बैंकिंग प्रणाली में शुद्ध नकदी दो महीने के बाद घाटे के स्तर पर पहुंच गई है। दरअसल, यह गिरावट अग्रिम कर की अदायगी और जीएसटी भुगतान होने के कारण हुई। इससे नकदी में करीब 3 लाख करोड़ रुपये की कमी हुई। इससे पहले चालू वर्ष में 21 जनवरी को बैंकिंग प्रणाली की नकदी घाटे में थी।
भारतीय रिज़र्व बैंक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार रविवार को शुद्ध तरलता 65,395 करोड़ रुपये के घाटे में थी। निजी बैंक के वित्त प्रमुख ने कहा, ‘नकदी में यह कमी 2 लाख करोड़ रुपये के अग्रिम कर भुगतान और लगभग 1 ट्रिलियन रुपये के जीएसटी भुगतान के कारण हुई है।’ विशेषज्ञों का कहना है कि मूल नकदी पर्याप्त बनी हुई है और सरकारी व्यय के समर्थन से अप्रैल के पहले सप्ताह में प्रणाली की नकदी अधिशेष में लौटने की उम्मीद है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘अभी भी कोर लिक्विडिटी लगभग 5 लाख करोड़ रुपये पर काफी अधिक है। यह अस्थायी घाटा है और अप्रैल के पहले सप्ताह में सरकारी खर्च शुरू होने के बाद यह फिर से अधिशेष में बदल जाएगा।’
इसके परिणामस्वरूप रिजर्व बैंक ने 1 लाख करोड़ रुपये की ओवरनाइट वेरिएबल रेट रेपो नीलामी आयोजित की। केंद्रीय बैंक को अधिसूचित राशि के मुकाबले 79,256 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं। रिजर्व बैंक ने अधिसूचित राशि को 5.26 प्रतिशत की भारित औसत दर पर जारी किया।