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Golden Visa को लेकर भारतीयों में दिलचस्पी तो है, लेकिन आवेदन कम क्यों? समझें वजह

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Golden Visa की अवधारणा पहली बार 2012 में आई थी, जब पुर्तगाल ने 2008 की वित्तीय मंदी के प्रभावों से निपटने के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया।

Last Updated- March 01, 2025 | 4:44 PM IST
golden visa
Representative Image

Golden Visa Application: अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि वह $5 मिलियन (करीब 41.5 करोड़ रुपये) में “गोल्ड कार्ड” वीजा देने की योजना बना रहे हैं, जो नागरिकता पाने का रास्ता खोलेगा। गोल्डन वीजा स्कीम के तहत निवेश के बदले किसी देश में स्थायी निवास की सुविधा मिलती है। चीन, रूस और पश्चिम एशियाई देशों के अमीर नागरिक इस तरह की योजनाओं का लाभ उठाते हैं, लेकिन भारतीयों में इसे लेकर झिझक देखने को मिलती है।

भारतीयों में दिलचस्पी तो, लेकिन गंभीर आवेदन कम

इमिग्रेशन मामलों के विशेषज्ञ और अजमेरा लॉ ग्रुप के वकील प्रशांत अजमेरा का कहना है कि भारतीय गोल्डन वीजा को लेकर जिज्ञासु तो हैं, लेकिन इसे लेकर गंभीरता कम दिखाते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की वीजा योजनाओं के लिए मुख्य रूप से रूसी और चीनी नागरिक आवेदन करते हैं, क्योंकि उनके देशों की भू-राजनीतिक परिस्थितियां उन्हें ऐसा करने के लिए प्रेरित करती हैं।

2012 में शुरू हुआ था गोल्डन वीजा का कॉन्सेप्ट

गोल्डन वीजा की अवधारणा पहली बार 2012 में आई थी, जब पुर्तगाल ने 2008 की वित्तीय मंदी के प्रभावों से निपटने के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया। शुरुआती वर्षों में भारतीय आवेदकों की संख्या बेहद कम थी। हालांकि, जब भारत में रेमिटेंस नियमों में ढील दी गई, तब भारतीयों की रुचि इसमें बढ़ी। फिर भी, जो भारतीय वास्तव में इस योजना में निवेश कर विदेश में बसने के लिए कदम उठाते हैं, उनकी संख्या अब भी सीमित है।

भारतीयों की झिझक की वजह क्या?

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीयों की झिझक के पीछे कई कारण हो सकते हैं। पहला, वे अपनी जड़ें छोड़कर किसी अन्य देश में बसने को लेकर सहज नहीं होते। दूसरा, निवेश की ऊंची राशि और कानूनी प्रक्रियाएं भी कई लोगों को पीछे हटने पर मजबूर कर देती हैं। इसके अलावा, भारत में आर्थिक अवसर बढ़ने से भी विदेश में बसने की इच्छा पहले जैसी प्रबल नहीं रही।

भारतीय समुदाय में गोल्डन वीजा को लेकर कहां से आ रही है सबसे ज्यादा दिलचस्पी?

गोल्डन वीजा को लेकर भारतीय समुदाय में सबसे ज्यादा दिलचस्पी उन लोगों के बीच देखी जा रही है, जो मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया), सिंगापुर और हांगकांग जैसे पड़ोसी देशों में रह रहे हैं। खासतौर पर ऐसे भारतीय जो रिटायरमेंट की उम्र के करीब हैं और जिनके पास वहां का स्थायी वीजा नहीं है, वे स्वदेश लौटने से बचने के लिए गोल्डन वीजा का विकल्प चुन रहे हैं। इसके तहत, वे विदेशी संपत्तियों में निवेश कर यूरोप और भारत के बीच अपना समय बांटने की सुविधा पा सकते हैं।

निर्माण कंपनियां, प्रॉपर्टी ब्रोकर्स और इमिग्रेशन वकील भारतीय निवेशकों के बीच इन वीजा कार्यक्रमों को आक्रामक रूप से प्रचारित कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका और कनाडा की तुलना में यूरोपीय गोल्डन वीजा की मांग भारतीयों के बीच अभी भी कम बनी हुई है।

यूरोप में गोल्डन वीजा प्रोग्राम पर सख्ती, भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं चुनौतियां?

