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निवेशकों को भा रहे टारगेट मेच्योरिटी इंडेक्स फंड

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Last Updated- December 12, 2022 | 12:21 AM IST

डेट योजनाओं में निवेश के लिए पैसिव निवेश विकल्प टारगेट मैच्युरिटी इंडेक्स फंडों ने कुछ साल पहले तक अच्छी लोकप्रियता हासिल कर चुकीं निर्धारित परिपक्वता योजनाओं (एफएमपी) के लिए विकल्प के तौर पर खास पहचान बनाई है। अपेक्षाकृत कम ब्याज दर जोखिम के साथ साथ मजबूत और उम्मीद के अनुरूप प्रतिफल की वजह से निवेश इन्हें पसंद कर रहे हैं। हाल के सप्ताहों में, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ, आदित्य बिड़ला सन लाइफ एमएफ और एडलवाइस एमएफ जैसे फंड हाउसों ने ऐसे टारगेट मैच्युरिटी फंड पेश किए हैं।
अन्य पैसिव फंडों की तरह, टारगेट मैच्युरिटी इंडेक्स फंडों में खास परिपक्वता तारीख होती है। उदाहरण के लिए, एडलवाइस निफ्टी पीएसयू बॉन्ड प्लस एसडीएल इंडेक्स फंड-2027 की परिपक्वता तारीख 30 अप्रैल, 2017 होगी और उस तारीख के बाद निवेशकों को परिपक्वता राशि वितरित की जाएगी।
कॉरपोरेट ट्रेनर-डेट के जयदीप सेन का कहना है, ‘बाजार आधारित उतार-चढ़ाव से बचने के लिहाज से भी यह फंडों की श्रेष्ठ श्रेणी है। ऐसे फंडों का बड़ा लाभ यह है कि निवेशकों द्वारा परिपक्वता तक निवेश से जुड़े रहने की स्थिति में इनमें मार्क-टु-मार्केट अनिश्चितता नहीं होती है।’
ये फंड स्टेट डेवलपमेंट लोंस (एसडीएल), सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (पीएसयू) और सरकारी प्रतिभूतियों द्वारा जारी विभिन्न डेट योजनाओं में निवेश करते हैं। टारगेट मैच्युरिटी फंड या तो इंडेक्स फंड हो सकते हैं या एक्सचेंज टे्रडेड फंड (ईटीएफ)।
उद्योग के कारोबारियों का कहना है कि टारगेट मैच्युरिटी इंडेक्स फंड भी एफएमपी के समान हैं, लेकिन वे क्लोज-एंडेड नहीं हैं और निवेशक किसी भी समय अपने यूनिट खरीद-बेच सकते हैं। भले ही एफएमपी एक्सचेंजों पर सूचीबद्घ होते हैं, लेकिन इनमें तरलता नहीं होती है जिससे इनसे बाहर निकलना मुश्किल होता है।
सेन ने कहा, ‘अब, इंडेक्स फंडों में निवेशकों को तरलता को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उन्हें फंड हाउसों से खरीदा और बेचा जाता है। ईटीएफ में भी, तरलता होती है, जिससे निवेशकों को किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। ज्यादा संख्या में लोग एफएमपी से निवेश निकाल कर टारगेट मैच्युरिटी इंडेक्स फंडों में लगा रहे हैं और एफएमपी का निवेश कमजोर हो रहा है।’ टारगेट मैच्युरिटी डेट फंडों का अन्य मुख्य लाभ यह है कि वे अच्छी रेटिंग वाली प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं और ऐसी योजनाओं में ऋण जोखिम लगभग नहीं होता है।

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First Published - October 11, 2021 | 12:20 AM IST

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