भारतीय रिजर्व बैंक (एमपीसी) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति द्वारा 4 से 6 फरवरी तक होने वाली मौद्रिक समीक्षा में रीपो दर और रुख में किसी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं है। बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा 12 अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए सर्वेक्षण में ज्यादातर लोगों ने ऐसी राय जाहिर की। उन्होंने कहा कि दर में और कटौती तभी हो सकती है जब वृद्धि में बड़ी गिरावट का जोखिम हो। यह सर्वेक्षण अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए शुल्क को घटाकर 18 फीसदी करने की घोषणा से पहले किया गया था।
मौद्रिक नीति समिति ने दिसंबर 2025 में रीपो दर को 25 आधार अंक घटाकर 5.25 फीसदी कर दिया था। उससे पहले पिछली दो बैठकों में रीपो दर को अपरिवर्तित रखा गया था। पिछले साल फरवरी में शुरू हुए दर कटौती के चक्र में कुल मिलाकर रीपो दर में 125 आधार अंक की कटौती की गई है।
सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भी वृद्धि दर की गति बनी रहने की उम्मीद है और महंगाई धीरे-धीरे 4 फीसदी के करीब जा सकती है। ऐसे में मौद्रिक नीति समिति आगामी बैठक में दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय कर सकती है।
एचडीएफसी बैंक की प्रधान अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि दर 6.9 फीसदी रह सकती है और महंगाई दर भी 4 फीसदी के करीब आ सकती है। इसे देखते हुए मुझे नहीं लगता कि आरबीआई अभी रीपो दर में कटौती करेगा।’
कुछ अर्थशास्त्रियों ने कहा कि फरवरी के मध्य में नए आधार वर्ष के अनुसार आने वाले खुदरा मुद्रास्फीति और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों का मूल्यांकन होने का इंतजार करना चाहिए।
जनवरी 2026 के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े 12 फरवरी को जारी होंगे जिसमें 2024 को बाधार वर्ष माना जाएगा जबकि वित्त वर्ष 2024 से 2026 के लिए जीडीपी आंकड़ा 27 फरवरी को जारी किया जाएगा, जिसमें 2022-23 को आधार वर्ष माना जाएगा। उन्होंने कहा कि ये संशोधित सीरीज मौजूदा वृद्धि-महंगाई के रुझान को समझने में मदद करेंगी और नया परिदृश्य तैयार करने का आधार प्रदान करेंगी।
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘इक्रा का मानना है कि मौजूदा समय में नए आधार वर्ष के हिसाब से आने वाले खुदरा मुद्रास्फीति और जीडीपी डेटा का आकलन करना जरूरी है, जो फरवरी 2026 के बीच या आखिर में जारी होने वाले हैं। ये आंकड़े मौजूदा वृद्धि-महंगाई का गणित तय करेंगे और नया परिदृश्य बनाने में मदद करेंगे।’
सभी प्रतिभागियों ने उम्मीद जताई कि मौद्रिक नीति समिति तटस्थ रुख बनाए रखेगी लेकिन खुला बाजार परिचालन (ओएमओ) तैसे तरलता बढ़ाने के उपाय जारी रख सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दर कटौती चक्र में अभी तक रीपो दर में 125 आधार अंक की कमी की जा चुकी है लेकिन ग्राहकों तक कटौती का पूरा लाभ पहुंचाने में चुनौतियों को देखते हुए आगे और दर कटौती के लाभ सीमित दिखते हैं। इसके अलावा रुपये पर दबाव और वृद्धि दर ठीक-ठाक रहने से रीपो में कटौती की उम्मीद नहीं है।
ज्यादातर प्रतिभागियों का मानना है कि रीपो दर 5.25 फीसदी पर बनी रहेगी तथा इसमें और कटौती नहीं होगी। समिति दर में तभी कटौती करेगा जब वृद्धि काफी कमजोर होगी यानी कुल मिलाकर लंबे समय तक दर कटौती पर विराम लग सकता है।