्माण कर रही हैं, इसलिए ये भारत में 5जी रेडियो की मांग आसानी से पूरी कर सकती हैं। दोनों कंपनियों ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के लिए समझौते किए हैं। एरिक्सन भारत में 5जी की मांग पूरी करने के लिए अपना उत्पादन बढ़ा सकती है।
वेंडरों का कहना है कि भारती एयरटेल और वोडाफोन इंडिया अपनी 5जी सेवाएं 3.5 गीगाहर्ट्ज बैंड में शुरू कर सकती हैं, जबकि रिलायंस जियो अपनी 5जी कवरेज बढ़ाने के लिए मिड बैंड को 700 बैंड के साथ जोड़ेगी। इस समय मुश्किल से ही कोई ऐसा 5जी फोन है, जो मिलीमीटर बैंड को सपोर्ट करता है। मगर चिप विनिर्माताओं को उम्मीद है कि अगले साल तक ये फोन भी आ जाएंगे। हालांकि उनकी कीमतें 3.5 गीगाहर्ट्ज और 700 बैंड पर काम करने वाले सामान्य 5जी फोन की तुलना में 30 से 40 डॉलर अधिक होगी। मिलीमीटर बैंड फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस और एंटरप्राइज सॉल्यूशन्स के लिए इस्तेमाल किए जाने के आसार हैं।
5जी शुरू करने की तैयारी पिछले कुछ समय से चल रही है। दूरसंचार कंपनियां 5जी टावर तैयार कर रही हैं। पावर बैकअप और बैकहॉल के लिए बड़े बैंडविड्थ की जरूरत होगी। सरकार ने नीलामी से ठीक पहले दूरसंचार कंपनियों को टावर से टावर के बीच बैक हॉल के लिए ई-बैंड में 250-250 मेगाहर्ट्ज के दो कैरियर आवंटित करने को मंजूरी दी है। इससे बड़े बैंडविड्थ के साथ आने वाली 5जी की एक प्रमुख समस्या दूर हो जाएगी।
दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि शुरुआती चरण में उन शहरों पर जोर होगा, जहां पहले ही भारी तादाद में 5जी डिवाइस मौजूद हैं। इस समय कुल मोबाइल फोन में 5जी फोन की करीब 7 फीसदी हिस्सेदारी है।
मोबाइल फोन चिप डिजाइन करने नाली सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार क्वालकॉम के अधिकारियों का अनुमान है कि 2022 में स्मार्टफोन बिक्री बढ़ने में 30 फीसदी योगदान 5जी का होगा। 5जी सेवाएं शुरू किए जाने से पहले ही 10 करोड़ लोगों के पास 5जी फोन हैं। दूरसंचार कंपनियों के मुताबिक सबसे पहले इन लोगों को ही 5जी सेवाओं का ग्राहक बनाया जाएगा।