मशहूर किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने हाल ही में एक पोस्ट में अपनी जिंदगी के उस अहम दौर के बारे में बताया, जिसने उनकी सोच और आगे का रास्ता बदल दिया। उन्होंने अपने मेंटर आर. बकमिन्स्टर फुलर की सोच को बिटकॉइन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य से भी जोड़ा। कियोसाकी के मुताबिक, उनकी जिंदगी की दिशा बदलने में फुलर की भूमिका काफी अहम रही। उनका मानना है कि तेजी से बदलती तकनीक सिर्फ कमाई के तरीकों को ही नहीं बदलेगी, बल्कि लोगों के काम करने के तरीके और समाज में दौलत के बंटवारे पर भी असर डालेगी।
कियोसाकी ने बताया कि उन्होंने फुलर के साथ लगातार तीन गर्मियों तक पढ़ाई की थी। फुलर अपने दौर के जाने-माने आर्किटेक्ट, सिस्टम्स थ्योरिस्ट और आविष्कारक थे। उन्हें खास तौर पर जियोडेसिक डोम के लिए जाना जाता है। फुलर की सोच इस बात पर केंद्रित थी कि कम संसाधनों का इस्तेमाल करके ज्यादा काम कैसे किया जा सकता है। उन्होंने इस विचार को घर बनाने से लेकर दुनिया के संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल तक के मामलों में लागू करने पर जोर दिया था।
WORDS of TRANSFORMATION💥
Years ago, I was making a lot of money in the Rock n Roll business developing products for bands such as the Police, Van Halen, Iron Maiden and more. It was fun because I often got to hangout back stage with the band.
As much fun and profitable as…
— Robert Kiyosaki (@theRealKiyosaki) August 13, 2026
फुलर से मुलाकात से पहले कियोसाकी रॉक मर्चेंडाइजिंग के कारोबार में काम करते थे। यह काम उनके लिए कमाई के लिहाज से अच्छा चल रहा था, लेकिन उन्हें लगता था कि इसमें पैसे कमाने के अलावा कोई बड़ा मकसद नहीं है। फुलर के साथ बिताई गई तीन गर्मियों ने उनकी सोच पूरी तरह बदल दी।
कियोसाकी फुलर को बहुत बड़ी प्रतिभा वाला व्यक्ति मानते हैं। उनके मुताबिक, फुलर की एक बड़ी सीख थी कि इंसान सिर्फ अपने लिए नहीं जीता। जिंदगी का असली मकसद दूसरों के काम आना और उनके फायदे के लिए कुछ करना है। आगे चलकर यही सोच कियोसाकी के वित्तीय शिक्षा से जुड़े काम का आधार बनी।
कियोसाकी का कहना है कि फुलर ने ऐसे तकनीकी बदलावों की भी बात की थी, जो आने वाले समय में समाज में काम करने के तरीके और आर्थिक व्यवस्था को बदल सकते हैं। हालांकि, फुलर का निधन 1983 में हो गया था और उस समय बिटकॉइन अस्तित्व में भी नहीं था। ऐसे में यह कहना सही नहीं होगा कि फुलर ने खास तौर पर बिटकॉइन या AI की भविष्यवाणी की थी। बिटकॉइन और AI से फुलर की सोच को जोड़ना कियोसाकी की अपनी व्याख्या है।
कियोसाकी की सोच में बिटकॉइन की भी अहम जगह है। मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, उस समय बिटकॉइन करीब 62,773 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। यह अक्टूबर 2025 में बनाए गए 126,000 डॉलर से ज्यादा के रिकॉर्ड हाई के मुकाबले करीब 50 फीसदी नीचे था।
इसके बावजूद कियोसाकी का बिटकॉइन पर भरोसा बना हुआ है। उनका मानना है कि यह अमेरिकी सरकार की बढ़ती मनी सप्लाई और अमेरिका के बढ़ते कर्ज से बचाव का एक जरिया है। कियोसाकी का दावा है कि वह 2012 से बिटकॉइन में निवेश कर रहे हैं। उन्होंने यह अनुमान भी लगाया है कि आने वाले समय में बिटकॉइन की कीमत 750,000 डॉलर तक पहुंच सकती है।
AI को लेकर भी कियोसाकी का नजरिया काफी स्पष्ट है। उनका कहना है कि AI में बड़े पैमाने पर हो रहा निवेश नई संपत्ति और दौलत पैदा कर रहा है, लेकिन इससे रूटीन काम करने वाली नौकरियों पर खतरा भी बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सिर्फ कर्मचारी की तरह सोचता है तो AI उसकी जगह ले सकता है। वहीं, उद्यमी की तरह सोचने वाला व्यक्ति AI को अपने काम और कमाई के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
कुछ जानकार AI में बढ़ते निवेश, डेटा सेंटर से जुड़े कर्ज और सीमित मात्रा वाली संपत्तियों की ओर पूंजी के जाने के बीच संभावित संबंध देखते हैं। हालांकि, AI में निवेश और बिटकॉइन की कीमत के बीच सीधा संबंध अभी साबित नहीं हुआ है।