जिंदगी भर नौकरी और मेहनत करने के बाद जब इंसान रिटायर होता है, तो उसके सामने एक अनोखी उलझन खड़ी हो जाती है। सालों की मेहनत से बैंक खाते में एक बड़ी रकम तो इकट्ठा हो जाती है, लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि अब इस पैसे को संभाला कैसे जाए ताकि यह खत्म न हो। चूंकि बहुत से लोगों को इतनी बड़ी रकम एक साथ संभालने का अनुभव नहीं होता, इसलिए कई बार वे गलत जगह पैसा लगा बैठते हैं या धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।
ऐसे समय में ‘एन्युटी’ (यानी हर महीने फिक्स्ड पेंशन देने वाली स्कीम) एक सच्चे मददगार की तरह काम आती है। भले ही इसमें बहुत ज्यादा मुनाफा न दिखे, लेकिन बुढ़ापे के लिए यह सबसे भरोसेमंद रास्ता है। गो डिजिट लाइफ इंश्योरेंस के वाइस प्रेसिडेंट (प्रोडक्ट्स) अशोक मनवानी का कहना है कि यह स्कीम सुरक्षित तो है, लेकिन इसकी सुरक्षा इस बात पर तय होती है कि आप कौन सा विकल्प चुनते हैं। इसके नफा-नुकसान को समझकर ही सही फैसला लिया जा सकता है।
मनवानी बताते हैं, “इस स्कीम की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें आपको हर महीने एक तय पेंशन मिलने की गारंटी मिलती है। जब आप यह प्लान खरीदते हैं, तभी तय हो जाता है कि आपको हर महीने कितने पैसे मिलेंगे। इसके बाद बाजार में चाहे मंदी आए या तेजी, आपकी पेंशन पर कोई आंच नहीं आती। यह उन बुजुर्गों के लिए बहुत सुकून देने वाली बात है जो बुढ़ापे में किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना चाहते।”
मनवानी के मुताबिक, जो लोग सिर्फ फिक्स्ड पेंशन से खुश नहीं हैं, उनके लिए बाजार से जुड़ा विकल्प भी होता है। इसमें आपकी पेंशन का एक हिस्सा शेयर बाजार (जैसे निफ्टी 50) के कामकाज से जोड़ दिया जाता है, लेकिन नीचे एक न्यूनतम पेंशन की गारंटी हमेशा बनी रहती है। इसका फायदा यह होता है कि जब बाजार अच्छा चलता है, तो आपकी पेंशन भी आम प्लान के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। इससे बुजुर्गों को महंगी होती दुनिया में अपना खर्च चलाने में आसानी होती है।
इसके अलावा, इसमें ‘पैसे वापसी’ (Return of Purchase Price) का एक बढ़िया विकल्प मिलता है। अगर आप इसे चुनते हैं, तो निवेशक की मौत होने पर, या किसी गंभीर बीमारी व अपाहिज होने की स्थिति में पूरी जमा-पूंजी परिवार को वापस मिल जाती है। यानी आपका पैसा डूबता नहीं है और आपके बाद बच्चों के काम आ सकता है।
जहां इस स्कीम के फायदे हैं, वहीं कुछ बातें ऐसी भी हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे बड़ी दिक्कत है महंगाई। मनवानी के मुताबिक, अगर आपने जीवनभर के लिए एक ही फिक्स्ड पेंशन का विकल्प चुन लिया, तो शुरू में तो वह रकम ठीक लगेगी। लेकिन जैसे-जैसे दूध, सब्जी और दवाइयां महंगी होंगी, उस पेंशन से घर चलाना मुश्किल होने लगेगा। इससे बचने के लिए हर साल थोड़ी-थोड़ी बढ़ने वाली पेंशन का विकल्प भी मिलता है, हालांकि उसमें शुरुआत में थोड़ी कम पेंशन मिलती है।
दूसरा रिस्क बाजार से जुड़े प्लान में है। जिस तरह बाजार की तेजी से आपकी पेंशन बढ़ सकती है, उसी तरह बाजार गिरने पर यह घट भी सकती है। कंपनियों की तरफ से सिर्फ न्यूनतम पेंशन ही सुरक्षित रहती है, बाकी का हिस्सा ऊपर-नीचे होता रहेगा। इसलिए, यह प्लान सिर्फ उन्हीं के लिए ठीक है जो थोड़ा-बहुत जोखिम उठाने को तैयार हैं।
मनवानी के मुताबिक, इस स्कीम में एक रिस्क प्रीमियम (किस्त) भरने को लेकर भी है। अगर आपने एक साथ पूरा पैसा देने के बजाय हर महीने या हर साल किस्त भरने का विकल्प चुना है, और आप किसी वजह से किस्त नहीं भर पाते, तो पॉलिसी बंद हो सकती है या फिर आपकी आगे की पेंशन बहुत कम हो सकती है।
मनवानी कहते हैं कि एक और व्यावहारिक दिक्कत है ‘जीवित होने का सर्टिफिकेट’ (लाइफ सर्टिफिकेट)। चूंकि यह पेंशन आपके जिंदा रहने तक ही मिलती है, इसलिए कंपनियों को हर साल यह फॉर्म भरकर देना पड़ता है कि आप सकुशल हैं। अगर कोई बुजुर्ग समय पर यह सर्टिफिकेट जमा करना भूल जाए, तो उनकी पेंशन कुछ समय के लिए रुक जाती है। हालांकि बाद में फॉर्म जमा करने पर सारा पैसा मिल जाता है, लेकिन बुढ़ापे में अचानक एक महीने भी पैसा रुक जाए, तो जेब का बजट बिगड़ जाता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि इस स्कीम में बीच में पैसा निकालना बहुत घाटे का सौदा होता है। इसे बनाया ही इसलिए गया है ताकि आप लंबे समय तक टिके रहें। अगर आप बीच में ही इस पॉलिसी को बंद करके अपना पैसा वापस मांगते हैं, तो आपको बहुत कम रकम मिलेगी, खासकर शुरुआती सालों में। कुछ प्लान तो ऐसे होते हैं जिनमें एक बार पेंशन शुरू होने के बाद आप चाहकर भी अपनी मूल रकम वापस नहीं निकाल सकते। कंपनियां आपको जीवनभर पेंशन देने का वादा इसीलिए कर पाती हैं क्योंकि आपका पैसा उनके पास सुरक्षित जमा रहता है।
मनवानी का मानना है कि बिना सोचे-समझे लिया गया कोई भी फैसला बुढ़ापे की प्लानिंग को बिगाड़ सकता है। यह स्कीम तभी सबसे अच्छा काम करती है जब आपको पता हो कि आपको हर महीने कितने पैसों की जरूरत है। चाहे आप बिल्कुल सुरक्षित फिक्स्ड पेंशन चुनें या बाजार के मुनाफे वाली स्कीम, यह बुढ़ापे की लाठी बनने का दम रखती है।