यूरोप में गोल्डन वीजा कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार बदल रहा है। जब पुर्तगाल ने अपनी गोल्डन वीजा योजना शुरू की, तो स्पेन, ग्रीस, लातविया, हंगरी, माल्टा और साइप्रस जैसे देशों ने भी इसे अपनाया। 2016 से 2019 के बीच माल्टा और साइप्रस के डेवलपर्स ने विदेशी निवेशकों को बड़ी संख्या में संपत्तियां बेचीं, जिससे उन्हें सीधे नागरिकता मिल रही थी। इन निवेशों की राशि आमतौर पर €600,000 से €1 मिलियन के बीच होती थी।

हालांकि, यूरोपीय संघ (EU) को इस पर आपत्ति थी, क्योंकि ये योजनाएं मुख्य रूप से रूस और चीन के अमीर निवेशकों को आकर्षित कर रही थीं, जिनकी वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए थे। EU ने दलील दी कि यूरोपीय नागरिकता को सिर्फ पैसे के बदले बेचा नहीं जा सकता। इसके चलते कई देशों ने सीधे नागरिकता देने वाले कार्यक्रमों को बंद कर दिया और केवल रेजिडेंसी आधारित योजनाएं जारी रहीं। माल्टा इस नियम से अलग है, लेकिन EU इस योजना को भी कोर्ट में चुनौती दे रहा है।

भारतीय निवेशकों के लिए गोल्डन वीजा क्यों मुश्किल?

भारतीय निवेशकों के लिए यूरोपीय गोल्डन वीजा पाने में सबसे बड़ी चुनौती भाषा है। प्रमुख शहरों में अंग्रेजी बोली जाती है, लेकिन छोटे इलाकों में संचार में दिक्कत हो सकती है। पुर्तगाल में भारतीय समुदाय की मौजूदगी थोड़ी बेहतर है, खासकर गोवा से ऐतिहासिक संबंधों के चलते, लेकिन लिस्बन से बाहर भारतीय मूल के लोगों की संख्या काफी कम है।

इसके अलावा, भारतीय निवेशक आमतौर पर अपने बच्चों की शिक्षा के लिए विदेश जाने पर विचार करते हैं। ऐसे में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूके और आयरलैंड जैसे अंग्रेजी भाषी देश उनकी पहली पसंद बनते हैं। व्यापार के नजरिए से भी भारतीय निवेशक उन देशों को प्राथमिकता देते हैं जहां अंग्रेजी में लेन-देन और कानूनी प्रक्रियाएं आसानी से समझी जा सकें।

भारतीयों के लिए कौन सा देश बेहतर विकल्प?

अगर भारतीय निवेशक यूरोप में गोल्डन वीजा लेना चाहते हैं, तो पुर्तगाल एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां भारतीयों के लिए अनुकूल माहौल मिल सकता है और जलवायु भी तुलनात्मक रूप से बेहतर है। पुर्तगाल में साल के लगभग 300 दिन धूप रहती है, जो इसे अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में अधिक आरामदायक बनाता है।

वहीं, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में भारतीय समुदाय की संख्या कम है, जिससे वहां बसना और स्थानीय वातावरण में ढलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए, यदि यूरोप में निवेश के जरिए निवास का विकल्प देख रहे हैं, तो पुर्तगाल एक व्यावहारिक चुनाव हो सकता है।

ग्रीस भी देता है गोल्डन वीजा

ग्रीस का गोल्डन वीजा प्रोग्राम विदेशी निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। हालांकि, इस तरह की योजनाएं आमतौर पर उन देशों में शुरू की जाती हैं जो आर्थिक संकट से गुजर रहे होते हैं। 2008 की वैश्विक मंदी के बाद पुर्तगाल, स्पेन और ग्रीस जैसे यूरोपीय देशों ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए गोल्डन वीजा स्कीम शुरू की थी। लेकिन समय के साथ इन योजनाओं में बदलाव आया।

पुर्तगाल और स्पेन में बदलाव, ग्रीस अब भी आकर्षक

पिछले कुछ वर्षों में पुर्तगाल में रियल एस्टेट निवेश के जरिए गोल्डन वीजा लेना मुश्किल हो गया। यहां €400,000 से €800,000 (₹36,331,800​ – ₹72,663,600) तक की नई निवेश सीमा लागू कर दी गई, जिससे कई निवेशकों की रुचि घटी। वहीं, स्पेन ने तो गोल्डन वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह से बंद कर दिया।

इसके विपरीत, ग्रीस में अब भी €250,000 (लगभग ₹2.25 करोड़) के न्यूनतम निवेश पर गोल्डन वीजा मिल सकता है। हालांकि, सरकार ने शर्त रखी है कि निवेश उन परियोजनाओं में किया जाए, जहां व्यावसायिक संपत्तियों को आवासीय उपयोग के लिए बदला जा सके, ताकि देश में घरों की कमी दूर की जा सके। इस वजह से ग्रीस अभी भी गोल्डन वीजा मार्केट में प्रतिस्पर्धी बना हुआ है।

कौन सा गोल्डन वीजा बेहतर – ग्रीस, दुबई या अमेरिका का EB-5?

