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‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ पर जल्द बनेगी हाई-लेवल कमेटी: निर्मला सीतारमण

सरकार बैंकिंग सुधारों के जरिए विकास, वित्तीय स्थिरता और समावेशन को नई दिशा देगी

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भाषा   
Last Updated- August 17, 2026 | 2:24 PM IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ पर सरकार जल्द ही एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करेगी। यह समिति देश के बैंकिंग सेक्टर की व्यापक समीक्षा करेगी और भारत की अगली विकास यात्रा की जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सुझाव देगी। वित्त मंत्री ने यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय पीएसबी सम्मेलन के दौरान की।

सरकार की इस पहल का मकसद बैंकिंग सेक्टर को तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करना है। इसके साथ ही वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

बजट में था उच्चस्तरीय समिति का प्रस्ताव

वित्त मंत्री ने 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए बजट में विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर हाई-लेवल कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा था। इस समिति को बैंकिंग सेक्टर की मौजूदा व्यवस्था, चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों की व्यापक समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। बजट में सरकार ने स्पष्ट किया था कि भारत की अर्थव्यवस्था विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रही है। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम को भी इस बदलाव के अनुरूप तैयार करना जरूरी है, ताकि वह आर्थिक गतिविधियों और निवेश को पर्याप्त समर्थन दे सके।

जल्द होगी समिति के गठन की घोषणा

पीएसबी सम्मेलन को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर की समीक्षा के लिए हाई-पावर कमेटी की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही समिति के गठन की घोषणा करेगी। वित्त मंत्री के मुताबिक, समिति बैंकिंग सेक्टर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार और सिफारिशें सरकार के सामने रखेगी। इन सुझावों के आधार पर भविष्य में बैंकिंग सेक्टर से जुड़े नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं।

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वित्तीय स्थिरता और ग्राहक सुरक्षा पर जोर

सरकार के प्रस्ताव में केवल बैंकिंग सेक्टर की आर्थिक क्षमता बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। वित्तीय स्थिरता का मतलब बैंकिंग सिस्टम को ऐसे जोखिमों से सुरक्षित रखना है, जो पूरे वित्तीय तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं वित्तीय समावेशन के तहत बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं की पहुंच उन लोगों तक बढ़ाने पर जोर रहेगा, जो अभी भी औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़े हैं।

उपभोक्ता संरक्षण भी समिति के एजेंडे का अहम हिस्सा होगा। डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के तेजी से विस्तार के बीच ग्राहकों के हितों और उनकी सुरक्षा को मजबूत करना महत्वपूर्ण हो गया है।

बैंकिंग सेक्टर की अहम भूमिका

भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। बैंक उद्योग, छोटे कारोबार, बुनियादी ढांचे, कृषि और आम उपभोक्ताओं को कर्ज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि बैंकिंग व्यवस्था आर्थिक विकास की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक मजबूत और सक्षम बने। उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों से बैंकिंग सेक्टर में भविष्य के सुधारों की दिशा तय होने की उम्मीद है।

सरकार द्वारा समिति के गठन की घोषणा के बाद इसके सदस्यों, कार्यक्षेत्र और समयसीमा की जानकारी सामने आने की उम्मीद है। समिति की रिपोर्ट बैंकिंग सेक्टर में संभावित सुधारों और नीतिगत बदलावों के लिए आधार तैयार कर सकती है।

First Published : August 17, 2026 | 1:36 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)