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बंडल्ड योजनाओं में सुविधा ज्यादा फायदे कम

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Last Updated- December 11, 2022 | 5:20 PM IST

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हाल ही में म्यूचुअल फंडों को बंडल्ड उत्पाद बेचने से रोक दिया है। इसलिए अगर कुछ समय बाद आप लंबी अवधि के सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में निवेश करते हैं तो म्युचुअल फंड आपको साथ में मुफ्त जीवन बीमा नहीं देगा। फिर भी वित्तीय जगत में बंडल्ड उत्पादों की भरमार है मगर उन पर भरोसा करने से पहले ग्राहकों को बारीकियां समझ लेनी चाहिए।

दो प्रकार की बंडलिंग
बंडलिंग यानी एक साथ दो योजनाओं की पेशकश दो स्तरों पर होती है। पहला, जब योजना तैयार करने वाला ऐसे फायदे मुफ्त में देता है, जो मूल योजना या उत्पाद के हिस्से नहीं होते हैं। जैसे क्रेडिट कार्ड के साथ प्राथमिक कार्डधारक को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा मिल सकता है या बैंक में सावधि जमा (एफडी) के साथ जमा राशि के बराबर राशि का जीवन बीमा दिया जा सकता है। दोनों मामलों में प्रीमियम उत्पाद देने वाली कंपनी यानी बैंक देता है या उसे मुख्य उत्पाद की कीमत में शामिल कर दिया जाता है।
दूसरे प्रकार में कंपनी एक साथ कई उत्पाद या फायदे देती है। जैसे जब आप होम लोन लेते हैं तो बैंक आपको टर्म बीमा कवर लेने को भी कह सकता है, जो लोन की राशि के बराबर हो सकता है और समय  के साथ कम होता जाता है। इससे कर्ज लेने वाले की मौत होने पर बैंक का पैसा सुरक्षित हो जाता है। व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी दुर्घटना के कारण अस्पताल में भर्ती होने पर खर्च वापस हो जाता है। इन सभी मामलों में अतिरिक्त प्रीमियम वसूला जाता है। जीवन बीमा को बाजार निवेश से जोड़ने वाला यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) सबसे लोकप्रिय बंडल्ड उत्पादों में शुमार है।
बंडल्ड उत्पाद एक साथ काफी कुछ दे देते हैं। जर्मिनेट इन्वेस्टर सर्विसेज के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर संतोष जोसेफ कहते हैं, ‘इनमें सहूलियत मिलती है और समय तथा खर्च भी बच जाता है। ग्राहकों को एक ही उत्पाद में दो फायदे हासिल हो जाते हैं।’ दो बार आवेदन दस्तावेज भरने और दो बार केवाईसी कराने के बजाय उन्हें यह कवायद एक ही बार करनी पड़ती है। कई बार कंपनी उत्पाद की लागत का कुछ हिस्सा भी खुद ही भरती है।

फायदे कम
मगर बंडल्ड उत्पादों में अक्सर कुछ बंदिशें होती हैं। अरविंद राव एंड असोसिएट्स के संस्थापक अरविंद ए राव कहते हैं, ‘चूंकि ये हमेशा दूसरे उत्पाद के साथ जुड़े होते हैं, इसलिए इनमें अधिकतम फायदे की सीमा होती है। इसलिए बंडल्ड उत्पाद को ग्राहकों की प्राथमिक जरूरत पूरा करने वाला नहीं माना जा सकता।’
एक दिक्कत यह भी है कि ग्राहक एक साथ दो योजनाओं में फंस जाता है। राइट हॉराइजन्स के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी अनिल रेगो कहते हैं, ‘दोनों उत्पादों में से कोई एक अच्छा काम नहीं कर रहा हो तो उसे बंद करने के लिए ग्राहक को पूरी योजना ही छोड़नी होगी। इसलिए बंडल्ड उत्पाद लेने से पहले सोच लेना चाहिए।’

छिपे नियम
कभी-कभार मुफ्त लाभ कुछ शर्तों के साथ आते हैं। मसलन बीमा कवर निश्चित उम्र पर खत्म हो सकता है। कंपनियां कभी-कभी शर्तों में लिख भी देती हैं कि मुफ्त फायदे किसी भी समय बंद करने का अधिकार उनके पास है और वे इन्हें बंद भी कर देती हैं। जोसेफ आगाह करते हैं, ‘फायदे की अवधि या मात्रा में कुछ शर्तें पहले से जुड़ी हो सकती हैं। इससे ग्राहक अचानक परेशानी में फंस सकते हैं।’ इसलिए बंडल्ड उत्पादों की शर्तें जरूर पढ़ लें। रेगो मिसाल देकर समझाते हैं, ‘ज्यादातर क्रेडिट कार्ड में दुर्घटना बीमा या सामान गुम होने का बीमा साथ में मिलता है। मगर कई मामलों में बीमा का लाभ नहीं मिलने की बात भी लिखी होती है, जिनकी जानकारी ग्राहकों को होनी चाहिए।’

इन्हें लेना कितना सही?
टू इन वन उत्पाद तभी लें, जब ये आपके काम के हों। व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा में आपको अतिरिक्त प्रीमियम के बदले अस्पताल में भर्ती होने वाले फायदे मिल सकते हैं। मगर हो सकता है कि इसमें बीमा राशि 50,000 रुपये से 5 लाख रुपये तक ही हो, जो नाकाफी होगी। इसलिए अलग से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदना सही रहेगा, जिसमें किसी भी स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने पर बीमा का फायदा मिलेगा। राव कहते हैं कि कई बार बंडल्ड उत्पाद खरीदकर आप मान लेते हैं कि आपकी अमुक जरूरत पूरी हो गई है मगर वास्तव में साथ में मिलने वाला फायदा बहुत कम होता है। रेगो भी कहते हैं कि जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा में किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए। अपनी जरूरत भांपकर उतनी राशि का बीमा जरूर ले लेना चाहिए।

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First Published - July 25, 2022 | 1:22 AM IST

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