facebookmetapixel
Advertisement
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 889 अंक उछला, निफ्टी में 265 अंकों की बढ़तपश्चिम एशिया में हवाई हमलों से कच्चा तेल 7% उछला, ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के करीब पहुंचाRBI के दखल और शेयर बाजार की तेजी से रुपया मजबूत, 13 जुलाई के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर बंदSEBI के नए टोटल एक्सपेंस रेश्यो नियम लागू, फिर भी AMC ने बचाया मार्जिन, मुनाफा भी बढ़ाटाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की Q1 में दमदार शुरुआत, ब्रांडेड कारोबार और ग्रोथ पोर्टफोलियो से बिक्री में दोहरे अंक की बढ़तIRDAI ने प्रो टेक जनरल इंश्योरेंस को लाइसेंस दिया, पतंजलि-डीएस ग्रुप के मैग्मा जनरल इंश्योरेंस अधिग्रहण को भी मंजूरीसाइबर हमलों के बढ़ते खतरे से बैंक सतर्क, 5 साल में साइबर बीमा कवर दोगुना कर 10 करोड़ डॉलर तक पहुंचायायूपी में उद्योगों को बड़ी राहत, ₹1 के शुल्क पर शुरू होगा निर्माण; नया भवन विनियम जल्द होगा लागूSBI ने AT-1 बॉन्ड से जुटाए ₹4,691 करोड़, चालू वित्त वर्ष का पहला परपेचुअल बॉन्ड इश्यूडिग्री के बाद भी नौकरी की चुनौती, कंपनियों को नहीं मिल रहे तैयार उम्मीदवार

कोविड का जोखिम घटाने से अर्थव्यवस्था को ज्यादा मदद

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 3:00 AM IST

विश्व बैंक ने अपनी हाल की एक रिपोर्ट में कहा है कि आंकड़ों से पता चलता है कि कोविड-19 के संक्रमण का जोखिम कम किए बगैर पूरी तरह से कामकाज पटरी पर नहीं आ सकता, भले ही प्रतिबंधों में ढील दे दी जाए।
विश्व बैंक ने इसके लिए दो आंकड़ों का इस्तेमाल किया है- रोजाना बिजली की खपत और रात के समय बिजली की स्थिति, जिससे कि कोविड-19 और और इसे रोकने के लिए उठाए गए कदमों का अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले असर का आकलन किया जा सके।
बैंक के मुताबिक रात के वक्त बिजली की खपत अप्रैल में दो तिहाई से ज्यादा जिलों में घटी और औसत गिरावट 12 प्रतिशत से ज्यादा थी। स्थानीय संक्रमण की दर का भी रात के समय बिजली की खपत पर असर पड़ा है और जहां ज्यादा मामले आए हैं, गिरावट ज्यादा रही है। भारत के बारे में दी गई हाल की रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के हिसाब से इसका असर बहुत ज्यादा है।
बैंक ने कहा है, ‘कोविड-19 के संक्रमण के जोखिम को प्रभावी तरीके से कम करने की कवायदों के बगैर आवाजाही पर स्वैच्छिक रोक के चलते अर्थव्यवस्था के पूरी तरह से पटरी पर आने की संभानवा कम है, भले ही प्रतिबंधों में पूरी तरह से ढील दे दी जाए।’
मई और जून के आंकड़ों से पता चलता है कि मई और जून महीने में भी पहले के तीन सालों की तुलना में रात के समय बिजली की खपत कम रही है।

Advertisement
First Published - August 25, 2020 | 11:39 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement