वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल आज से 3 दिन की कनाडा यात्रा पर हैं। इसका मकसद प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के लिए बातचीत को तेज करना है। इस यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा में बदलाव प्रमुखता से शामिल होने की उम्मीद है। कनाडा के विशाल प्राकृतिक संसाधन और भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह महत्त्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी में असैन्य परमाणु सहयोग भी एक प्रमुख स्तंभ रहने की संभावना है।
कनाडा के साथ मुक्त व्यापार समझौते से भारत को ऊर्जा (3413.6 लाख डॉलर) और उर्वरक (2631.7 लाख डॉलर) जैसे रणनीतिक उत्पादों के आयात के स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है। वित्त वर्ष 2026 में कनाडा से शीर्ष आयातों में मटर (3,112.4 लाख डॉलर) और मसूर (3065.6 लाख डॉलर) प्रमुख हैं।
भारतीय उद्योगों को फार्मास्युटिकल उत्पाद (5482.7 लाख डॉलर), रत्न और आभूषण (3,804.6 लाख डॉलर), लौह और इस्पात वस्तुएं (2,924.7 लाख डॉलर), कार्बनिक रसायन (2,344.1 लाख डॉलर) और विद्युत उपकरण (2,260.1 लाख डॉलर) जैसे क्षेत्रों में निर्यात के अवसर मिलने की उम्मीद है। भारत और कनाडा ने अब तक दो दौर की बातचीत की है और दिसंबर तक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है।
तीसरे दौर की बातचीत जुलाई में ओटावा में होनी है। वित्त वर्ष 2026 में कनाडा के साथ 1.39 अरब डॉलर के वस्तु व्यापार अधिशेष वाले भारत को दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाओं और अन्य व्यावसायिक सेवाओं जैसी सेवाओं में भी बाजार पहुंच हासिल होने की संभावना है।