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लिस्टेड REITs ने निफ्टी रियल्टी और सेंसेक्स को पीछे छोड़ते हुए ऑफिस लीजिंग में दिए आकर्षक रिटर्न

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लीजिंग का दायरा 5.09 करोड़ वर्ग फुट पार कर गया है जो सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि है

Last Updated- October 05, 2025 | 10:41 PM IST
REITs
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पिछले एक साल में 18 प्रतिशत के औसत रिटर्न के साथ सूचीबद्ध रियल एस्टेट निवेश ट्रस्टों (रीट्स) ने निफ्टी रियल्टी इंडेक्स और सेंसेक्स दोनों को पीछे छोड़ दिया है। इस अवधि में निफ्टी रियल्टी में 15.5 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि सेंसेक्स में कोई खास बदलाव नहीं आया। ऑफिस लीजिंग में निरंतरता, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा रीट्स को इक्विटी साधन का फिर से दर्जा देने के फैसले और पोर्टफोलियो के लगातार विस्तार ने इस सेक्टर के आकर्षण को बढ़ाया है।

देश के सात सबसे बड़े कार्यालय बाजारों में लीजिंग में पहली तीन तिमाहियों में स्थिरता रही है। लीजिंग का दायरा 5.09 करोड़ वर्ग फुट पार कर गया है जो सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि है। बेंगलूरु 1.4 करोड़ वर्ग फुट लीजिंग के साथ सबसे आगे है जो कुल कार्यालय स्पेस की मांग का 27 प्रतिशत है। पुणे और चेन्नई में नौ महीनों में लीजिंग पहले ही पूरे वर्ष 2024 के स्तर को पार कर चुकी है। कोलियर्स में भारत में कार्यालय सेवाओं के प्रबंध निदेशक अर्पित मेहरोत्रा कहते हैं कि वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) के अधिक जगह लेने और घरेलू फर्मों की सतत मांग के कारण यह बढ़ोतरी हुई है। अकेले जीसीसी ने इस साल शीर्ष सात शहरों में लगभग 2 करोड़ वर्ग फुट जगह ली है जो कुल कार्यालय स्थान की मांग का लगभग 40 प्रतिशत है।

सेबी ने रीट्स को हाइब्रिड योजनाओं के बजाय इक्विटी में दुबारा वर्गीकृत कर दिया है। इससे भारत अब वैश्विक प्रणालियों के अनुरूप हो गया है। म्युचुअल फंड अब इन्हें इक्विटी इंडेक्स में शामिल कर सकते हैं जिससे तरलता बढ़ेगी। यह अलग बात है कि इससे और अधिक अस्थिरता आएगी। इस बदलाव से भारतीय रियल एस्टेट में और ज्यादा विदेशी पूंजी आने की उम्मीद है। इस सेक्टर को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें एआई से जुड़ी सूचना प्रौद्योगिकी में छंटनी और ऊंचे एच1-बी वीजा शुल्क तथा संभावित हायर (अंतरराष्ट्रीय रोजगार स्थानांतरण पर रोक) एक्ट जैसे अमेरिकी उपाय मुख्य रूप से शामिल हैं। फिर भी, लीजिंग रुकी हुई है। शीर्ष सात शहरों में लगभग 2 करोड़ वर्ग फुट के सक्रिय अनुरोधों पर विचार किया जा रहा है। इनमें से अकेले बेंगलूरु का 60 प्रतिशत योगदान है, जिसका मुख्य कारण जीसीसी की मांग है। नुवामा के विश्लेषक परवेज काजी और वासुदेव गनात्रा का मानना है कि अमेरिकी नीतियों में बदलाव से मध्यम अवधि में बढ़ी हुई ऑफशोरिंग और जीसीसी व्यवस्था के माध्यम से बेंगलूरु के संपत्ति बाजार का आकर्षण और बढ़ सकता है।

बढ़ती मांग सूचीबद्ध रीट्स और उनकी विस्तार योजनाओं में ऊंचे ऑक्यूपेंसी स्तर में नजर आती है। वाणिज्यिक परिसंपत्तियों के मालिकों ने जीसीसी की अच्छी मांग की जानकारी दी है जिसे फ्लेक्सीबल ऑफिस ऑपरेटरों का समर्थन है और शहरों में इस्तेमाल बढ़ाने में मदद मिल रही है। ज्यादातर सूचीबद्ध ऑफिस मालिकों ने 90 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी हासिल कर ली है। ब्रिगेड एंटरप्राइजेज, डीएलएफ और माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रीट 2025-26 (वित्त वर्ष 2026) की पहली तिमाही तक ही इस स्तर से ऊपर पहुंच चुके हैं। ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट और एम्बेसी ऑफिस पार्क्स रीट का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 के अंत तक इस स्तर को छूना है। कोटक सिक्योरिटीज के विश्लेषक मुर्तजा आरसीवाला का कहना है कि संपत्ति मालिकों के पास नई संपत्तियां हैं, जिससे स्टोर वृद्धि से इतर भी आय को बढ़ावा मिलना चाहिए। प्रतिफल 6-7 प्रतिशत पर आकर्षक बना हुआ है जिसमें मध्यावधि में अच्छी वृद्धि की संभावना है।

सूचीबद्ध रीट्स में नॉलेज रियल्टी ट्रस्ट की शुरुआत अगस्त में हुई थी। बीओबी कैपिटल मार्केट्स ने माइंडस्पेस और ब्रुकफील्ड को ‘खरीदने’ तथा एम्बेसी को ‘होल्ड’ की सलाह दी है। विश्लेषक यशस गिलगांची का अनुमान है कि माइंडस्पेस की बढ़ती ऑक्यूपेंसी वित्त वर्ष 2028 तक स्थानीय किराये में सालाना 6.1 प्रतिशत की वृद्धि करेगी। रीट को विकास के लिए कम लागत पर धन जुटाने में सक्षम होना चाहिए क्योंकि वह वित्त वर्ष 2028 तक परिपक्व होने वाले अपने ऋण के 43.8 प्रतिशत का पुनर्वित्त कर रहा है।

ब्रुकफील्ड के बारे में ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की अधिग्रहण-आधारित रणनीति उसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में लीज देने योग्य स्पेस को तेजी से बढ़ाने में मदद करेगी। रीट्स को कम ब्याज लागत का भी लाभ मिलना चाहिए क्योंकि रीपो से जुड़े उसके ऋण कम दरों के अनुसार हो जाते हैं।

अपने लीज योग्य क्षेत्र के विस्तार के लिए एम्बेसी नए विकास पर निर्भर है जो उसके विस्तार की गति को धीमा कर कर सकती है। उसका ऊंचा ऋण बोझ भी किराये की आय में वृद्धि को प्रति यूनिट लाभांश में बदलने में सीमित कर देता है। जेएम फाइनैंशियल सर्विसेज ने नेक्सस सलेक्ट ट्रस्ट को खरीदें रेटिंग दी है।  

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First Published - October 5, 2025 | 10:41 PM IST

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