प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंकों को ऐसे डिजिटल तरीके अपनाने की जरूरत है, जिससे ग्राहकों को साफ रहे कि वह क्या अधिकृत कर रहे हैं। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने यह भी कहा कि नियम और शर्तें, शुल्क और सहमति व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अलर्ट समय पर और सार्थक होने चाहिए और विफलता की स्थिति में ग्राहकों को अगले चरणों के बारे में तुरंत सूचित किया जाना चाहिए। साथ हीर प्रतिक्रियाएं अनुमानित और सहायक होनी चाहिए।
ऐक्सिस बैंक के एक कार्यक्रम में बोलते हुए स्वामीनाथन ने कहा, ‘पारदर्शिता का मतलब है कि ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी दी जाए और उन्हें बाद में आश्चर्य न हो। इसका मतलब है कि निर्णयों को इस तरह से रिकॉर्ड किया जाए जिसे समझाया जा सके।’ यह भाषण 30 जनवरी को दिया गया था, और इसे आज रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
स्वामीनाथन ने कहा कि सिर्फ रणनीति नहीं, बल्कि संस्कृति किसी संस्थान को लंबे समय तक बनाए रखती है। उन्होंने कहा कि ग्राहकोन्मुख होना, नैतिकता, टीम वर्क, पारदर्शिता और स्वामित्व को बैंकों के दैनिक आचरण में होना चाहिए। ग्राहक पर केंद्रित होने के मसले पर उन्होंने कहा कि नीतियां बेहतरीन होनी चाहिए, लेकिन साथ ही जमीनी स्तर पर कर्मचारियों को ही ग्राहकों से मिलना जुलना होता है।