प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्रों पर केंद्रित 19,680 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया और आधारशिला रखी। उन्होंने असम के चाय बागान श्रमिकों को बागान आवास लाइनों में भूमि पट्टे वितरित करने की भी शुरुआत की और देश भर के 9.3 करोड़ से अधिक किसानों के लिए पीएम-किसान योजना की 22वीं किस्त भी जारी की। मोदी चुनावी राज्य असम के दो दिवसीय दौरे के तहत शुक्रवार को गुवाहाटी पहुंचे। यह पिछले चार महीनों में राज्य का उनका चौथा दौरा है। असम विधान सभा की 126 सीट के लिए आने वाले अप्रैल महीने में चुनाव होने की संभावना है।
अधिकारियों ने बताया कि चाय बागान समुदाय को वास भूमि अधिकार प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री ने 20 जिलों में फैले 106 चाय बागानों के श्रमिकों को भूमि पट्टे वितरित करने के प्रथम चरण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि सुरक्षित भूमि स्वामित्व से आवास सुरक्षा में सुधार होने, संस्थागत ऋण और कल्याणकारी योजनाओं तक बेहतर पहुंच संभव होने और दीर्घकालिक सामाजिक एवं आर्थिक गतिशीलता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मोदी ने पीएम-किसान योजना की 22वीं किस्त देश भर के 9.3 करोड़ से अधिक किसानों को जारी की। प्रधानमंत्री ने राज्य के दीमा हसाओ और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिलों में स्थित कोपिली जलविद्युत परियोजना राष्ट्र को समर्पित की। 2,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगी, क्षेत्र में ग्रिड की स्थिरता में सुधार करेगी और घरों, किसानों तथा उद्योगों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
प्रधानमंत्री ने ऑयल इंडिया लिमिटेड की नुमालीगढ़-सिलीगुड़ी उत्पाद पाइपलाइन (एनएसपीएल) की क्षमता संवर्धन परियोजना भी राष्ट्र को समर्पित की। यह परियोजना अतिरिक्त पेट्रोलियम उत्पादों की निकासी को सक्षम बनाकर नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) की क्षमता को 30 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 90 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष करने में सहायक होगी।
प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर गैस ग्रिड के प्रथम चरण का भी उद्घाटन किया, जो गुवाहाटी को नुमालीगढ़, गोहपुर और ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) से जोड़ने वाली एक प्रमुख पाइपलाइन परियोजना है, जिसकी एक शाखा लाइन दीमापुर (नगालैंड) तक जाती है। उन्होंने हैलाकांडी जिले के पंचग्राम में एनआरएल के रेल-आधारित पीओएल टर्मिनल की आधारशिला भी रखी। अधिकारियों ने कहा कि ये परियोजनाएं पूर्वोत्तर में ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करेंगी और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाएंगी।
प्रधानमंत्री ने 420 करोड़ रुपये की रंगिया-मुरकोंगसेलेक रेल लाइन (558 किमी) और 1,180 करोड़ रुपये की चापरमुख-डिब्रूगढ़ रेल लाइन (571 किमी) सहित प्रमुख रेलवे विद्युतीकरण परियोजनाओं और लगभग 650 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बदरपुर-सिलचर और बदरपुर-चुराईबारी रेल लाइन राष्ट्र को समर्पित कीं।