केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह भारतीय ध्वज वाले पोतों की होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही पक्की करने के लिए लगातार ईरान के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में है। इससे देश में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलपीजी) आपूर्ति की किल्लत कम हो सकेगी। सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्रालय और नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने महत्त्वपूर्ण सफलता की संभावना जताई थी।
भारत के क्षेत्र में फंसे 28 वाणिज्यिक पोतों में से एक जयप्रकाश पेट्रोल लेकर किसी अफ्रीकी देश के पास जा रहा था। उसे क्षेत्र से गुजरने की अनुमति मिल गई। नई दिल्ली में अलकुद्स दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फतेली ने कहा कि उनकी सरकार के भारत सरकार के साथ अच्छे संबंध हैं। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारियों के बीच नियमित बातचीत जारी है। उन्होंने बताया कि भारत के ध्वज वाहक मालवाहक पोतों के होर्मुज स्ट्रेट को ईरान से अनुमति देने के मुद्दे पर ‘अच्छी खबर’ के लिए प्रयास किए गए हैं।
फतेली ने भारत के ध्वजों को ईरान के सुरक्षित रास्ता देने के मुद्दे पर कहा, ‘हां, हमारा दोस्त भारत है। आपको दो-तीन घंटों में देखने को मिल जाएगा। हमारा विश्वास है कि इस क्षेत्र में भारत और ईरान के साझा हित हैं।’ फतेली ने कहा, ‘यह हमारा दुख है। इसलिए भारत सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए और हमें भारत सरकार की मदद करनी चाहिए। दरअसल, हमारी आस्था और हित एक जैसे हैं।’
नई दिल्ली में अल-कुद्स दिवस के अवसर पर ईरान के कई समर्थक एकत्रित हुए। उनके हाथ में ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की तस्वीरें थीं। अल-कुद्स दिवस रमजान के आखिरी शुक्रवार को मनाया जाता है। ईरान ने 1979 से अल कुद्स दिवस मनाना शुरू किया है। यह दिवस फिलिस्तीन के साथ एकजुटता व्यक्त के लिए मनाया जाता है।
भारत को होर्मुज स्ट्रेट से कम से कम 60 प्रतिशत एलपीजी और 30 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। भारत के 28 मालवाहक पोत इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में फंसे चार इन पोतों में से एक जय प्रकाश अपने गंतव्य तक पहुंच गया। यह पोत अफ्रीकी देश को पेट्रोल लेकर जा रहा था।
भारत होर्मुज स्ट्रेट के दोनों ओर फंसे हुए शेष 27 व्यापारिक पोतों के लिए सुरक्षित मार्ग तय करना चाहता है। इनमें से 24 इस महत्त्वपूर्ण जलमार्ग के पश्चिमी समुद्री मार्ग पर है। इन 27 जहाजों पर कुल 677 नाविक हैं। इस क्षेत्र में कुल मिलाकर 23,000 भारतीय नाविक मौजूद हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से गुरुवार शाम को टेलीफोन पर बातचीत की। यह उनकी शीर्ष ईरानी नेतृत्व के साथ पहली बातचीत थी। उधर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 28 फरवरी के बाद अपने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से चौथी बार बातचीत की। अमेरिका और इजरायल के हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद जयशंकर और अराघची ने 28 फरवरी को बातचीत की थी।
उन्होंने 5 मार्च और 10 मार्च को भी बातचीत की थी। जयशंकर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने गुरुवार रात को भी अराघची से द्विपक्षीय सहित ब्रिक्स से जुड़़े मुद्दों पर बातचीत की थी। दरअसल, ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष बढ़ने से होर्मुज स्ट्रेट को आंशिक रूप से बाधित कर दिया था।
ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अराघची ने अपने भारतीय समकक्ष को अमेरिका और इजरायल के ईरान के विरुद्ध छेड़े गए ‘आक्रमणों और अपराधों’ की नवीनतम स्थिति की जानकारी दी। इसके अलावा इसके क्षेत्र और विश्व की स्थिरता व सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बताया। अराघची ने इस बात पर जोर दिया कि आत्मरक्षा के वैध अधिकार का प्रयोग करने का ईरान का संकल्प दृढ़ है।