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अमेरिका-ईरान तनाव का असर: खाद्य तेल-उर्वरक आयात पर संकट, शिपिंग महंगी होने से बढ़ी चिंता

ऊर्जा की लागत, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक जैव ईंधन बाजार के बीच संबंध को देखते हुए, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें दबाव बढ़ा सकती हैं

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- March 02, 2026 | 6:21 PM IST

उद्योग संगठनों ने सोमवार को कहा कि अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष के बढ़ने से भारत के खाद्य योग्य सूरजमुखी तेल और जरूरी उर्वरकों के आयात में रुकावट आ सकती है, जबकि पश्चिम एशिया और यूरोप को कृषि जिंसों का निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। पोत परिवहन कंपनियों ने पश्चिम एशिया से गुजरने वाले मालवाहक पोतों (कार्गो) पर आपात संघर्ष अधिभार लगाना शुरू कर दिया है, जिसमें फ्रांस की कंटेनर क्षेत्र की बड़ी कंपनी सीएमए सीजीएम प्रति कंटेनर 2,000 डॉलर से 4,000 डॉलर के बीच अधिभार लगा रही है, जिससे आयात की लागत बढ़ रही है।

उर्वरक आयात पर संकट

घुलनशील उर्वरक उद्योग संघ (SFIA) के अध्यक्ष, राजीब चक्रवर्ती ने बताया, ”पश्चिम एशिया को निर्यात अभी रुका हुआ है।” उन्होंने कहा, ”लड़ाई के जारी रहने के साथ, जोखिम भी बढ़ेगा और शिपिंग कंपनियां बीमा अधिभार लगा सकती हैं, जिससे आयात महंगा हो जाएगा।”

चक्रवर्ती ने जून में शुरू होने वाले भारत के खरीफ बुवाई सत्र से पहले डीएपी और एसएसपी उर्वरक बनाने के लिए जरूरी आदान की आपूर्ति पर चिंता जताई। कतर, सयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान मिलकर भारत के गंधक (सल्फर) आयात का 76 फीसदी हिस्सा बनाते हैं। उन्होंने कहा, ”इतने सारे बंदरगाह बंद होने से जाम लगेगा और कंटेनर की कमी हो जाएगी।”

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खाद्य तेल आयात में रुकावट की आशंका

भारत हर साल लगभग 1.6 करोड़ टन खाद्य तेल आयात करता है, जिसमें से सूरजमुखी का तेल लगभग 20 फीसदी हिस्सा है, जो मुख्य रूप से रूस, यूक्रेन और अर्जेंटीना से आता है। अगर जहाजों को लाल सागर से दूसरी तरफ जाने के लिए मजबूर किया जाता है, तो निर्यात खेप में देरी हो सकती है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, बी वी मेहता ने कहा, ”अभी तक कोई असर नहीं पड़ा है। लेकिन अगर लड़ाई जारी रही, तो सूरजमुखी के तेल की सप्लाई में रुकावट आ सकती है क्योंकि निर्यात खेप को दूसरा रास्ता अपनाना होगा।”

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें से बढ़ेगा दबाव

ऊर्जा की लागत, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक जैव ईंधन बाजार के बीच संबंध को देखते हुए, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें दबाव बढ़ा सकती हैं। भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (आईवीपीए) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान के बीच किसी भी तरह की तनातनी का सीधा असर भारत के कच्चे तेल और खाद्य तेल के बाजारों पर पड़ेगा।

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भारत के निर्यात पर भी पड़ेगा असर

आईवीपीए ने कहा, ”निकट भविष्य में, हमें लगता है कि तेल और डॉलर-रुपये की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, जिसका मुख्य ध्यान इन भू-राजनीतिक तनावों पर रहेगा।” निर्यात की बात करें तो, भारत अपने तेल खली, तेल रहित खल (डीओसी) निर्यात का 20 फीसदी पश्चिम एशिया और 15 फीसदी यूरोप भेजता है। अधिकारियों ने कहा कि इस इलाके से गुजरने वाले डीओसी, खेती, बागवानी एवं फूल खेती के उत्पादों के निर्यात भी खतरे में हैं।

(PTI इनपुट के साथ)

First Published : March 2, 2026 | 6:21 PM IST