facebookmetapixel
Advertisement
NSE IPO का साइज घटकर ₹25,000 करोड़ हो सकता है, शेयर बेचने से पीछे हटे कुछ निवेशकReliance Share: अगले 6 महीने में तीन बड़े ट्रिगर, ब्रोकरेज को 33% तेजी की उम्मीदIT शेयर में भारी बिकवाली! निफ्टी IT 4% टूटा, कोफोर्ज में 9% की गिरावट; एक्सपर्ट क्या बोले?भारत की कार्बन क्रेडिट स्कीम को यूके से मिली मंजूरी, निर्यातकों के लिए इसके क्या मायने हैं?वायर-केबल शेयरों में बढ़ा मुकाबला! अल्ट्राटेक की एंट्री के बाद इन 3 शेयरों पर ब्रोकरेज ने बदली चालNSE के सस्ते IPO की खबर से BSE में खलबली! शेयर 4% टूटा, ब्रोकरेज ने बताया अगला टारगेटअदाणी के एयरपोर्ट कारोबार पर बड़ा दांव! ब्लैकरॉक-टेमासेक लगाएंगे ₹9,825 करोड़कोफोर्ज में बड़ा फेरबदल! चेयरमैन ओपी भट्ट ने दिया इस्तीफा, आंतरिक ऑडिट में बोर्ड रिपोर्ट से जुड़ी खामियां सामने आईंEPFO ने आसान किया पीएफ निकालना! 3 कैटेगरी में बंटे नए नियम, बीमारी से घर तक के लिए ऐसे मिलेगा पैसाशेयर बाजार में हाहाकार! 3 दिन में निवेशकों के ₹3.12 लाख करोड़ डूबे; अब आगे क्या?

SBI, HDFC बैंक को FY25 से ज्यादा पूंजी रखने की जरूरत- RBI

Advertisement

RBI ने बयान में कहा कि जहां ICICI बैंक पिछले साल की तरह ही श्रेणी आधारित संरचना में बना हुआ है, वहीं SBI और HDFC बैंक उच्च श्रेणी में चले गए हैं।

Last Updated- December 28, 2023 | 11:05 PM IST
Demand for improvement in priority sector credit structure प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण ढांचे में सुधार की मांग

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि SBI, HDFC बैंक और ICICI बैंक घरेलू स्तर पर वित्तीय प्रणाली के लिहाज से महत्वपूर्ण बैंक बने हुए हैं। देश में वित्तीय प्रणाली के स्तर पर ये इतने बड़े बैंक हैं कि ये ‘डूब’ नहीं हो सकते।

रिजर्व बैंक को अगस्त, 2015 से हर साल इसी महीने में वित्तीय प्रणली के लिहाज से महत्वपूर्ण बैंकों के नामों की जानकारी देने की जरूरत होती है। नियमों के अनुसार, ऐसे संस्थानों को प्रणाली के स्तर पर महत्व (एसआईएस) के आधार पर चार श्रेणी में रखा जा सकता है।

केंद्रीय बैंक ने बयान में कहा कि जहां ICICI बैंक पिछले साल की तरह ही श्रेणी आधारित संरचना में बना हुआ है, वहीं SBI और HDFC बैंक उच्च श्रेणी में चले गए हैं। SBI श्रेणी (बकेट) तीन से श्रेणी चार में स्थानांतरित हो गया और HDFC बैंक श्रेणी एक से श्रेणी दो में स्थानांतरित हो गया। इसका मतलब है कि बैंकों को जोखिम भारांश परिसंपत्तियों (आरडब्ल्यूए) के प्रतिशत के रूप में अतिरिक्त सामान्य इक्विटी शेयर पूंजी (टियर 1) को पूरा करना होगा।

Also read: देश तेज आर्थिक वृद्धि हासिल करने के रास्ते पर, जोखिम से निपटने को केंद्रीय बैंक तैयार: RBI गवर्नर

घरेलू स्तर पर व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण बैंक (डी-एसआईबी) को लेकर एक अप्रैल, 2025 से SBI के लिए अधिभार 0.8 प्रतिशत होगा। वहीं HDFC बैंक के लिए 0.4 प्रतिशत होगा। RBI ने कहा कि इसीलिए 31 मार्च, 2025 तक SBI और HDFC बैंक के लिये डी-एसआईबी अधिभार क्रमश: 0.6 प्रतिशत और 0.20 प्रतिशत होगा।

Advertisement
First Published - December 28, 2023 | 7:51 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement