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आईसीआईसीआई के आसमान में चंदा की चमक

Last Updated- December 08, 2022 | 10:05 AM IST

उनकी काबिलियत और चुनौतियों का सामने आकर सामना करने की कुव्वत ही शायद वह बात होगी, जिसकी वजह से कई दिन पहले ही वित्तीय जगत ने यह अंदाजा लगा लिया था कि देश में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई बैंक की कमान चंदा कोछड़ को थमाई जाएगी।


उम्मीदें पूरी भी हुईं, जब शुक्रवार को कोछड़ को संयुक्त प्रबंध निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी के पद से बैंक का मुख्य कार्य अधिकारी बना दिया गया। एक शीर्ष बैंक के शीर्ष पद पर किसी महिला का पहुंचना वाकई एक सपना है, लेकिन कोछड़ ने इसे सच कर दिखाया।

सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि वित्तीय कंपनी आईसीआईसीआई में 1984 में कोछड़ बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी शामिल हुई थीं और बाद में आईसीआईसीआई बैंक की बुनियाद रखे जाने पर कोछड़ उसमें चली गईं। एक ही संस्थान के साथ 24 साल का लंबा सफर तय करने के बाद उसकी कमान भी उन्होंने अपने हाथों में ले ली।

राजस्थान के जोधपुर जिले में 17 नवंबर 1961 को जन्मी चंदा कोछड़ ने मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा हासिल की। कॉलेज के दिनों में बैडमिंटन की शौकीन कोछड़ शुरू से ही आंकड़ों में माहिर थीं।

उन्होंने जब एमबीए और कॉस्ट एकाउन्टेंसी की शिक्षा हासिल की, तब भी चुनौतियों का सामना करने का उनका जज्बा ही था, जिसने उन्हें सोने का तमगा दिलाया। खेलों के साथ किताबों का तालमेल बिठाते हुए वह दोनों में अव्वल रहीं।

दो संतानों की मां की सफल भूमिका निभाने वाली कोछड़ को 1993 में उस समय आईसीआईसीआई बैंक में शामिल किया गया, जब बैंक की बुनियाद रखी गई। रिटेल बैंकिंग में खास दक्षता के चलते कोछड़ ने इस कारोबार को अच्छा खासा आगे बढ़ाया।

यह उन्हीं की मेहनत थी कि कार और दोपहिया वाहनों के लिए कर्ज देने के मामले में आईसीआईसीआई बैंक आज भी सबसे प्रमुख नाम है। इसी खासियत की वजह से 2000 में कोछड़ को बैंक में रिटेल बैंकिंग की कमान भी दे दी गई।

वह अप्रैल 2001 में कार्यकारी निदेशक बनीं और चार साल तक आईसीआईसीआई बैंक ने बेस्ट रिटेल बैंक का खिताब हासिल किया।

2004 में कोछड़ को वर्ष के रिटेल बैंकर का सम्मान भी दिया गया। कॉर्पोरेट ऋण, बुनियादी ढांचे की फाइनैंसिंग, ई-कॉमर्स नीति और रिटेल कारोबार में कोछड़ को जबरदस्त तजुर्बा है।

उन्हें 29 अप्रैल 2006 को बैंक का उप प्रबंध निदेशक बनाया गया। इससे पहले उन्होंने आईसीआईसीआई होम फाइनैंस कंपनी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी और आईसीआईसीआई  बैंक कनाडा में भी अहम ओहदों पर काम किया।

बैंकिंग व्यवसाय के प्रति कोछड़ के समर्पण की वजह से ही फर्ॉच्यून ने 2007 में उन्हें कारोबारी जगत की सबसे ताकतवर महिलाओं की फेहरिस्त में जगह दी। कोछड़ को इसमें 33वीं पायदान पर रखा गया।

फिलहाल कोछड़ के अलावा बायोकॉन लिमिटेड की चेयरमैन किरण मजूमदार शॉ, एचएसबीसी होल्डिंग्स की भारतीय इकाई की मुख्य कार्य अधिकारी नैना लाल किदवई और जे पी मॉर्गन चेज ऐंड कंपनी की कंट्री प्रमुख कल्पना मोरपरिया ही कारोबारी जगत में शीर्ष पर बैठी महिलाएं हैं।

लेकिन कोछड़ के सामने बैंक की कमान संभालने के बाद तमाम तरह की चुनौतियां हैं। वैश्विक मंदी की वजह से आईसीआईसीआई बैंक के शेयर जमीन पर आ चुके हैं।

उन्हें संभालना आसान नहीं होगा। जानकार भी मानते हैं कि फंसे हुए ऋणों की वसूली करना और बैंक की बिगड़ती छवि को सुधारना कोछड़ के लिए पहला काम होगा।

हालांकि अपनी टीम के साथ बैंक के रिटेल कर्ज कारोबार को 20 गुना करने वाली कोछड़ के लिए यह बहुत मुश्किल भी नहीं होगा। उन्होंने कमान संभालने का पैगाम मिलने के बाद अपने इरादे जाहिर भी कर दिए।

कोछड़ ने कहा, ‘नकदी का टोटा है, इसलिए हम अपने कामकाज को सीमित करेंगे और बेहतर बनाएंगे। हमारा मकसद महंगे थोक जमा पर अपनी निर्भरता कम से कम करना होगा।’ उनका यह बयान एक लंबी और कामयाब पारी के लिए बेहतर शुरुआत हो सकता है।

First Published - December 19, 2008 | 9:28 PM IST

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