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संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में 200 वैज्ञानिकों की टीम ने बुधवार को जारी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट में आगाह किया कि मौजूदा तापमान वृद्धि के कारण पृथ्वी पर जीवन के लिए महत्वपूर्ण पांच महत्वपूर्ण सीमाओं के पार कर जाने का खतरा है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, दुबई में अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलन (सीओपी28) में जारी की गई ‘‘ग्लोबल टिपिंग पॉइंट्स’’ रिपोर्ट प्राकृतिक प्रणालियों की सीमाओं पर किया गया अब तक का सबसे गहन मूल्यांकन है। यह 26 महत्वपूर्ण बिंदुओं की पहचान करता है, जिनमें क्रायोस्फीयर (हिमखंड) जैसे पांच महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं, जो जलवायु परिवर्तन के मौजूदा स्तर के कारण पहले से ही खतरे में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पांच प्रमुख बिंदुओं में ग्रीनलैंड और पश्चिमी अंटार्कटिक में बर्फ की चादरें, उत्तरी अटलांटिक उपध्रुवीय गायर सर्कुलेशन, गर्म पानी की मूंगा चट्टानें और कुछ पर्माफ्रॉस्ट क्षेत्र हैं।
ब्रिटेन के एक्सेटर विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के अध्यक्ष और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक प्रोफेसर टिम लेनन ने कहा, ‘‘ये महत्वपूर्ण बिंदु बहुत बड़े पैमाने पर खतरे पैदा करते हैं जिनका मानवता ने पहले कभी सामना नहीं किया है।’’
एक सकारात्मक बात यह है कि रिपोर्ट सामाजिक प्रगति में संभावित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालती है, जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा की वृद्धि। एक्सेटर विश्वविद्यालय के डॉ. स्टीव स्मिथ ने कहा कि जिस तरह बदलाव के लिए नकारात्मक बिंदु होते हैं, उसी तरह सकारात्मक बिंदु भी एक-दूसरे को मजबूत कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए, जैसे-जैसे हम उस निर्णायक बिंदु को पार करते हैं, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन सड़क परिवहन का प्रमुख रूप बन जाते हैं, बैटरी तकनीक लगातार बेहतर और सस्ती होती जा रही है।’’
नॉर्वे के ओस्लो विश्वविद्यालय में गवर्नेंस लीड रिसर्च फेलो मंजना मिल्कोरिट ने कहा, ‘‘जैसे ही हम 1.5 डिग्री सेल्सियस पार करेंगे, इन बिंदुओं को पार करने के प्रयासों के उल्लंघन को रोकने के उपाय उपलब्ध नहीं रहेंगे।’’
जलवायु वार्ता में वार्ताकार जलवायु परिवर्तन के प्राथमिक कारण जीवाश्म ईंधन के जलने से निपटने के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं। मिल्कोरिट ने इस बात पर जोर दिया कि सदी के मध्य तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने से भी इन महत्वपूर्ण सीमाओं को पार करने से नहीं रोका जा सकेगा।