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बिम्सटेक राष्ट्रों के बीच हो सहयोग

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Last Updated- December 11, 2022 | 8:22 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मोदी ने ‘बिम्सटेक’ के सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। ‘बहुक्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल’ (बिम्सटेक) के डिजिटल माध्यम से आयोजित पांचवें शिखर सम्मेलन में अपने उद्घाटन भाषण में मोदी ने कहा कि क्षेत्र में स्वास्थ्य और सुरक्षा की चुनौतियों के बीच एकता और सहयोग आज के समय की मांग हैं। उन्होंने कहा, ‘आज समय है कि बंगाल की खाड़ी को संपर्क, समृद्धि और सुरक्षा का सेतु बनाया जाए।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, बिम्सटेक सचिवालय के परिचालन बजट को बढ़ाने के लिए सहयोग के रूप में 10 लाख अमेरिकी डॉलर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र आज के चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य से अछूता नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमारी अर्थव्यवस्थाएं, हमारे लोग अब भी कोविड-19 महामारी के प्रभाव से जूझ रहे हैं।’
यूक्रेन-रूस युद्ध का संदर्भ देते हुए मोदी ने कहा कि पिछले कुछ सप्ताह में यूरोप में हुए घटनाक्रम से ‘अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।’ उन्होंने कहा, ‘इस संदर्भ में, यह जरूरी हो गया है कि बिम्सटेक क्षेत्रीय सहयोग को और सक्रिय बनाया जाए।’ मोदी ने कहा कि यह आवश्यक हो गया है कि हमारी क्षेत्रीय सुरक्षा को और अधिक प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन में बिम्सटेक चार्टर को अपनाया जाना संस्थागत संरचना को स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, ‘अब हमारा ध्यान इस संरचना को मजबूत बनाने पर केंद्रित होना चाहिए।’ इस संदर्भ में मोदी ने कहा कि वह महासचिव के उस सुझाव से सहमत हैं कि विजन दस्तावेज तैयार करने के लिए ‘विशिष्ट व्यक्तियों का एक समूह’ गठित किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के परिणाम बिम्सटेक के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय लिखेंगे। मोदी ने कहा कि हमारी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए बिम्सटेक सचिवालय की क्षमता को बढ़ाना भी जरूरी है। उन्होंने बिम्सटेक महासचिव को इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक रोडमैप बनाने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिम्सटेक के सदस्य देशों के बीच परस्पर व्यापार बढ़ाने के लिए बिम्सटेक एफटीए प्रस्ताव पर आगे बढऩा जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘हमारे देशों के उद्यमियों और स्टार्टअप के बीच आदान प्रदान बढ़ाने की भी जरूरत है। इसके साथ ही हमें व्यापार सहयोग के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नियमों को भी अपनाना चाहिए।’
इस संदर्भ में, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर भारतीय अनुसंधान परिषद, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के साथ मिलकर हमारे अधिकारियों की जागरूकता बढ़ाने वास्ते एक कार्यक्रम शुरू करेगा। मोदी ने कहा कि सुरक्षा के बिना क्षेत्र के विकास और समृद्धि की कल्पना करना असंभव है। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक के काठमांडू में हुए चौथे शिखर सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया था कि आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय अपराध और गैर-पारंपरिक खतरों के विरुद्ध क्षेत्रीय विधिक रूपरेखा को मजबूत किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमने, अपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया था। मुझे खुशी है कि आतंकवाद से लडऩे का हमारा प्रस्ताव पिछले साल से सक्रिय हुआ है। आज के शिखर सम्मेलन के दौरान, आपराधिक मामलों पर हमारे बीच एक परस्पर विधिक सहायता समझौते पर भी हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। हमारी विधिक व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके इसलिए हमें इसी प्रकार के समझौतों पर आगे बढऩा चाहिए।’
मोदी ने रेखांकित किया कि ‘मौसम और जलवायु के लिए बिम्स्टेक केंद्र’ आपदा प्रबंधन में सहयोग के वास्ते एक महत्त्वपूर्ण संगठन है। उन्होंने कहा कि इसे और सक्रिय बनाने के लिए बिम्स्टेक देशों के बीच सहयोग होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस केंद्र के काम को पुन: शुरू करने के लिए 30 लाख डॉलर देने को तैयार है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत ने हाल में तीसरे बिम्सटेक आपदा प्रबंधन अभ्यास ‘पेनेक्स-21’ का आयोजन किया था। इसके साथ ही मोदी ने कहा कि इस प्रकार के अभ्यास नियमित किए जाने चाहिए ताकि सदस्य देशों के बीच, आपदा के वक्त साथ काम करने की संस्थागत व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने कहा कि बेहतर एकीकरण, व्यापार और सदस्य देशों के लोगों के बीच संबंधों के लिए बेहतर संपर्क होना जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘आज हमने परिवहन संपर्क के लिए बिम्स्टेक मास्टर प्लान को अपनाया है। इसे तैयार करने के लिए मैं एडीबी को धन्यवाद देता हूं। हमें इस मास्टर प्लान के शीघ्र क्रियान्वयन पर जोर देना चाहिए।’ मोदी ने कहा कि इसके साथ ही बिम्स्टेक को संपर्क के क्षेत्र में जारी पहल को तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंगाल की खाड़ी में एक ‘तटीय पोत परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र’ को शीघ्र स्थापित करने के लिए एक विधिक रूपरेखा बनाने के वास्ते यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि बिजली ग्रिड के अंतर-संपर्क को जमीन पर लागू किया जाए। मोदी ने कहा कि इसी प्रकार सड़क संपर्क बढ़ाने के लिए विधिक रूपरेखा को स्थापित करना महत्त्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से संबंधित सतत विकास के लक्ष्यों को पाना भी ‘हमारी राष्ट्रीय नीति’ का एक अहम हिस्सा है। मोदी ने ट्वीट किया, ‘श्रीलंका की मेजबानी में पांचवें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेकर खुशी हुई। हमने बिम्सटेक सहयोग एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए।’ प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के कुशल नेतृत्व की सराहना की और समूह के अगले अध्यक्ष थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओ चा को शुभकामनाएं दी।
भारत के अलावा बिम्सटेक में श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, नेपाल और भूटान शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि इस शिखर सम्मलेन में ‘बिम्सटेक चार्टर’ पर हस्ताक्षर किए गए।    

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First Published - March 30, 2022 | 11:42 PM IST

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