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भारत-केंद्रित फार्मा शेयरों पर ब्रोकरों का दांव

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Last Updated- December 11, 2022 | 11:13 PM IST

सिर्फ ऐसा एकमात्र सेक्टोरल सूचकांक बीएसई हेल्थकेयर ही था जो शुक्रवार को बाजार में बड़ी गिरावट के बावजूद नुकसान से दूर बचे रहने में कामयाब रहा। बीएसई हेल्थकेयर में 1.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निवेशक नए कोविड वैरिएंट ओमिक्रॉन पर वैश्विक अलर्ट के बाद हेल्थकेयर स्पेस पर दांव लगा रहे हैं। फार्मास्युटिकल क्षेत्र में, ब्रोकर बड़ी जेनेरिक कंपनियों के मुकाबले घरेलू-केंद्रित दवा कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं।
भारतीय कंपनियों का घरेलू परिचालन सितंबर तिमाही में वृद्घि के मोर्चे पर अच्छा रहा है। भले ही इस क्षेत्र के लिए सालाना आधार पर कुल बिक्री वृद्घि 7 प्रतिशत थी, वहीं भारतीय घरेलू व्यवसाय 12 प्रतिशत की दर से बढ़ा। जहां जेबी केमिकल्स ने एक साल पहले की तिमाही के दौरान 39 प्रतिशत की मजबूत घरेलू फॉर्मूलेशन वृद्घि दर्ज की, वहीं इप्का का प्रदर्शन सालाना और तिमाही, दोनों आधार पर अच्छा रहा और इसमें 30 प्रतिशत तथा 14 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की गई। अल्केम लैबोरेटरीज और सन फार्मास्युटिकल्स घरेलू बाजार में अन्य ऐसे शेयर थे जिनमें सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की गई है।
कमजोर तिमाही में भारतीय बाजार के लिए अच्छा प्रदर्शन करने के कई कारण हैं। येस सिक्योरिटीज के भावेश गांधी के नेतृत्व में विश्लेषकों का कहना है कि कई सकारात्मक बदलावों की वजह से घरेलू व्यवसाय में अच्छी वृद्घि को बढ़ावा मिला।
जहां एंटी-कोविड दवाओं में मौजूदा तिमाही में बड़ी गिरावट आई है, वहीं नए स्ट्रेन का प्रभाव यदि फिर से देखा जाता है तो इन दवाओं की बिक्री फिर से बढ़ सकती है। ग्लेनमार्क फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, और सिप्ला उस स्थिति में अच्छा लाभ हासिल करने में सक्षम होंगी। विश्लेषकों का मानना है कि सामान्य आधार पर घरेलू फॉर्मूलेशन बाजार दो अंक में बढ़ेगा और उसे मरीजों की संख्या में वृद्घि, विशेष सर्जरी आदि से मदद मिलेगी।
भले ही कीमत वृद्घि का भारत में वृद्घि के लिए एकमात्र सबसे बड़ा योगदान रहा है और कंपनियां मूल्य निर्धारण ताकत में सक्षम हैं, बड़ी जेनेरिक कंपनियोंं को अमेरिकी बाजार/अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आगे बढऩे के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है जिससे बिक्री वृद्घि प्रभावित हो रही है। अमेरिका समेत सभी क्षेत्रों में व्यापक इन्वेंट्री को देखते हुए डिस्काउंट यानी रियायत के साथ बिक्री करने और कीमतें घटाने की आवश्यकता बढ़ी है।
कुछ को छोड़कर, कई कंपनियों ने सालाना आधार पर बिक्री में गिरावट दर्ज की और इससे औसत आधार पर 2.3 प्रतिशत की गिरावट को बढ़ावा मिला है। प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों का कहना है, ‘अमेरिकी बाजार बेहद प्रतिस्पर्धी बना हुआ है, जिसकी वजह से कमजोर प्रदर्शन को बढ़ावा मिल रहा है। ऊंचे मूल्य निर्धारण दबाव, आपूर्ति संबंधित व्यवधान, और अच्छी पेशकशों के अभाव से अमेरिकी व्यवसाय की वृद्घि प्रभावित हुई है।’ इसके अलावा, ताजा यूएस एफडीए निरीक्षणों से इसे लकर आपत्तियां बढ़ी हैं कि इससे भारतीय कंपनियों की पेशकश योजनाएं ठंडे बस्ते में पड़ सकती हैं। कच्चे माल की कीमतों में भारी तेजी, आपूर्ति व्यवधान, कंटेनर उपलब्धता को लेकर समस्या, और ऊंची माल ढुलाई लागत से सकल और परिचालन मुनाफा मार्जिन प्रभावित हुआ है। मोतीलाल ओसवाल रिसर्च के अनुसार कुछ कंपनियों (सन फार्मा और बायोकॉन) को छोड़कर, ज्यादातर ने सालाना आधार पर परिचालन मुनाफा मार्जिन में गिरावट दर्ज की है और यह औसत गिरावट 100 आधार अंक तक की रही है।
कई ब्रोकरों का मानना है कि अमेरिका में बिक्री पर दबाव कम से कम वित्त वर्ष 2022 के अंत तक बना रहेगा, जिससे बड़ी जेनेरिक कंपनियों की बिक्री और लाभ प्रभावित हो रहे हैं। आईआईएफएल रिसर्च के राहुल जीवानी और पुनीत पुजारा का कहना है, ‘भारतीय जनेरिक कंपनियों के लिए प्रमुख अमेरिकी उत्पाद पेशकशों के अगले चरण (जो कैलेंडर वर्ष 2022 की दूसरी छमाही में ही संभव है) को देखते हुए, हमारा मानना है कि अमेरिका केंद्रित जेनेरिक कंपनियों के लिए स्थिति अगली दो-तीन तिमाहियों तक कमजोर बनी रहेगी। इसके परिणामस्वरूप, हम जेबी केमिकल्स और अल्केम जैसी भारत-केंद्रत फॉमूलेशन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं, जो लगातार भारत में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।’
बड़ी कंपनियों में, सिप्ला कई ब्रोकरों का पसंदीदा शेयर बना हुआ है और यह शुक्रवार को निफ्टी-50 शेयरों में सबसे ज्यादा चढऩे वाला शेयर रहा। इसमें 7 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई। घरेलू सेगमेंट में मजबूत वृद्घि के अलावा अमेरिकी में पेशकशों से राजस्व वृद्घि और मार्जिन की रफ्तार ऊंची बने रहने की संभावना है। बहुराष्ट्रीय फार्मा श्रेणी में, एबट इंडिया और फाइजर मुख्य पसंदीदा दांव हैं।

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First Published - November 28, 2021 | 11:47 PM IST

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