भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी मुद्रा अनिवासी भारतीय (बैंक) जमा या एफसीएनआर(बी) जमा के लिए शुरू की गई अपनी स्वैप सुविधा तय समय से एक महीने पहले बंद करने का फैसला किया है। आरबीआई ने यह निर्णय योजना को मिली अच्छी प्रतिक्रिया और इसके चलते देश में हुए विदेशी मुद्रा प्रवाह को देखते हुए लिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक वाणिज्यिक बैंकों ने 13 अगस्त तक 52.3 अरब डॉलर के एफसीएनआर (बी) जमा जुटाए हैं।
आरबीआई ने आज जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि स्वैप सुविधा अब 31 अगस्त, 2026 तक जुटाई गई एफसीएनआर(बी) जमाओं के लिए ही उपलब्ध होगी। पहले बैंकों को 30 सितंबर, 2026 तक एफसीएनआर(बी) जमा पर स्वैप सुविधा का ऐलान किया गया था। बैंक इस सुविधा के तहत 11 सितंबर, 2026 तक आरबीआई से स्वैप का लाभ उठा सकेंगे। आरबीआई इस योजना के तहत जमा पर पूरी हेजिंग लागत उठा रहा है, जिससे ऋणदाताओं को आकर्षक दरों पर जमा जुटाने में मदद मिली है।
हालांकि बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) और विदेशों से विदेशी मुद्रा में ली गई उधारी (ओएफसीबी) के लिए यह योजना पहले की घोषणा के अनुसार 31 दिसंबर, 2026 तक जारी रहेगी। दिलचस्प है आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा था कि अभी एफसीएनआर (बी) जमा योजना को वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है। पहले बैंकों को 30 सितंबर, 2026 तक एफसीएनआर(बी) जमा जुटाने की अनुमति थी और वे 16 अक्टूबर, 2026 तक आरबीआई के साथ स्वैप करा सकते थे।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार इस सुविधा के तहत 13 अगस्त तक देश में 56.85 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आई थी। इसमें एफसीएनआर(बी) जमाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 52.3 अरब डॉलर थी। इसके साथ ही ओएफसीबी से 2.81 अरब डॉलर और ईसीबी से 1.74 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा देश में आई।
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘स्वैप सुविधा समय से पहले बंद करने की मुख्य वजह यह लगती है कि आरबीआई को जितना जमा जुटाने की उम्मीद की थी, उससे कहीं ज्यादा जमा हासिल हो गया है।’
उन्होंने कहा, ‘डॉलर की जरूरत को लेकर आरबीआई का आकलन भी विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ने के साथ बदल गया होगा। जब तय लक्ष्य उम्मीद से पहले हासिल हो गया है तो जरूरत से ज्यादा पैसा जुटाने और उसे अपनी देनदारियों में बनाए रखने का कोई खास मतलब नहीं है।’
योजना की घोषणा के समय कई लोगों को उम्मीद थी कि अगस्त और सितंबर में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा, जैसा कि 2013 में शुरू की गई इसी तरह की योजना के दौरान हुआ था। हालांकि आरबीआई ने जून के आखिरी सप्ताह में ही लीवरेज से जुड़े मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट कर दी थी जिससे जुलाई से एफसीएनआर(बी) जमाओं का प्रवाह अच्छा दिखा।
एफसीएनआर(बी) स्वैप सुविधा की घोषणा पहली बार 5 जून को की गई थी और इसे 8 जून से लागू किया गया। इसके तहत बैंकों को 3 से 5 साल की अवधि वाली नई एफसीएनआर(बी) जमा जुटाने और उनसे मिलने वाली डॉलर की राशि को मौजूदा हाजिर विनिमय दर पर आरबीआई के साथ स्वैप करने की अनुमति दी गई थी।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि आरबीआई ने जो भी लक्ष्य तय किया था वह आसानी से हासिल हो गया है। केंद्रीय बैंक को जरूरत से ज्यादा डॉलर मिलने की संभावना है। लेकिन समस्या यह है कि इन विदेशी मुद्रा प्रवाह से बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी भी बढ़ेगी। जितनी बड़ी मात्रा में डॉलर आए हैं, उसे देखते हुए लगता है कि यह बैंकिंग प्रणाली की बैलेंस शीट और विदेशी मुद्रा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।’
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार 31 जुलाई, 2026 तक बैंकिंग प्रणाली में जमा राशि बढ़कर 269.4 लाख करोड़ रुपये हो गई थी।
एक सरकारी बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘आरबीआई उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर स्वैप सुविधा बंद करने का फैसला सोच-समझकर लिया होगा। बैंक या जमाकर्ता के नजरिये से किसी एक आंकड़े के आधार पर ऐसा फैसला नहीं लिया जा सकता। नियामक के पास पूरी स्थिति से जुड़े आंकड़े होते हैं और उसने व्यापक आकलन के आधार पर यह फैसला लिया होगा।’एफसीएनआर(बी) जमा से आए विदेशी मुद्रा प्रवाह का असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दिखाई दिया है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक 7 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 14.14 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर हो गया। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बढ़ोतरी इसकी प्रमुख वजह रही। यह 30 जनवरी के बाद विदेशी मुद्रा भंडार में हुई सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी है। समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 9.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। जुलाई की शुरुआत से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 33 अरब डॉलर की वृद्धि हो चुकी है।