सरकार ने राज्यों को इलेक्ट्रिकल और गैर-इलेक्ट्रिकल कोल्ड चेन की जरूरत का आकलन करने, ऐसा बुनियादी ढांचा मजबूत करने तथा अंतिम छोर और स्थलों तक कोल्ड चेन प्रबंधन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा कि हमने राज्यों से कहा है कि अगर वे निश्चित मात्रा में टीका लेते हैं, तो उन्हें अपने स्तर पर यह आकलन करना होगा कि उनकी कोल्ड चेन की जरूरत क्या होगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुमान के अनुसार सभी 29,000 कोल्ड चेन स्थलों में 240 वॉक-इन कूलर, 70 वॉक-इन फ्रीजर, 45,000 आइस-लाइन्ड रेफ्रिजरेटर, 41,000 डीप फ्रीजर और 300 सोलर रेफ्रिजरेटर का इस्तेमाल किया जाना है। भूषण ने कहा कि इसके अलावा राज्यों को और भी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
सरकार ने केंद्र और राज्य स्तर पर 23 मंत्रालयों तथा विभागों की भी पहचान की है और टीके की शुरुआत करने के लिए योजना, कार्यान्वयन, सार्वजनिक आवागमन, जागरूकता सृजन के लिए भूमिकाओं की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा 633 जिलों के कार्यबलों ने भी टीका प्रबंधन के संबंध में अपनी बैठकें की हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने किसी प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए हैं। टीका किए जाने के बाद बाजार प्राधिकार टीका विकास के चौथे चरण में पहुंच जाएगा जहां विनिर्माता को किसी भी प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। पॉल ने कहा, ‘यह एक परिपक्व टीका है और ये नए मंच हैं। हमें बहुत जिम्मेदार रहना होगा। टीकों की वैज्ञानिक आधार पर जांच की जा रही है और विनियामक मंजूरी देने के लिए काफी अधिक संतुष्ट होना चाहेगा।’
तीन टीकों की फिलहाल भारत के औषधि महानियंत्रक की एक विशेषज्ञ समिति द्वारा समीक्षा की जा रही है जिसमें ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय और एस्ट्राजेनेका द्वारा तैयार किया जा रहा सीरम इंस्टीट्यूट का कोविशील्ड टीका, भारत बायोटेक का टीका और अमेरिकी कंपनी फाइजर ने जर्मनी की बायोनटेक के साथ मिलकर एक टीका तैयार किया है।
पॉल ने यह भी कहा कि हालांकि यह अच्छी बात है कि भारत में संक्रमितों की तादाद अब कम हो रही है लेकिन पश्चिम देशों की तरह दूसरी या तीसरी लहर की संभावना अभी बरकरार है। उन्होंने कहा, ‘लड़ाई लंबी है।’
भारत में प्रत्येक 10 लाख पर संक्रमण के 7,178 मामले हैं जबकि वैश्विक स्तर पर औसतन यह संख्या 9,100 से अधिक है। वहीं भारत में प्रत्येक 10 लाख पर 104 लोगों की मौत और 1.45 प्रतिशत की मृत्यु दर बड़े देशों की तुलना में काफी कम है।