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कर संग्रह बढ़ा, लेकिन सीमा एवं उत्पाद शुल्क में आई कमी

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Last Updated- December 11, 2022 | 5:07 PM IST

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सीमा एवं उत्पाद शुल्क से पिछले साल की समान अवधि की तुलना में खजाने में 10 प्रतिशत कम राजस्व आया है, जबकि कुल मिलाकर कर संग्रह बजट के अनुमान को पार कर गया है। कर संग्रह में बढ़ोतरी मुख्य रूप से प्रत्यक्ष कर और वस्तु सेवा कर (जीएसटी) में बढ़ोतरी की वजह से हुई है। आगे चलकर इसकी भरपाई अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफाल टैक्स) से हो सकती है, जो सरकार ने घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन और ईंधन उत्पादों के निर्यात पर लगाया है।
वित्त वर्ष 2023 की अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सीमा शुल्क से उत्पाद कर करीब 12 प्रतिशत घटकर 36,467 करोड़ रुपये रह गया है और उत्पाद शुल्क 10 प्रतिशत गिरकर 61,228 करोड़ रुपये रहा है। लेखा महानियंत्रक की ओर से हाल में जारी आंकड़ों सेपता चलता है कि वित्त वर्ष 23 की पहली तिमाही में उत्पाद एवं सीमा शुल्क से राजस्व प्राप्ति 10.59 प्रतिशत घटकर 97,695 करोड़ रुपये रह गई है, जो पिछले साल की समान अवधि में 1.09 लाख करोड़ रुपये थी।
उत्पाद शुल्क संग्रह में कमी समझ में आती है क्योंकि बजट अनुमान में 2022-23 में यह 14 प्रतिशत कम रहकर 3,35,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था, जबकि 2021-22 में वास्तविक संग्रह 3,90,807 करोड़ रुपये था, लेकिन सीमा शुल्क प्राप्तियों का व्यवहार थोड़ा तकनीकी है।

 
ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकार ने  2021-22 के  दौरान 4  नवंबर को पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 5 रुपये लीटर और डीजल पर 10 रुपये लीटर कम कर दिया था। उसके बाद सरकार ने पेट्रोल पर 8 रुपये और डीजल पर 6 रुपये कर कम करने की घोषणा 21 मई को की, जिसका बजट में अनुमान नहीं लगाया गया था। हाल की कटौती से एक साल में खजाने को 1 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 23 के शेष महीनों में 86,000 करोड़ रुपये की चपत लगेगी।

 
1 अप्रैल, 2017 को जीएसटी पेश किए जाने के बाद से उत्पाद शुल्क संग्रह का 90 प्रतिशत से ज्यादा पेट्रोलियम क्षेत्र से आता है। उदाहरण के लिए पेट्रोलियम सेक्टर की उत्पाद शुल्क में हिस्सेदारी 2021-22 में 3.63 लाख करोड़ रुपये रही है, जो इस कर से आने वाले कुल 3.91 लाख करोड़ रुपये का करीब 93 प्रतिशत है।

 
बहरहाल सीमा शुल्क में वित्त वर्ष 23 की पहली तिमाही में गिरावट की वजह अप्रैल के मामूली आंकड़े हैं, जब संग्रह 42 प्रतिशत गिरकर 10,272 करोड़ रुपये रह गया था, जो एक साल पहले समान महीने में 17,906 करोड़ रुपये था।
 
बजट में वित्त वर्ष 23 के दौरान सीमा शुल्क संग्रह 7 प्रतिशत बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था, जो इसके पहले के साल में 1.90 लाख करोड़ रुपये था।
 

इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि सीमा शुल्क संग्रह में अप्रैल 2022 में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में गिरावट मुख्य रूप से सोने के कम मूल्य के आयात की वजह से हो सकता है, जबकि गैर तेल और गैर स्वर्ण आयात में उच्च बढ़ोतरी हुई है। 
अप्रैल महीने में सोने का आयात 72.35 प्रतिशत गिरकर 1.7 अरब डॉलर रह गया है, जो पिछले साल अप्रैल में 6.2 अरब डॉलर का हुआ था। बहरहाल मई महीने में यह 789 प्रतिशत बढ़कर 6 अरब डॉलर हो गया।
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट ने भी अहम भूमिका निभाई है, क्योंकि सीमा शुल्क रुपये के हिसाब से आता है। अप्रैल में रुपया जहां डॉलर के मुकाबले  76.18 पर था, यह मई में घटकर 77.29 और जून में 78.01 पर आ गया। 

 

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First Published - August 3, 2022 | 11:49 AM IST

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