यह पूरी तरह से निवेशक की जरूरतों और प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है।

  • अगर बच्चों की शिक्षा प्राथमिकता है, तो अंग्रेज़ी भाषी देशों में बसना बेहतर हो सकता है।
  • कुछ निवेशक केवल वित्तीय लाभ के लिए गोल्डन वीजा लेते हैं, जिसमें वे या तो सक्रिय व्यवसाय में पैसा लगाते हैं या फिर निष्क्रिय निवेश (रियल एस्टेट, सरकारी बॉन्ड, फिक्स्ड डिपॉजिट) को प्राथमिकता देते हैं।

अगर किसी के पास $800,000 (करीब ₹6.5 करोड़) निवेश करने की क्षमता है और अमेरिका में बसने की इच्छा है, तो ग्रीस में निवेश करने का कोई तर्क नहीं बनता। सही गोल्डन वीजा चुनने का फैसला निवेश के उद्देश्य और लंबी अवधि की योजना पर आधारित होना चाहिए।

गोल्डन वीजा: भारतीय निवेशकों के लिए कौन-से विकल्प खुले हैं?

रिटायरमेंट की योजना बना रहे 50-55 वर्ष के लोगों के लिए जीवनशैली और यात्रा की सुविधा बड़े फैसलों को प्रभावित करती है। यूरोप भारतीयों के लिए आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है, क्योंकि यह भारत से एक रात की उड़ान की दूरी पर है। इसके मुकाबले कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या अमेरिका पहुंचने में 30-40 घंटे लग सकते हैं, जिससे यूरोपीय देशों को प्राथमिकता मिल रही है।

दुबई का गोल्डन वीजा बनाम यूरोप के विकल्प

दुबई का गोल्डन वीजा भारतीय निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है, खासकर उसकी नजदीकी और व्यापारिक अवसरों के कारण। मुंबई से दुबई की यात्रा कोलकाता जाने जितनी आसान है। हालांकि, सालभर वहां रहना हर किसी के लिए संभव नहीं होता, क्योंकि गर्मियों में तापमान 45-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इस कारण कई लोग वहां केवल कुछ महीनों के लिए रहते हैं।

इसके अलावा, दुबई का गोल्डन वीजा स्थायी निवास या नागरिकता की गारंटी नहीं देता। शिक्षा की बात करें तो स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए भारतीय परिवार आमतौर पर अमेरिका, कनाडा या यूरोप को प्राथमिकता देते हैं।

भारतीय निवेशकों के लिए गोल्डन वीजा विकल्प

हालांकि कई देशों ने गोल्डन वीजा नियमों को कड़ा किया है, फिर भी कुछ विकल्प भारतीय निवेशकों के लिए खुले हैं:

पुर्तगाल: निवेशक वैज्ञानिक अनुसंधान, बिजनेस विस्तार या स्वीकृत फंड में निवेश कर निवास के लिए आवेदन कर सकते हैं।

ग्रीस: रियल एस्टेट में न्यूनतम निवेश सीमा अब €400,000 हो गई है। साथ ही, स्थानीय स्टार्टअप में €250,000 का निवेश कर भी वीजा पाया जा सकता है।

स्पेन: स्पेन का गोल्डन वीजा कार्यक्रम धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है, लेकिन 2024 से पहले आवेदन करने वालों की प्रक्रिया जारी रहेगी।

माल्टा: यहां नागरिकता के लिए निवेश का विकल्प उपलब्ध है, लेकिन कड़ी जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा।

कैरेबियाई देश: सेंट किट्स एंड नेविस, ग्रेनेडा, एंटीगुआ और बारबुडा, डोमिनिका, और सेंट लूसिया में $200,000 से शुरू होने वाले निवेश के बदले पासपोर्ट उपलब्ध हैं।

यूएई: हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी और बिजनेस सेक्टर के पेशेवरों के लिए यूएई का गोल्डन वीजा अब भी खुला है।

सिंगापुर: यहां आधिकारिक तौर पर गोल्डन वीजा नहीं है, लेकिन ग्लोबल इन्वेस्टर प्रोग्राम (GIP) के तहत कुछ निवेश योजनाओं के जरिए स्थायी निवास (PR) का मौका मिलता है:

  • बिजनेस इन्वेस्टमेंट: सिंगापुर में नए या मौजूदा बिजनेस में कम से कम SGD 10 मिलियन का निवेश।
  • फंड इन्वेस्टमेंट: GIP स्वीकृत फंड में SGD 25 मिलियन का निवेश।
  • फैमिली ऑफिस: सिंगापुर में सिंगल-फैमिली ऑफिस स्थापित कर SGD 200 मिलियन की संपत्ति प्रबंधन करना, जिसमें से कम से कम SGD 50 मिलियन स्थानीय इक्विटी, बांड, फंड या निजी कंपनियों में निवेश करना होगा।

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First Published - March 1, 2025 | 4:44 PM IST

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