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बैंकिंग सुधारों पर सरकार का बड़ा कदम, जमा से लेकर क्रेडिट तक 7 मुद्दों पर मंथन

बैंकिंग समिति वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को सुरक्षित रखते हुए क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करेगी

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कृति अंबे   
Last Updated- August 17, 2026 | 9:51 PM IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार जल्द ही एक उच्च अधिकार प्राप्त बैंकिंग समिति का गठन करेगी। यह समिति ‘विकसित भारत’ से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों पर विचार करेगी।

उन्होंने कहा कि सोमवार और मंगलवार को दो दिवसीय ‘पीएसबी कॉन्फ्लुएंस’ में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (पीएफआई) के साथ हुई चर्चा  इसके लिए खाके का काम करेगी।  इस कार्यक्रम के दौरान सीतारमण ने कहा, ‘आज और कल हुई गंभीर चर्चा ऐसे समय में हो रही हैं जब हम ‘विकसित भारत’ के लिए बैंकिंग पर गौर करने वाली उच्च अधिकार प्राप्त समिति की घोषणा की उम्मीद कर रहे हैं।

जल्द ही समिति की घोषणा की जाएगी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘उम्मीद है कि आपकी 2 दिन की चर्चा से प्राप्त सामग्री समिति के समीक्षा के लिए ठोस सामग्री प्रदान करेगी। समिति को अपनी सिफारिशें देते समय उनके पास यह सामग्री होगी।’

सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ‘विकसित भारत’ के लिए बैंकिंग पर एक उच्च-स्तरीय समिति गठित किए जाने की घोषणा की थी। यह समिति वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को सुरक्षित रखते हुए क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करेगी और इसे भारत के विकास के अगले चरण के साथ तालमेल के लिए सिफारिशें करेगी।  सरकार के सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि इसी महीने समिति बन सकती है।

वित्त मंत्रालय का वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) नई दिल्ली में सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सम्मेलन में 7 विषयों पर चर्चा कर रहा है, जिसमें जमा जुटाना, युवाओं के लिए बैंकिंग, निवेश चक्र का समर्थन, वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) का समर्थन, कृषि और बागवानी की मूल्य श्रृंखला संबंधी बुनियादी ढांचे, क्रेडिट कार्ड व्यवसाय में नवाचार, और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण शामिल हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि वित्तीय सेवा विभाग ने सम्मेलन के लिए 7 विषयों को बहुत सावधानी और विचारपूर्वक तय किया है, जिससे इसमें विश्व की सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल किया जा सके।  बैंकिंग में विश्व की सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा करने के लिए दो दिवसीय सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में भारतीय बैंकों को विश्व स्तर पर शीर्ष पांच में स्थान दिलाने का लक्ष्य रखा था।

एसऐंडपी ग्लोबल की नवीनतम रैंकिंग के मुताबिक इस समय केवल भारतीय स्टेट बैंक ही विश्व के शीर्ष 50 बैंकों में शामिल है और यह संपत्ति के आकार के हिसाब से 45वें स्थान पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के बैंकों के अगले चरण के विकास में पैमाना, पहुंच और बैलेंस शीट की ताकत बढ़ाना शामिल है। ईवाई इंडिया में नैशनल फाइनैंशियल सर्विसेज लीडर प्रतीक शाह ने कहा, ‘वैश्विक दिग्गज उल्लेखनीय रूप से बड़े संपत्ति आकार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करते हैं।

इस अंतर को पाटने के लिए 4 प्रमुख रणनीतिक आयामों पर काम करने की जरूरत है, जिमें बैलेंस शीट का विस्तार, मजबूत कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट, वैश्विक व्यापार में अधिक हिस्सेदारी और उत्पादकता व जोखिम प्रबंधन मजबूत करने के लिए आर्टीफिशल इंटेलिजेंस पर आधारित बदलाव शामिल है।’

शाह ने कहा, ‘वैश्विक स्तर पर काम करने वाले कुछ बड़े बैंक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भारत की मौजूदगी बढ़ा सकते हैं, विलय से आकार बढ़ सकता है, लेकिन सिर्फ इससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा तय नहीं होगी।’ भारत जैसी विविधता वाली अर्थव्यवस्था में संतुलित और बहु स्तरीय बैंकिंग का वातावरण बनाने की जरूरत है।

भारतीय बैंकों को सतत ऋण वृद्धि, बुनियादी ढांचे और विनिर्माण वित्तपोषण में गहरी भागीदारी, कॉर्पोरेट, व्यापार और सीमा पार पूंजी प्रवाह के मजबूत समर्थन, और अंतरराष्ट्रीय फ्रेंचाइजी के विस्तार के माध्यम से पैमाना बनाना जारी रखना चाहिए।

सरकार ने 2020 में बैंकों के विलय का एक दौर शुरू किया था, जब 27 सरकारी बैंकों को 12 बड़े बैंकों में तब्दील किया गया था।  सीतारमण ने फरवरी में कहा था कि उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति बैंकों के एकीकरण के साथ अन्य सभी पहलुओं पर विचार करेगी, जिससे बैंकिंग इकोसिस्टम मजबूत हो सके।

मंत्री ने कहा, ‘विकसित भारत 2047 के लिए बैंकिंग के बारे में बात करने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता था, खासकर उस संघर्ष के बाद जिससे आप सभी गुजरे हैं और उससे उभरे हैं।’  पिछले पांच वर्षों में सरकारी बैंकों का शुद्ध लाभ तीन गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गया। सरकारी बैंकों की कुल सकल गैर निष्पादित संपत्तियां 31 मार्च 2022 के 7.3 प्रतिशत से घटकर 31 मार्च 2026 को सर्वकालिक निम्न 1.9 प्रतिशत रह गया है।

First Published : August 17, 2026 | 9:42 PM IST