भारत

India-US trade deal: उद्योग को रूस से तेल आयात घटाने पर संकेत का इंतजार

अधिकारियों ने बताया कि अगर रूसी तेल आयात में कमी की घोषणा की जाती है तो यह धीरे-धीरे ही होगी

Published by
शुभांगी माथुर   
Last Updated- February 03, 2026 | 10:26 PM IST

भारत की रिफाइनरियां रूस से कच्चा तेल खरीदने के मामले में सरकार से आगे के कदम के लिए इंतजार कर रही हैं। यह जानकारी कम से कम तीन रिफाइनरियों के अधिकारियों ने दी। दरअसल, भारत और अमेरिका ने लंबे समय से अटके द्विपक्षीय समझौते पर सोमवार को हस्ताक्षर किए।

हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है। लेकिन भारत सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। अधिकारियों ने बताया कि अगर रूसी तेल आयात में कमी की घोषणा की जाती है तो यह धीरे-धीरे ही होगी। इसका कारण यह है कि कुछ भारतीय रिफाइनरों ने आने वाले समय में डिलीवरी के लिए पहले ही कार्गो बुक कर लिए हैं।

एक अधिकारी ने बताया, ‘हमें सरकार से कोई निर्देश नहीं मिले हैं। हमें (रूस के तेल) आपूर्ति 10 प्रतिशत या 20 प्रतिशत कम करने या पूरी तरह से बंद करने के लिए कहा जा सकता है। हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। रूसी तेल का विकल्प परिचालन की दृष्टि से संभव है। लेकिन हमें इससे व्यावसायिक नुकसान हो सकता है।’

भारत की रिफाइनर कंपनियों ने रूसी तेल उत्पादकों पर हाल में लगाए गए प्रतिबंधों के बीच रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारी कटौती की थी जबकि रूस के कच्चे तेल पर छूट 8-10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले 2025 के बाद के महीनों में रूसी तेल पर छूट घटकर 2 से 5 डॉलर प्रति बैरल रह गई थी।

मैरीटाइम इंटेलिजेंस कंपनी केप्लर के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2022 के बाद जनवरी में भारत की रूसी तेल आपूर्ति सबसे कम हो गई और यह घटकर 11.6 लाख बैरल प्रति दिन रह गई थी। केप्लर के आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी में केवल दो सरकारी रिफाइनर कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) व भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और रूस समर्थित नायरा एनर्जी लिमिटेड ने ही रूस से कच्चे तेल की खरीद की थी।

भारत की बड़ी रिफाऱनरी कंपनियों में इंडियन ऑयल, बीपीसीएल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल हैं। इन सबको इस बारे में भेजे गए सवालों का जवाब नहीं खबर लिखे जाने तक नहीं मिला।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की भरपाई के लिए अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से अधिक ऊर्जा खरीदने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि इस कदम से ‘यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने में मदद मिलेगी।’ इस बीच अभी तक भारतीय रिफाइनरियों को वेनेजुएला के कच्चे तेल की खरीद के लिए अमेरिका से मंजूरी नहीं मिली है। अमेरिकी अधिकारियों ने एक महीने पहले वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंदी बना लिया था और अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेनेजुएला के कच्चे तेल की पेशकश की थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि अग वेनेजुएला के तेल की आपूर्ति की मंजूरी मिल भी जाती है तो भी यह भारत के लिए रूस से खरीदे जा रहे तेल की मात्रा की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं होगी।

भारतीय ब्रोकरेज फर्म के एक वरिष्ठ विश्लेषक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘अभी भारत लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन रूस से तेल खरीद रहा है। सीमित उत्पादन के साथ वेनेजुएला भारत को केवल लगभग 2 लाख बैरल प्रति दिन ही दे पाएगा। वेनेजुएला का ज्यादातर तेल अमेरिका को भेजा जा रहा है। यहां तक ​​कि अमेरिका और वेनेजुएला का तेल मिलकर भी रूस के तेल की भरपाई नहीं कर सकते हैं। अगर सरकार रूस से तेल खरीदना बंद करने का फैसला करती है, तो हमें कहीं और से स्रोत ढूंढना होगा।’

First Published : February 3, 2026 | 10:12 PM IST