facebookmetapixel
Advertisement
टाटा ग्रुप की शिपबिल्डिंग सेक्टर में एंट्री की तैयारी, केरल में ₹10,000 करोड़ निवेश का प्रस्तावCAFE नियमों में बदलाव पर टाटा मोटर्स की आपत्ति, कहा- क्रेडिट सिस्टम से स्वच्छ तकनीक में निवेश होगा कमजोरऑटो इंडस्ट्री ने Q1FY27 में रचा इतिहास, यात्री वाहन से लेकर निर्यात तक रिकॉर्ड बिक्रीMidcap-Smallcap Funds में लौटी रौनक: क्या अभी पैसा लगाना सही होगा? एक्सपर्ट्स ने बताए पसंदीदा सेक्टर्सCabinet Decision: ओडिशा-झारखंड को रेलवे का बड़ा तोहफा, ₹3,907 करोड़ की दो परियोजनाएं मंजूरहल्दी पर NCDEX ने लगाया 2.5% अतिरिक्त मार्जिन, क्या अब आएगी बड़ी गिरावट या फिर जारी रहेगी तेजी?Cabinet Decision: वाराणसी को इंफ्रा का बड़ा तोहफा! ₹25,500 करोड़ के दो एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरीCredit Card Charges: क्या आपका क्रेडिट कार्ड भी काट रहा है एक्स्ट्रा पैसे? जानिए कौन-कौन से चार्ज लगते हैंEPFO New Rules: नौकरी बदलने वालों को बड़ी राहत! अब अपने आप ट्रांसफर होगा PF; जानिए EPS का पैसा कब निकाल सकते हैंएक ही फंड से वैल्यू और ग्रोथ दोनों का फायदा! Abakkus MF के लार्ज एंड मिड कैप फंड में ₹500 से निवेश शुरू

आसमान से बरसती आग के बीच पैरामीट्रिक बीमा की भारी मांग, मौसम के मिजाज ने बदला इंश्योरेंस मार्केट

Advertisement

देश में बढ़ती लू और जलवायु परिवर्तन के खतरों के बीच, बिना किसी कागजी झंझट के तुरंत क्लेम देने वाले पैरामीट्रिक बीमा की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है

Last Updated- May 24, 2026 | 10:45 PM IST
insurance sector
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण पैरामीट्रिक बीमा कवर की मांग बढ़ रही है क्योंकि लू और अप्रत्याशित मौसम से आजीविका, उत्पादकता तथा स्वास्थ्य पर लगातार असर पड़ रहा है। इस साल अल नीनो की स्थिति का मौसम एजेंसियों द्वारा पूर्वानुमान और कुछ क्षेत्रों में कम बारिश की आशंका भी जलवायु जोखिम की तैयारी के बारे में जागरूकता बढ़ा रही हैं। बीमा उद्योग के विशेषज्ञों ने ये बातें कहीं।

पैरामीट्रिक बीमा पॉलिसियों की मांग खुदरा ग्राहकों और संस्थागत, दोनों भागीदारों से आ रही है। कई स्वयं सेवी संगठनों, समूह और कंपनियां ग्रामीण श्रमिकों, किसानों, दिहाड़ी मजदूरों और महानगरों में निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों के लिए पैरामीट्रिक बीमा कवर खरीदने के लिए कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व कोष का उपयोग कर रही हैं।

देश की तीसरी सबसे बड़ी सामान्य बीमा कंपनी बजाज जनरल इंश्योरेंस ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि उसने अप्रैल 2026 में 85,000 पैरामीट्रिक बीमा पॉलिसियां ​​बेचीं जबकि वित्त वर्ष 2026 में 90,000 पॉलिसियां ​​बेचीं गई थीं। इन पॉलिसियों में गर्मी, अत्यधिक वर्षा और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं को शामिल किया गया है।

बजाज जनरल इंश्योरेंस के प्रमुख (एग्री बिजनेस एवं सीएससी) आ​शिष अग्रवाल ने कहा, ‘पैरामीट्रिक बीमा की बढ़ती स्वीकार्यता कई कारकों से प्रेरित है। जलवायु परिवर्तन अब सीधे आजीविका, उत्पादकता, स्वास्थ्य और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, जिससे मौसम से जुड़ा वित्तीय सुरक्षा पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई है। इसके अतिरिक्त भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और अन्य मौसम एजेंसियों के मौसम पूर्वानुमानों में अल नीनो की स्थिति और कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने का अंदेशा है, जिससे जलवायु जोखिम की तैयारी के बारे में जागरूकता और बढ़ रही है।’

पैरामीट्रिक बीमा व्यक्तियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, जिनकी आय या दैनिक कार्य लू या अत्यधिक वर्षा जैसी जलवायु घटनाओं से प्रभावित होते हैं। इसमें भूकंप, बाढ़ और इसी तरह के खतरों को भी कवर किया जाता है। पारंपरिक बीमा उत्पादों के विपरीत, भुगतान पूर्व-निर्धारित मौसम की ​स्थिति से जुड़े होते हैं जिससे दावों को अधिक तेजी से और स्वचालित रूप से संसाधित किया जा सकता है।

गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस ने कहा कि उसने अप्रैल से मई 2026 के मध्य तक 30,000 से अधिक व्यक्तियों को पैरामीट्रक बीमा कवर बेचा था जबकि वित्त वर्ष 2026 में 50,000 पॉलिसियां बेचीं गईं। इसका मतलब है कि पिछले साल कवर की गई कुल संख्या का लगभग 60 फीसदी नए वित्त वर्ष के पहले छह हफ्तों में बीमित किया गया था। इन पॉलिसियों में गर्मी से संबंधित और अत्यधिक वर्षा दोनों के जोखिमों को कवर किया गया है।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी पॉलिसियों के तहत औसत बीमित राशि 2,000 रुपये से 5,000-7,000 रुपये के बीच है। हालांकि पॉलिसीधारक 10,000 रुपये तक के कवर का विकल्प भी चुन सकते हैं। गर्मी से संबंधित पॉलिसियों के तहत दावे तब मान्य होते हैं जब किसी दिए गए क्षेत्र में तापमान स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के आधार पर पूर्व-निर्धारित सीमा को पार कर जाता है।

हालांकि इसका स्तर क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए मुंबई में दिल्ली की तुलना में बीमा के लिए कम तापमान है। राजस्थान में चूरू और जयपुर जैसे स्थानों के बीच सीमाएं भिन्न होती हैं। उत्तर भारत में गर्मी से संबंधित पैरामीट्रिक कवर के लिए निर्धारित तापमान आम तौर पर 42 से 44 डिग्री के आसपास होता है।

हालांकि अभी भी एक बड़े पैमाने के बाजार उत्पाद के बजाय इसे वि​शिष्ट उत्पाद माना जाता है। डिजिट जनरल इंश्योरेंस में नियुक्त एक्चुअरी आदर्श अग्रवाल ने कहा कि पैरामीट्रिक बीमा की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा, ‘पिछले साल की तुलना में प्रस्तावों में काफी वृद्धि हुई है। पहले, हमें महीने में लगभग 1 से 3 प्रस्ताव मिलते थे लेकिन अब मासिक आधार पर लगभग 10 से 12 प्रस्ताव आ जा रहे हैं।’

Advertisement
First Published - May 24, 2026 | 10:45 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement