भारत का आवासीय रियल एस्टेट सेक्टर 2026-27 में मजबूती के साथ प्रवेश कर रहा है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि पिछले चार वर्षों में देखी गई तेज बढ़त इस बार शायद नहीं दोहराई जाएगी। उनके अनुसार इसकी वजह यह है कि रियल एस्टेट बाजार हाउसिंग साइकल के ज्यादा परिपक्व दौर में प्रवेश कर रहा है।
निवेश के नजरिये से विश्लेषकों को उम्मीद है कि कुछ चुनिंदा सूचीबद्ध कंपनियां बाजार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करेंगी। इसमें उन्हें बाजार के एकीकरण, मजबूत बैलेंस शीट और खरीदारों की ब्रांडेड कंपनियों के प्रति बढ़ती पसंद से मदद मिलेगी।
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज ने अपनी एक सेक्टर रिपोर्ट में कहा, हालांकि हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में पूरे बाजार की वृद्धि थोड़ी धीमी हो जाएगी, फिर भी सूचीबद्ध डेवलपर बाजार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करेंगे। इसकी वजह बाजार का एकीकरण, ब्रांडेड कंपनियों की बढ़ती मांग और प्रीमियम सेगमेंट की मजबूती होगी। इसमें कहा गया है कि वृद्धि ज्यादा चुनिंदा होगी और बड़े पैमाने पर मांग बढ़ने के बजाय काम को ठीक से पूरा करने की क्षमता से चलेगी।
ब्रोकरेज ने बताया कि 18 सूचीबद्ध डेवलपरों की प्री-सेल्स ग्रोथ वित्त वर्ष 23 में 43 फीसदी, वित्त वर्ष 24 में 39 फीसदी और वित्त वर्ष 25 में 20 फीसदी से घटते हुए वित्त वर्ष 26 में 17 फीसदी रह गई। अब उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 27 में प्री-सेल्स ग्रोथ और कम होकर 10-15 फीसदी के बीच रह जाएगी। एमके ग्लोबल ने आगाह किया कि जहां एक तरफ शहरीकरण, महंगे मकानों की बढ़ती मांग और संगठित डेवलपरों के बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने जैसे बुनियादी कारक आवासीय क्षेत्र की कुल मांग को सहारा दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के कारण नौकरियों में अनिश्चिततता, भू-राजनीतिक तनाव, धीमी वेतन वृद्धि और कंपनियों की कमाई में कमी इस क्षेत्र की वृद्धि को धीमा कर सकती हैं।
ऐस इक्विटी के आंकड़ों के अनुसार कैलेंडर वर्ष 2026 में निफ्टी रियल्टी के हर शेयर को नुकसान उठाना पड़ा है। ब्रिगेड एंटरप्राइजेज, आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट, लोढ़ा डेवलपर्स, डीएलएफ, प्रेस्टीज एस्टेट और गोदरेज प्रॉपर्टीज के शेयरों में इस साल 1 जून तक 14.5 फीसदी से लेकर 25.4 फीसदी तक की गिरावट आई है। इसकी तुलना में इस दौरान निफ्टी 50 और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में क्रमशः 10.5 फीसदी और 12.5 फीसदी की गिरावट आई है।
सेक्टर की धीमी वृद्धि को लेकर चिंताओं के बावजूद विश्लेषकों को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही की शुरुआत मजबूत आधार पर होगी और इसे लॉन्च की मजबूत योजनाओं से सहारा मिलेगा। वैश्विक ब्रोकरेज नोमूरा के अनुसार वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में मजबूत शुरुआत देखने को मिल सकती है, जिसकी अगुआई गोदरेज प्रॉपर्टीज, ओबेरॉय रियल्टी और शोभा की अपेक्षाकृत मजबूत शुरुआत से कर सकती हैं।
उसे उम्मीद है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में तीन सुपर लक्जरी योजनाएं शुरू होंगी। इनमें ओबेरॉय रियल्टी की 360 नॉर्थ, गोदरेज प्रॉपर्टीज की समारीज और शोभा की क्रीसेंट है। इनसे तिमाही में मांग को बढ़ावा मिल सकता है। नोमूरा ने कहा, इस तिमाही के दौरान शुरू हुई परियोजनाओं को बाजार से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। प्रीमियम कीमतों के बावजूद गुरुग्राम में गोदरेज प्रॉपर्टीज के समारीज प्रोजेक्ट और शोभा के क्रीसेंट डेवलपमेंट की मांग मजबूत बनी हुई है। उसे हैदराबाद में प्रेस्टीज एस्टेट के गोल्डन ग्रोव प्रोजेक्ट और बेंगलूरु में शोभा के वन वर्ल्ड टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर भी पूरा भरोसा है।
इसी तरह, एमके ग्लोबल को उम्मीद है कि मुंबई के कांजूरमार्ग के पास महिंद्रा लाइफस्पेस का रेनफॉरेस्ट प्रोजेक्ट वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 900-1,000 करोड़ रुपये की बुकिंग हासिल करेगा। साथ ही, उसने हैदराबाद में प्रेस्टीज एस्टेट के हाल में लॉन्च हुए ग्रोल्डन ग्रोव प्रोजेक्ट के लिए जबरदस्त आकर्षण की भी बात कही है।
जैसे-जैसे वृद्धि ज्यादा चुनिंदा होती जा रही है, ब्रोकरेज उन डेवलपरों पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं, जिनके पास मजबूत परियोजना प्रस्ताव, काम पूरा करने की अच्छी क्षमता और मजबूत बैलेंस शीट है। एमके की पसंदीदा कंपनियां महिंद्रा लाइफस्पेस डेवलपर्स, शोभा और लोढ़ा डेवलपर्स हैं।
इसमें कहा गया है, हमें उम्मीद है कि महिंद्रा लाइफस्पेस और शोभा मजबूत लॉन्च और अगले तीन से चार सालों में लगभग 20-25 फीसदी की मध्यम-अवधि की प्री-सेल्स सीएजीआर के सहारे उम्दा प्रदर्शन करेंगी। संतुलित विकास रणनीति के कारण लोढ़ा भी उसकी पसंदीदा लार्जकैप डेवलपर है।
इसमें कहा गया है, हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 27 में लगभग 17 फीसदी की प्री-सेल्स वृद्धि मिलेगी और अगले चार से पांच वर्षों तक 10-15 फीसदी सीएजीआर बनाए रखेगी।
दूसरी ओर, नोमूरा लोढ़ा डेवलपर्स, ओबेरॉय रियल्टी, डीएलएफ, प्रेस्टीज एस्टेट्स और आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट को प्राथमिकता देती है। गोदरेज प्रॉपर्टीज को छोड़कर, जिसकी रेटिंग तटस्थ है, बाकी सभी शेयरों को खरीद की रेटिंग दी गई है।