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फ्लोटिंग दर वाले फंडों से घट सकती है ब्याज दर अस्थिरता

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Last Updated- December 12, 2022 | 12:11 AM IST

बीएस बातचीत

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी (फिक्स्ड इनकम) राहुल गोस्वामी ने चिराग मडिया के साथ एक साक्षात्कार में बताया कि जिंस और ऊर्जा कीमतों में तेजी मध्यावधि में सबसे बड़े जोखिम हैं। उन्होंने कहा कि यह फ्लोटिंग दर वाले फंडों में निवेश का सही समय है। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
आरबीआई ने तरलता सामान्य बनाए जाने पर जोर दिया है, जिसे देखते हुए आपका डेट बाजारों पर क्या नजरिया है?
मौद्रिक स्थिति को सामान्य बनाए जाने का कदम दैनिक कोविड मामलों की संख्या में कमी, टीकाकरण अभियान में तेजी, आर्थिक गतिविधि में बदलाव, ऊंची जिंस कीमतों के साथ मजबूत हो रहा है। नीति सामान्य बनाने की प्रक्रिया आरबीआई द्वारा जी-सेक एक्वीजिशन प्रोग्राम (जी-सैप) परिचालन को लेकर प्रतिबद्घता नहीं जताए जाने और वैरिएबल रेट रिवर्स रीपो (वीआरआरआर) की मात्रा बढ़ाने के लक्ष्य के साथ शुरू हुई। आरबीआई ने 28 दिन के वीआरआरआर का विकल्प तैयार किया है। आरबीआई ने यह भी कहा है कि वह सक्रिय तरलता प्रबंधन से दूर रहेगा, जिसका मतलब है कि टर्म बैंकिंग लिक्वीडिटी का इस्तेमाल निर्धारित नीलामियों के आधार पर हो सकेगा। हमारा मानना है कि तरलता सामान्य बनाने के बाद अगला कदम नीतिगत दर दायरे को सीमित करने पर केंद्रित होगा।

पिछले कुछ दिनों के दौरान प्रतिफल में तेजी आई है। प्रतिफल में अचानक तेजी के कारण क्या हैं?
प्रतिफल काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों पर आधारित रहा है, जिनमें तेल कीमतें बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने और अमेरिकी प्रतिफल बढ़कर 1.65 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचने जैसे बदलाव मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके परिणामस्वरूप, प्रतिफल में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक के बाद भी सख्ती आई थी। घरेलू मोर्चे पर, आरबीआई ने अपनी ताजा एमपीसी बैठक में जी-सैप कार्यक्रम वापस लेने के इरादे का संकेत दिया है, भले ही वह सरकारी उधारी कार्यक्रम को समर्थन बरकरार रखेगा।

क्या आप मानते हैं कि अमेरिकी फेड द्वारा रियायत वापस लिए जाने का भारतीय बॉनड बाजारों पर प्रभाव पड़ेगा?
भारतीय सरकार और आरबीआई ने 700 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा संचयन में सराहनीय कार्य किया है और इससे सुरक्षा की स्थिति मजबूत हुई है। भारतीय वृहद स्थिति अच्छी स्थिति में है, जिसे देखते हुए हमारा मानना है कि भारत काफी हद तक अमेरिकी फेड द्वारा बॉन्ड खरीदारी में नरमी जैसे कदमों से अलग बना रहेगा। हम व्यापार संतुलन और चालू खाते के आंकड़े पर नजर लगाए रखेंगे।

मौजूदा स्थिति में निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
हमारा मानना है कि हम ब्याज दर वृद्घि चक्र के शुरू में हैं और मौजूदा चरण महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें लंबी अवधि के प्रीमियम (प्रतिफल में अंतर) से लाभ होगा। यह फ्लोटिंग दर के फंड में निवेश का सही समय हो सकता है, जिससे ब्याज दर उतार-चढ़ाव में कमी आ सकती है। निवेशक सभी सीजन वाले बॉन्ड फंड में निवेश पर भी विचार कर सकते हैं, जिसमें फंड प्रबंधक को बदलते बाजार हालात को ध्यान में रखते हुए निवेश की स्वतंत्रता होती है।

मौजूदा समय में डेट बाजार को किन जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है?
ऋण बाजार के लिए मुख्य अनिश्चितता यह है कि मध्यावधि में जिंस और ऊर्जा कीमतें कैसी रहेंगी। चूंकि भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए कोई बड़ी तेजी व्यापार संतुलन और चालू खाता संतुलन में बदलाव ला सकती है। अन्य जोखिम है ब्याज दरें बढऩे पर दबाव, क्योंकि इससे उन कंपनियां का मुनाफा प्रभावित होगा जिन पर कर्ज है और साथ ही इससे इससे उन कंपनियों की सुधार प्रक्रिया में भी विलंब होगा जो हाल में महामारी के प्रभाव से उबरी हैं।

क्या आप भारतीय उद्योग जगत से चूक की आशंका देख रहे हैं? यदि हां तो किस क्षेत्र में?
हम ऋण चक्र पर सकारात्मक हैं, क्योंकि ऋण स्तर काफी नीचे है और ज्यादातर कंपनियां कर्ज मुक्त हो चुकी हैं। इसलिए हम चक्रीयता के नजरिये से कॉरपोरेट क्षेत्र को पसंद कर रहे हैं।

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First Published - October 17, 2021 | 11:32 PM IST

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