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दिल की बीमारी का बीमा बन गया जरूरी

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Last Updated- December 12, 2022 | 12:12 AM IST

करीब दो दशक पहले दिल की बीमारी बुजुर्गों या अधेड़ उम्र के लोगों में ही देखी जाती थी। मगर पिछले कुछ साल में कम उम्र के लोग भी दिल की बीमारी के शिकार देखे जाने लगे हैं और ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं, जो चिंता की बात है। इंडियन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार भारत में पुरुषों को पडऩे वाले दिल के दौरों में 50 फीसदी 50 साल से कम उम्र के लोगों को पड़ते हैं। 25 फीसदी दिल के दौरे के मामले 40 साल से कम उम्र के लोगों में देखे गए। भारत की महिलाएं भी इस खतरे से महफूज नहीं हैं और दिल की बीमारी के कारण मृत्यु की दर उनमें भी काफी ज्यादा है।
चिंता का एक और मसला यह है कि दिल की बीमारी के इलाज का खर्च बहुत ज्यादा होता है। ऐंजियोप्लास्टी कराने में 5 से 6 लाख रुपये आराम से खर्च हो जाते हैं।

हृदय रोग का बीमा
ऐसे में कई बीमा कंपनियां हृदय रोग से संबंधित खास बीमा पॉलिसी लेकर आई हैं। इन पॉलिसियों में दिल से जुड़ी ज्यादातर बीमारियां और उनके इलाज शामिल हैं जैसे बाईपास, हृदयाघात, कार्डियोम्योपैथी, ऐंजियोग्राफी, पेसमेकर लगाना आदि। कुछ पॉलिसियों में ओपीडी के खर्च भी शामिल किए जाते हैं।
हृदय रोग के लिए खास तौर पर बनाई गई ये बीमा पॉलिसी फायदेमंद हैं और उन लोगों के लिए खास तौर पर कारगर हैं, जिन्हें पहले से ही दिल की कोई समस्या है। स्टार हेल्थ ऐंड अलाइड इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एस प्रकाश कहते हैं, ‘हमारी पॉलिसी उन लोगों को भी बीमा की सुविधा देती है, जिन्हें पहले से ही दिल की कोई बीमारी है या जो दिल का ऑपरेशन करा चुके हैं। हम 7 साल से 70 साल तक की उम्र के लोगों को बीमा देते हैं। दिल की जन्मजात बीमारी, पेसमेकर लगाना और हृदय प्रत्यारोपण भी इसमें शामिल रहता है।’ इनमें से कुछ पॉलिसियों में तो चिकित्सा जांच की जरूरत भी नहीं पड़ती। हृदय रोग की कुछ पॉलिसयों में दिल से जुड़ी सभी दिक्कतें शामिल होती हैं और (कॉम्प्रिहेंसिव स्वास्थ्य बीमा की तरह) दूसरी बीमारियों के लिए अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी दिया जाता है। केवल दिल की बीमारियों के लिए बनी बीमा पॉलिसियों में इनडेम्निटी कवर (जिसमें अस्पताल में भर्ती होने पर हुए वास्तविक खर्च का भुगतान किया जाता है) और फिक्स्ड-बेनिफिट कवर शामिल हैं। पॉलिसी बाजार में स्वास्थ्य बीमा के प्रमुख अमित छाबड़ा कहते हैं, ‘कई बीमा कंपनियां दिल से जुड़ी दिक्कतों के लिए फिक्स्ड-बेनिफिट स्वास्थ्य बीमा देती हैं। बीमा कराने वाले को यदि दिल की बीमारी निकलती है तो इन पॉलिसी में एकमुश्त राशि मिल जाती है।’ चूंकि केवल दिल की बीमारी के लिए बनी बीमा पॉलिसी एक ही बीमारी के लिए होती है, इसलिए यह क्रिटिकल इलनेस बीमा के मुकाबले सस्ती हो सकती है।

जांचें प्रतीक्षा अवधि
आप चाहें कॉम्प्रिहेंसिव स्वास्थ्य बीमा लें, क्रिटिकल इलनेस बीमा लें या केवल दिल की बीमारी का बीमा लें, प्रतीक्षा अवधि जरूर जांच लेनी चाहिए। पॉलिसीएक्स डॉट कॉम के संस्थापक तथा मुख्य कार्य अधिकारी नवल गोयल कहते हैं, ‘कुछ पॉलिसियों में पहले से मौजूद दिल की बीमारी को कतई कवर नहीं किया जाता। कुछ निर्धारित प्रतीक्षा अवधि पूरी होने के बाद उन्हें शामिल कर लेती हैं। लेकिन केवल दिल की बीमारी के बीमा में सबसे कम प्रतीक्षा अवधि रखी जाती है।’
कॉम्प्रिहेंसिव स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में आम तौर पर 90 दिन के बाद कवर मिलना शुरू होता है। अगर पहले से दिल की बीमारी होती है तो कवर तीन-चार साल बाद भी शुरू किया जा सकता है।

अगर दिल की बीमारी हो तो..
जिन लोगों को पहले से दिल की बीमारी है उन्हें शायद कॉम्प्रिहेंसिव स्वास्थ्य बीमा नहीं मिल पाएगा। गोयल का सुझाव है, ‘जैसे ही दिल की बीमारी का पता चले, फौरन दिल के लिए खास बीमा खरीद लेना चाहिए।’
पक्का कर लीजिए कि बीमा राशि अधिक से अधिक हो। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पॉलिसी में इंप्लांट (पेसमेकर, स्टेंट आदि) का खर्च शामिल हो और अस्पताल में भर्ती होने से पहले के तथा वहां से छुट्टी मिलने के बाद के खर्च भी बीमा कंपनी दे रही हो।

मगर पूरी तरह सेहतमंद हों तो..
जिन्हें दिल की बीमारी नहीं है, उन्हें कॉम्प्रिहेंसिव व्यक्तिगत बीमा अथवा फैमिली-फ्लोटर बीमा लेना चाहिए। मुंबई में प्रमाणित वित्तीय योजनाकार पंकज मालडे कहते हैं, ‘अगर आपके पास 10 लाख रुपये की कॉम्प्रिहेंसिव स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी है तो आपको न तो क्रिटिकल इलनेस बीमा की जरूरत है और न ही दिल की बीमारी के बीमा की।’ मुंबई में ही एक अन्य प्रमाणित वित्तीय योजनाकार पंकज मठपाल की राय है, ‘अगर बीमा राशि में इजाफा करता है तो कॉम्प्रिहेंसिव स्वास्थ्य बीमा और सुपर टॉप-अप एक साथ लेना सबसे अच्छा रहेगा। अगर आपको दिल की बीमारी नहीं है मगर आपके परिवार में पिछली पीढिय़ों में यह बीमारी रही है तो क्रिटिकल इलनेस बीमा पॉलिसी खरीद लीजिए।’ कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि दिल की बीमारी के बढ़ते मामले देखते हुए ज्यादातर लोगों के लिए अच्छा यही है कि कॉम्प्रिहेंसिव स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी और क्रिटिकल इलनेस बीमा को एक साथ चलाएं। आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस के मुख्य कार्य अधिकारी मयंक बथ्वाल समझाते हैं, ‘इनडेम्निटी कवर से अस्पताल में भर्ती होने पर हुए खर्च संभाले जा सकते हैं और फिक्स्ड-बेनिफिट योजना इलाज के बाद ठीक होने के दौरान हुए आय के नुकसान की भरपाई कर देगी।’

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First Published - October 15, 2021 | 11:53 PM IST

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