संसद का बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू होगा, जिसके खूब हंगामेदार रहने की संभावना है। विपक्ष जहां पश्चिम एशिया की स्थिति पर सरकार के आकलन पर जवाब मांगेगा, वहीं देश की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव का मुद्दा भी हावी रहेगा। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने की मांग करने वाला विपक्ष का प्रस्ताव भी पहले सप्ताह का मुख्य आकर्षण होगा।
सरकार की ओर से बजट सत्र के इस हिस्से में विद्युत संशोधन विधेयक पारित करा लेने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके अलावा कई अन्य लंबित विधेयक भी पारित कराए जा सकते हैं। सत्र 2 अप्रैल को पूरा हो जाएगा। लंबित विधेयकों में दिवालियापन एवं दिवालिया संहिता (संशोधन) विधेयक 2025 भी शामिल है। यह विधेयक संसदीय समिति को भेजा गया था और उसने 17 दिसंबर को ही अपनी रिपोर्ट सौंपी है। प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025 विधेयक भी वित्त मामलों की संसदीय समिति के पास है। इस समिति सत्र के दौरान ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक को भी एक संयुक्त समिति को भेजा गया था, जबकि जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक पर समिति की रिपोर्ट आनी बाकी है।
विपक्षी दल रसोई गैस सिलिंडरों पर 60 रुपये की बढ़ोतरी पर सरकार से जवाब मांगेंगे। एक बयान में माकपा के पोलित ब्यूरो ने रविवार को कहा कि 60 रुपये की बढ़ोतरी से उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को नुकसान होगा, जबकि कमर्शल सिलिंडरों की कीमतों में 114.50 रुपये की बढ़ोतरी का असर भी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
कांग्रेस और वाम दलों सहित तमाम विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया में संघर्ष पर सरकार के रुख की आलोचना की है। खासकर ईरान और उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या तथा भारत के रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी ‘मोहलत’ जैसे मुद्दों पर विपक्ष अभी से सरकार को घेर रहा है। चुनाव आयोग सत्र के दौरान चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश- तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, असम और पुदुच्चेरी के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। बंगाल में एसआईआर समेत राज्यों से संबंधित मुद्दे भी संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकते हैं।
बिरला को हटाने की मांग करने वाला विपक्ष का प्रस्ताव प्रतीकात्मक ही होगा, क्योंकि भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के पास लोक सभा में स्पष्ट बहुमत है, लेकिन यह कदम विपक्ष को संसदीय रिकॉर्ड पर बिरला के कथित ‘पक्षपातपूर्ण आचरण’ की आलोचना करने की अनुमति देगा।
बिरला ने उस तारीख से सदन की कार्यवाही से खुद को अलग कर लिया जिस दिन विपक्षी सांसदों ने प्रस्ताव पेश किया था। प्रस्ताव पर बहस के दौरान वह सदन में सांसदों के बीच बैठेंगे। प्रस्ताव का निपटारा होने के बाद वह पीठासीन अधिकारी के रूप में दोबारा जिम्मेदारी निभाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बिरला का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्होंने सभी सांसदों को साथ लेकर कार्य किया है और संविधान और संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों के प्रति वह प्रतिबद्ध हैं। लोक सभा के खिलाफ प्रस्ताव सोमवार के लिए ही सूचीबद्ध किया गया है।