RBI MPC Meeting August 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अगस्त 2026 की समीक्षा बैठक में रीपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक ने रीपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखने का फैसला लिया। इसके साथ ही MPC ने ‘न्यूट्रल’ (Neutral) मौद्रिक नीति रुख भी बरकरार रखा। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि समिति के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से रीपो रेट को यथावत रखने का समर्थन किया।
तीन से पांच अगस्त तक चली इस बैठक में घरेलू और वैश्विक आर्थिक हालात, महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वित्तीय बाजारों की स्थिति की समीक्षा की गई।
रीपो रेट के साथ-साथ RBI ने अन्य प्रमुख नीतिगत दरों को भी अपरिवर्तित रखा है। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट को 5 फीसदी, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट को 5.5 फीसदी पर बरकरार रखा गया है।
मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई अनुमान के अनुरूप RBI के लक्ष्य से ऊपर पहुंची है। उन्होंने बताया कि महंगाई में बढ़ोतरी का मुख्य कारण खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में वृद्धि है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कोर इंफ्लेशन अभी भी नियंत्रण में है और इसमें कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है। उनका अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) में महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है, जिसके बाद इसमें धीरे-धीरे नरमी आने की संभावना है।
गवर्नर ने कहा कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक महंगाई RBI के अनुमान से थोड़ा कम रही। इसका कारण लागत में बढ़ोतरी का उपभोक्ताओं तक सीमित असर रहना है। उन्होंने कहा कि कीमती धातुओं को छोड़कर आधारभूत महंगाई (Underlying Inflation) अब भी नियंत्रण में है और यह RBI के पहले के अनुमानों के अनुरूप बनी हुई है।
RBI गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक किसी भी नीतिगत बदलाव से पहले महंगाई की दिशा और उसके विभिन्न घटकों को लेकर अधिक स्पष्टता चाहता है। उनका कहना है कि भविष्य के फैसले आने वाले आर्थिक आंकड़ों और महंगाई के रुख को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर अब भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन चालू वित्त वर्ष में इसमें कुछ नरमी रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार नीतियों और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को लेकर बनी अनिश्चितता आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
RBI गवर्नर ने कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह से पश्चिम एशिया में संघर्ष दोबारा बढ़ने के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हुआ है। हालांकि, हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और संभावित समझौते की उम्मीद से बाजार की धारणा में सुधार देखने को मिला है।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कॉरपोरेट नतीजे विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बेहतर रहे हैं। वहीं, निजी खपत (Private Consumption) भी मजबूत बनी हुई है और विवेकाधीन खर्च (Discretionary Spending) में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है। उनके अनुसार, पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। इससे पहले केंद्रीय बैंक ने 6.6 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया था। नए अनुमान के साथ RBI ने संकेत दिया है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं।