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आसमान से बरसती आग के बीच पैरामीट्रिक बीमा की भारी मांग, मौसम के मिजाज ने बदला इंश्योरेंस मार्केट

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देश में बढ़ती लू और जलवायु परिवर्तन के खतरों के बीच, बिना किसी कागजी झंझट के तुरंत क्लेम देने वाले पैरामीट्रिक बीमा की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है

Last Updated- May 24, 2026 | 10:45 PM IST
insurance sector
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण पैरामीट्रिक बीमा कवर की मांग बढ़ रही है क्योंकि लू और अप्रत्याशित मौसम से आजीविका, उत्पादकता तथा स्वास्थ्य पर लगातार असर पड़ रहा है। इस साल अल नीनो की स्थिति का मौसम एजेंसियों द्वारा पूर्वानुमान और कुछ क्षेत्रों में कम बारिश की आशंका भी जलवायु जोखिम की तैयारी के बारे में जागरूकता बढ़ा रही हैं। बीमा उद्योग के विशेषज्ञों ने ये बातें कहीं।

पैरामीट्रिक बीमा पॉलिसियों की मांग खुदरा ग्राहकों और संस्थागत, दोनों भागीदारों से आ रही है। कई स्वयं सेवी संगठनों, समूह और कंपनियां ग्रामीण श्रमिकों, किसानों, दिहाड़ी मजदूरों और महानगरों में निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों के लिए पैरामीट्रिक बीमा कवर खरीदने के लिए कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व कोष का उपयोग कर रही हैं।

देश की तीसरी सबसे बड़ी सामान्य बीमा कंपनी बजाज जनरल इंश्योरेंस ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि उसने अप्रैल 2026 में 85,000 पैरामीट्रिक बीमा पॉलिसियां ​​बेचीं जबकि वित्त वर्ष 2026 में 90,000 पॉलिसियां ​​बेचीं गई थीं। इन पॉलिसियों में गर्मी, अत्यधिक वर्षा और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं को शामिल किया गया है।

बजाज जनरल इंश्योरेंस के प्रमुख (एग्री बिजनेस एवं सीएससी) आ​शिष अग्रवाल ने कहा, ‘पैरामीट्रिक बीमा की बढ़ती स्वीकार्यता कई कारकों से प्रेरित है। जलवायु परिवर्तन अब सीधे आजीविका, उत्पादकता, स्वास्थ्य और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, जिससे मौसम से जुड़ा वित्तीय सुरक्षा पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई है। इसके अतिरिक्त भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और अन्य मौसम एजेंसियों के मौसम पूर्वानुमानों में अल नीनो की स्थिति और कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने का अंदेशा है, जिससे जलवायु जोखिम की तैयारी के बारे में जागरूकता और बढ़ रही है।’

पैरामीट्रिक बीमा व्यक्तियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, जिनकी आय या दैनिक कार्य लू या अत्यधिक वर्षा जैसी जलवायु घटनाओं से प्रभावित होते हैं। इसमें भूकंप, बाढ़ और इसी तरह के खतरों को भी कवर किया जाता है। पारंपरिक बीमा उत्पादों के विपरीत, भुगतान पूर्व-निर्धारित मौसम की ​स्थिति से जुड़े होते हैं जिससे दावों को अधिक तेजी से और स्वचालित रूप से संसाधित किया जा सकता है।

गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस ने कहा कि उसने अप्रैल से मई 2026 के मध्य तक 30,000 से अधिक व्यक्तियों को पैरामीट्रक बीमा कवर बेचा था जबकि वित्त वर्ष 2026 में 50,000 पॉलिसियां बेचीं गईं। इसका मतलब है कि पिछले साल कवर की गई कुल संख्या का लगभग 60 फीसदी नए वित्त वर्ष के पहले छह हफ्तों में बीमित किया गया था। इन पॉलिसियों में गर्मी से संबंधित और अत्यधिक वर्षा दोनों के जोखिमों को कवर किया गया है।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी पॉलिसियों के तहत औसत बीमित राशि 2,000 रुपये से 5,000-7,000 रुपये के बीच है। हालांकि पॉलिसीधारक 10,000 रुपये तक के कवर का विकल्प भी चुन सकते हैं। गर्मी से संबंधित पॉलिसियों के तहत दावे तब मान्य होते हैं जब किसी दिए गए क्षेत्र में तापमान स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के आधार पर पूर्व-निर्धारित सीमा को पार कर जाता है।

हालांकि इसका स्तर क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए मुंबई में दिल्ली की तुलना में बीमा के लिए कम तापमान है। राजस्थान में चूरू और जयपुर जैसे स्थानों के बीच सीमाएं भिन्न होती हैं। उत्तर भारत में गर्मी से संबंधित पैरामीट्रिक कवर के लिए निर्धारित तापमान आम तौर पर 42 से 44 डिग्री के आसपास होता है।

हालांकि अभी भी एक बड़े पैमाने के बाजार उत्पाद के बजाय इसे वि​शिष्ट उत्पाद माना जाता है। डिजिट जनरल इंश्योरेंस में नियुक्त एक्चुअरी आदर्श अग्रवाल ने कहा कि पैरामीट्रिक बीमा की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा, ‘पिछले साल की तुलना में प्रस्तावों में काफी वृद्धि हुई है। पहले, हमें महीने में लगभग 1 से 3 प्रस्ताव मिलते थे लेकिन अब मासिक आधार पर लगभग 10 से 12 प्रस्ताव आ जा रहे हैं।’

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First Published - May 24, 2026 | 10:45 PM IST

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