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बॉन्ड से पूंजी जुटाने की रफ्तार धीमी, दिग्गज सरकारी कंपनियों ने उम्मीद से कम इश्यू जारी किए

अगले महीने होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रीपो दर में कटौती की उम्मीद है जिससे अल्पावधि के बॉन्ड पर ब्याज दर (शार्ट टर्म रेट) कम हो सकती है

Last Updated- November 25, 2025 | 11:11 PM IST
Bonds

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी), पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन (पीएफसी), ऐक्सिस बैंक और सुंदरम फाइनैंस ने आज घरेलू प्रतिभूति बाजार से कुल करीब 14,500 करोड़ रुपये जुटाए जबकि उम्मीद 25,000 करोड़ रुपये के आसपास बॉन्ड जारी किए जाने की थी। पीएफसी और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा अपने अल्पावधि वाले निर्गम वापस लिए जाने से कुल बॉन्ड निर्गम कम रहा।

दरअसल अगले महीने होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रीपो दर में कटौती की उम्मीद है जिससे अल्पावधि के बॉन्ड पर ब्याज दर (शार्ट टर्म रेट) कम हो सकती है। इसलिए कंपनियों के लिए बाद में पूंजी जुटाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को कहा था कि आगे दर कटौती की गुंजाइश कम नहीं हुई है। गवर्नर के बयान के बाद 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड घट गई थी। उनकी यह टिप्पणी छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक से एक हफ्ते पहले आई है। 3 दिसंबर से शुरू होने वाली बैठक से जुड़े फैसले की घोषणा 5 दिसंबर को की जाएगी।

सार्वजनिक क्षेत्र की पीएफसी ने 3,000 करोड़ रुपये और नाबार्ड ने 7,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड निर्गम वापस ले लिए। इन निर्गम को 3 साल से थोड़ा ज्यादा समय के लिए जारी किया जा रहा था। हालांकि सिडबी ने 37 महीने में परिपक्व होने वाले बॉन्ड के जरिये 6.74 फीसदी ब्याज पर 5,935 करोड़ रुपये जुटाये। सिडबी ने 6,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी किए थे। दूसरी तरफ पीएफसी ने 7.08 फीसदी ब्याज पर 10 वर्षीय बॉन्ड के जरिये 3,000 करोड़ रुपये जुटाये।

भारत में निजी क्षेत्र के तीसरे सबसे बड़े ऋणदाता ऐक्सिस बैंक ने भी आज बॉन्ड बाजार से 10 वर्षीय इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड के जरिये 7.27 फीसदी पर 5,000 करोड़ रुपये जुटाए। यह चालू वित्त वर्ष में किसी ऋणदाता द्वारा जारी किया गया पहला इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड है। सुंदरम फाइनैंस ने भी 800 करोड़ रुपये जुटाए हैं। कुल 800 करोड़ रुपये में से 240 करोड़ रुपये एंकर निवेशकों से आए।

सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के डीलर ने कहा, ‘नाबार्ड ने अपना निर्गम इसलिए वापस ले लिया क्योंकि सिडबी ने करीब 6.74 फीसदी ब्याज पर निर्गम जारी किया था। नाबार्ड की आधार ब्याज दर 6.74 फीसदी थी जबकि पूरे निर्गम की ब्याज दर 6.78 फीसदी थी। नाबार्ड को कम ब्याज की उम्मीद थी जो पूरी नहीं हुई। इस बीच पीएफसी को 10 साल के बॉन्ड के लिए 7.08 फीसदी का दर मिला जो कई एसडीएल से काफी बेहतर है, इसलिए वह अल्पावधि के निर्गम के लिए तैयार नहीं हुआ। नाबार्ड और पीएफसी दोनों 5 दिसंबर के बाद निर्गम ला सकते हैं।’

बाजार के जानकारों के अनुसार कम अवधि वाले निर्गम को खरीदार मिलना मुश्किल हो गया जिसके चलते पीएफसी और नाबार्ड ने अपने 3 साल वाले निर्गम वापस ले लिए जबकि सिडबी पूरे 6,000 करोड़ रुपये के निर्गम को पार लगाने में कामयाब रहा। इसके उलट ऐक्सिस बैंक और पीएफसी ने अपने लंबी अवधि के निर्गम के साथ आगे बढ़ने का निर्णय किया और निवेशकों की भी इसमें अच्छी दिलचस्पी देखी गई।

रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, ‘यह अंतर साफ तौर पर बाजार के बदलते माहौल को दिखाता है। कई कंपनियां ऊंची दर अल्पावधि के निर्गम लाने से हिचक रही हैं क्योंकि मौद्रिक नीति समिति की बैठक में दर कटौती की उम्मीद है।’

उन्होंने यह भी कहा कि बड़े संस्थागत निवेशक लंबी अवधि के बॉन्ड को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हालांकि अल्पावधि के निर्गम को एक ही दिन में लगभग 17,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी होने से भी मुश्किल का सामना करना पड़ा।

श्रीनिवासन ने कहा, ‘इन घटनाक्रम से पता चलता है कि लंबी अवधि के निर्गम की मांग स्थिर है मगर अल्पावधि के निर्गम को जारी करने का समय सोच समझकर तय करने की जरूरत है। मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले कंपनियां निर्गम के समय और परिपक्वता अवधि को लेकर ज्यादा सजग हो रही हैं।’

बाजार के जानकारों ने बताया कि केनरा बैंक इस हफ्ते टियर 2 बॉन्ड लाना चाह रहा है और दिसंबर में भी कुछ अन्य बैंक इसी तरह का बॉन्ड ला सकते हैं। अंतिम तिमाही में कुछ इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड जारी होने की भी उम्मीद है।

First Published - November 25, 2025 | 10:58 PM IST

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