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माइक्रोफाइनैंस सेक्टर को बड़ा सहारा: सरकार ने ₹20,000 करोड़ की क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की

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इस योजना का मुख्य उद्देश्य सदस्य ऋणदाता संस्थानों, खास तौर पर वाणिज्यिक बैंकों और भारतीय वित्तीय संस्थानों को एमएफआई को दिए जाने वाले ऋण के लिए गारंटी कवरेज प्रदान करना है

Last Updated- March 20, 2026 | 11:12 PM IST
microfinance

केंद्र सरकार ने आज माइक्रोफाइनैंस संस्थानों (एमएफआई) के लिए 20,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की। इस योजना का उद्देश्य एमएफआई क्षेत्र में नकदी की तंगी को दूर करना और ऋण प्रवाह को बढ़ाना है। यह योजना 20 मार्च से 30 जून, 2026 तक या कुल गारंटी कवरेज 20,000 करोड़ रुपये की सीमा तक पहुंचने तक (जो भी पहले हो) सक्रिय रहेगी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य सदस्य ऋणदाता संस्थानों, खास तौर पर वाणिज्यिक बैंकों और भारतीय वित्तीय संस्थानों को एमएफआई को दिए जाने वाले ऋण के लिए गारंटी कवरेज प्रदान करना है। यह फंडिंग विशेष रूप से नए ऋण के लिए है और इसका उपयोग मौजूदा ऋणों को चुकाने के लिए नहीं किया जा सकता है। गारंटी की संरचना इस तरह से तैयार की गई है कि इससे छोटे माइक्रोफाइनैंस संस्थानों को लाभ हो, जिन्हें अक्सर बैंक ऋण प्राप्त करने में बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी एमएफआई के आकार के आधार पर मूलधन और ब्याज (डिफॉल्ट राशि) को कवर करेगी। 500 करोड़ रुपये से कम की प्रबंधनाधीन संपत्ति (एयूएम) वाले छोटे माइक्रोफाइनैंस संस्थानों के लिए यह 80 फीसदी की गारंटी कवर प्रदान करती है। इसी तरह 500 करोड़ रुपये से 2,000 करोड़ रुपये के बीच संपत्ति वाले मध्यम आकार के एमएफआई के लिए 75 फीसदी और 2,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक की एयूएम वाले बड़े एमएफआई के लिए 70 फीसदी गारंटी दी जाती है।

माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र के लिए स्व-नियामक संगठन एमफिन को उम्मीद है कि यह योजना ऋणदाताओं के विश्वास को बहाल करके ऋण प्रवाह में सुधार लाएगी और विशेष रूप से छोटे और मध्यम एमएफआई को बैंक ऋण सुलभ कराएगी। वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही से वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के बीच एमएफआई को बैंकों से मिलने वाले ऋण में लगभग 70 फीसदी की कमी आई है।

पोर्टफोलियो की गुणवत्ता में सुधार के बावजूद यह क्षेत्र नकदी की कमी से प्रभावित है। एमफिन का अनुमान है कि लगभग 50 लाख उधारकर्ताओं ने औपचारिक ऋण तक पहुंच खो दी है जो फंडिंग प्रवाह को बहाल करने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।

सरकार द्वारा समर्थित इस सुरक्षा गारंटी का लाभ जरूरतमंद उधारकर्ताओं तक पहुंचे इसके लिए ब्याज दरों पर सख्त सीमा और आवंटन के अनिवार्य नियम लागू किए गए हैं। बैंकों द्वारा एमएफआई को स्वीकृत ऋणों पर ब्याज दर की ऊपरी सीमा बाह्य बेंचमार्क उधारी दर या 1-वर्षीय एमसीएलआर, जिसमें 2 फीसदी प्रतिवर्ष अतिरिक्त जोड़ा गया हो, तक निर्धारित की गई है।

इसके अलावा एमएफआई को यह सुनिश्चित करके इन लाभों को आगे बढ़ाना आवश्यक है कि छोटे उधारकर्ताओं के लिए उनकी ऋण दर पिछले 6 महीनों की उनकी औसत ऋण दर से कम से कम 1 फीसदी कम हो। सदस्य ऋण संस्थानों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि योजना के तहत उनके कुल ऋणों का कम से कम 5 फीसदी छोटे एमएफआई को और 10 फीसदी मध्यम आकार के एमएफआई को स्वीकृत किया जाए।

दिशानिर्देश जवाबदेही और नई संपत्ति के निर्माण पर भी जोर देते हैं। एमएफआई को वित्तीय सहायता का उपयोग वितरण के तीन महीने के भीतर नए ऋण संपत्तियों के लिए करना होगा और योजना के तहत दी गई ऋण सुविधाओं के लिए एक अलग खाता रखना होगा।

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First Published - March 20, 2026 | 10:47 PM IST

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