रेलवे खरीद की जांच करेगी जीएसटी जांच एजेंसी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 5:45 AM IST

जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) ने भारतीय रेलवे द्वारा जुलाई, 2017 से जारी निविदाओं की जांच शुरू की है। इसका मकसद आपूर्ति किए गए माल को कर चोरी के मकसद से कम वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) वाली श्रेणी में डालने वालों का पता लगाना और कार्रवाई करना है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीआईसी) और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवद्र्घन विभाग (डीपीआईआईटी) ने रेलवे से आग्रह किया था कि वह माल खरीदने के लिए अपनी निविदा सूचनाओं में जीएसटी दर का भी उल्लेख करे, जिसके बाद डीजीजीआई ने यह कदम उठाया है।
डीजीजीआई उन बोली लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, जो कथित रूप से कम जीएसटी दर का उल्लेख कर बोली हासिल करने और जीएसटी वंचना की अनुचित गतिविधियों में लिप्त हैं। डीजीजीआई की जांच में रेलवे द्वारा जुलाई 2017 से जारी सभी निविदाओं और खरीद के ब्योरे हासिल किए जाएंगे, जिनमें जीएसटी शुल्क के चैप्टर 86 और चैप्टर 84 के तहत बोलियां प्राप्त की गई थीं। चैप्टर 86 में रेलवे या ट्रामवे इंजन, रोलिंग स्टॉक एवं कलपुर्जे, रेलवे या ट्रामवे ट्रैक फिक्सचर्स, फिटिंग एवं पार्ट, मैकेनिकल ट्रैफिक सिग्नल उपकरण शामिल हैं। इन पर अगस्त, 2019 तक जीसटी पांच फीसदी था। बाद में इन उत्पादों पर जीएसटी की दर बढ़ाकर 12 फीसदी कर दी गई। चैप्टर 86 में परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, मशीनें, यांत्रिक उपकरण कलपुर्जे शामिल है, जिन पर कर 18  फीसदी है।
घटनाक्रम से परिचिति सूत्रों ने कहा कि अगर जांच में यह पाया गया कि रेलवे को उत्पादों की आपूर्ति माल की गलत श्रेणी दिखाकर की गई तो सीबीआईसी की जांच शाखा आवश्यक कदम उठाएगी। जांच संस्था का यह कदम दो विभागों- डीपीआईआईटी और सीबीआईसी के आग्र्रह के कारण उठाया गया है। दोनों विभागों ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन से आग्रह किया है कि निविदा आमंत्रण के नोटिस में सही जीएसटी दरों का उल्लेख किया जाए। एक बोलीदाता भारत फोर्ज ने आरोप लगाए थे कि सभी भागीदारों को समान मौके मुहैया नहीं कराए जा रहे हैं और विजेता बोलीदाता ने माल को अनुचित तरीके से कम कर श्रेणी में डाला है ताकि अन्य लोगों को प्रतिस्पर्धा में पछाड़ा जा सके।
डीपीआईआईटी, वित्त मंत्रालय और भारत फोर्ज ने ईमेल के जरिये भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। रेलवे ने कहा कि जीएसटी कानून में कहा गया है कि पंजीकृत करदाताओं को अपनी कर देनदारी का खुद आकलन करने की जरूरत है और रेलवे माल का वर्गीकरण नहीं कर सकता है। मंत्रालय ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल की कानूनी राय के मुताबिक इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अवकाश याचिका दायर की है।
भारत फोर्ज ने 2019 में डीपीआईआईटी से शिकायत की थी कि ‘टर्बो व्हील इम्पेलर बैलेंस असेंबली’ खरीद की निविदा में सफल बोलीदाता ने जानबूझकर 18 फीसदी के बजाय 5 फीसदी जीएसटी चुकाया। इससे जीएसटी राजस्व का नुकसान हुआ और बोलीदाता को 13 फीसदी का बेजा फायदा हुआ।

First Published : April 19, 2021 | 12:18 AM IST