लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने 6,000 करोड़ रुपये के पांच वर्षीय बॉन्ड जारी करने की योजना निवेशकों के ज्यादा यील्ड की मांग के कारण वापस ले ली। उधर सरकारी बैंकों इंडियन बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 10 वर्षीय आधारभूत ढांचे के बॉन्ड के जरिए 8,000 करोड़ रुपये जुटाए। इस क्रम में इंडियन बैंक ने 7.15 प्रतिशत और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 7.16 प्रतिशत की दर से राशि जुटाई। इससे एक दिन पहले ही 10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड 10 आधार अंक बढ़कर 6.84 प्रतिशत के करीब पहुंच गई थी।
सिडबी का 1,500 करोड़ रुपये का बेस इश्यू और 4,500 करोड़ रुपये का ग्रीन शू विकल्प था। सिडबी को पांच साल के इश्यू के लिए 7.65 से 7.90 प्रतिशत की रेंज में बोलियां प्राप्त हुईं, जो कुल मिलाकर 6,000 करोड़ रुपये के इश्यू आकार के मुकाबले लगभग 1,500 से 2,100 करोड़ रुपये थीं।
इससे पहले सिडबी ने 4 मार्च को लगभग 7.40 प्रतिशत की बोलियां खारिज कर दी थीं, जब उसे लगभग 3.4 साल की परिपक्वता अवधि वाले 5,000 करोड़ रुपये के इश्यू के लिए बोलियां प्राप्त हुई थीं। दरअसल, 10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूतियां शुक्रवार के बंद भाव से 14 आधार अंक तेजी से बढ़कर अंतरदिवसीय कारोबार में 6.88 प्रतिशत बढ़ गया। यह महंगाई की आशंकाओं, तेल संकट और वैश्विक अनिश्चितता को दर्शाता है।
रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक व प्रबंध भागीदार वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, ‘सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के बैंकों के जारी किए जाने वाले प्राथमिक बॉन्डों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। इस क्रम में महत्वपूर्ण बात यह है कि इनकी कीमतें स्थिर हैं। सरकारी बैंकों के बॉन्डों की कीमतें लगभग 7.05-7.16 प्रतिशत के सीमित दायरे में स्थिर हैं।’